दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में रहने वाले आम लोगों, ऑटो चालकों और कमर्शियल वाहन मालिकों को आज सुबह एक बड़ा झटका लगा है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने बुधवार को पूरे दिल्ली-एनसीआर में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में ₹2 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी कर दी है। पिछले महज 14 दिनों के भीतर ईंधन की दरों में यह चौथी बड़ी वृद्धि है, जिसने आम आदमी के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक गैस की बढ़ती लागत और आपूर्ति श्रृंखला में आ रही दिक्कतों के कारण तेल और गैस विपणन कंपनियों ने यह कदम उठाया है। नई दरें आज सुबह 6 बजे से लागू हो चुकी हैं, जिससे अब दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में सफर करना और महंगा हो जाएगा।
चार झटकों ने बिगाड़ा बजट: अब क्या हैं नई दरें?
लगातार बढ़ रही कीमतों ने इस समय हर किसी को परेशान कर रखा है। पिछले दो हफ्तों में यह लगातार चौथी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। इस ₹2 की ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में सीएनजी की कीमत अब एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे पड़ोसी शहरों में टैक्स स्लैब अलग होने के कारण यह कीमतें थोड़ी और ज्यादा हैं।
इस लगातार हो रहे इजाफे का सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिन्होंने पेट्रोल-डीजल की मार से बचने के लिए सीएनजी गाड़ियों का रुख किया था। अब स्थिति यह है कि सीएनजी भी धीरे-धीरे आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही है।
चौतरफा मार: ऑटो, कैब और सब्जियों के दाम बढ़ना तय
ईंधन की कीमतों में जब भी ऐसी बढ़ोतरी होती है, तो उसका असर केवल वाहन मालिकों तक सीमित नहीं रहता। दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन माने जाने वाले ऑटो, ई-रिक्शा और ऐप-बेस्ड कैब (Ola-Uber) चालकों ने अभी से किराए में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी है।
कमर्शियल वाहनों के महंगे होने का सीधा मतलब है कि मंडियों से शहरों तक आने वाली हरी सब्जियों, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई लागत बढ़ जाएगी। आने वाले दिनों में त्योहारों और शादियों के सीजन को देखते हुए यह बढ़ोतरी मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब पर भारी पड़ने वाली है। स्थानीय ट्रांसपोर्ट यूनियनों का कहना है कि अगर सरकार ने इन कीमतों पर टैक्स कम करके राहत नहीं दी, तो वे जल्द ही चक्का जाम या हड़ताल जैसा कदम उठाने पर मजबूर होंगे।
इतिहास क्या कहता है: जब सीएनजी को माना जाता था ‘सस्ता’ विकल्प
एक दशक पहले के आंकड़ों पर नजर डालें, तो दिल्ली में सीएनजी की कीमतें पेट्रोल और डीजल के मुकाबले लगभग आधी या उससे भी कम हुआ करती थीं। पर्यावरण के अनुकूल और बेहद किफायती होने के कारण दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को अनिवार्य रूप से सीएनजी पर शिफ्ट किया था।
साल 2021 के बाद से वैश्विक ऊर्जा संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के बाद भारत को आयातित एलएनजी (LPG/LNG) पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि पिछले 4-5 सालों में सीएनजी की कीमतों में लगभग 40% से ज्यादा का उछाल देखा जा चुका है। वह दौर अब पीछे छूट गया है जब लोग पैसे बचाने के लिए सीएनजी किट लगवाया करते थे।
एक्सपर्ट व्यू: क्यों थम नहीं रही हैं कीमतें?
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत की लगभग आधी प्राकृतिक गैस विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गैस की कीमतों में जो उतार-चढ़ाव हो रहा है, उसका सीधा असर घरेलू दामों पर पड़ता है। इसके अलावा, गैस कंपनियों पर डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने का भी दबाव है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक कीमतों में इस तरह के झटके आगे भी देखने को मिल सकते हैं।
