Monday, 29 June

भारत की बुलेट ट्रेन परियोजना अब सिर्फ मुंबई-अहमदाबाद तक सीमित नहीं रहने वाली है। केंद्र सरकार ने देशभर में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए करीब 4,000 किलोमीटर लंबे सात नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए साझा इंजीनियरिंग डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (NHSRCL) ने वैश्विक निविदा जारी की है। नई परियोजनाओं में भारतीय इंजीनियरिंग मानकों पर आधारित 350 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड को ध्यान में रखकर पुल, सुरंग, एलिवेटेड ट्रैक और स्टेशनों का मानकीकृत डिजाइन तैयार किया जाएगा।

4,000 किमी के सात नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर तेजी

सरकार का लक्ष्य भविष्य की सभी हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं में एक समान डिजाइन अपनाना है, ताकि निर्माण लागत कम हो, परियोजनाओं की गति बढ़े और विदेशी मानकों पर निर्भरता घटे। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित सात कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 4,000 किलोमीटर होगी। इनमें से चार परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि बाकी मार्गों पर सर्वे और तकनीकी जांच जारी है।

दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर की सबसे बड़ी चुनौती होगी जेवर एयरपोर्ट

प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर इस योजना की सबसे चर्चित परियोजनाओं में शामिल है। इस रूट पर नोएडा के जेवर एयरपोर्ट के नीचे भूमिगत स्टेशन बनाया जाएगा। इसे मुख्य हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए लगभग 9.4 किलोमीटर लंबी सुरंग प्रस्तावित है, जिसे परियोजना की सबसे जटिल इंजीनियरिंग चुनौतियों में गिना जा रहा है।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन से मिल रहा अनुभव

देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर निर्माण कार्य जारी है। 508 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर 12 स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र और गुजरात के प्रमुख शहरों को हाई-स्पीड रेल से जोड़ेगा और भविष्य की नई परियोजनाओं के लिए तकनीकी अनुभव का आधार बनेगा।

किन शहरों को मिल सकता है विकास का फायदा?

हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं का असर केवल यात्रा समय कम करने तक सीमित नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेशनों के आसपास नए औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

  • सूरत और वडोदरा में बेहतर कनेक्टिविटी से रियल एस्टेट और निवेश गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
  • बोइसर, वापी और अहमदाबाद जैसे क्षेत्रों में उद्योग, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउस सेक्टर को नई गति मिलने की संभावना है।
  • अहमदाबाद का साबरमती स्टेशन बुलेट ट्रेन, मेट्रो और पारंपरिक रेलवे को जोड़ने वाला मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब बनने की दिशा में विकसित किया जा रहा है।

भारतीय मानकों पर बनेगा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

अब तक हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं में कई डिजाइन मानक विदेशी मॉडल से लिए जाते रहे हैं। नई योजना के तहत भारत अपनी आवश्यकताओं, भौगोलिक परिस्थितियों और निर्माण क्षमता के अनुरूप खुद के इंजीनियरिंग मानक विकसित करेगा। इससे भविष्य की परियोजनाओं में डिजाइन प्रक्रिया तेज होने के साथ घरेलू उद्योगों की भागीदारी भी बढ़ने की उम्मीद है।

यात्रियों और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार से बड़े शहरों के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। साथ ही स्टेशन आधारित शहरी विकास, रोजगार सृजन, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि प्रत्येक कॉरिडोर की निर्माण समय-सीमा, लागत और क्रियान्वयन उसकी डीपीआर, भूमि अधिग्रहण और सरकारी मंजूरियों के अनुसार तय होगी।

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