घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी सिलेंडर की जगह पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने की सरकार की योजना को बड़ी रफ्तार मिल सकती है। इंड्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के प्रबंध निदेशक कमल किशोर चट्टीवाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि यदि PNG और LPG की कीमतों के बीच अंतर बढ़ाया जाता है तो लोग तेजी से पाइप गैस की ओर शिफ्ट होंगे। सरकार भी आयातित LPG पर निर्भरता कम करने के लिए PNG को बढ़ावा दे रही है।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बाद भारत ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क हुआ है। LPG की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है, जबकि PNG के लिए प्राकृतिक गैस के स्रोत अपेक्षाकृत अधिक विविध हैं। इसी वजह से सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को पाइप गैस नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दे रही है।
आखिर क्यों नहीं बढ़ रही PNG की रफ्तार?
कमल किशोर चट्टीवाल के मुताबिक फिलहाल PNG और LPG की लागत में उपभोक्ताओं को बहुत बड़ा अंतर दिखाई नहीं देता। उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि अभी दोनों ईंधनों के बीच कीमत का अंतर करीब 10 प्रतिशत तक है। यदि यह अंतर 30 प्रतिशत तक पहुंच जाए तो उपभोक्ताओं का रुझान तेजी से PNG की ओर हो सकता है।
दिल्ली में हालिया बढ़ोतरी के बाद 14.2 किलोग्राम का घरेलू LPG सिलेंडर 942 रुपये का है, जबकि PNG की कीमत 49.59 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर है।
1.28 लाख घरों में कनेक्शन की राह अटकी
IGL के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन मकानों की है जो बंद पड़े हैं या किरायेदारों के कब्जे में हैं। कंपनी के अनुसार केवल दिल्ली-एनसीआर में ही ऐसे करीब 1.28 लाख घर हैं जहां तुरंत PNG कनेक्शन दिया जा सकता है, लेकिन मकान मालिकों की सहमति नहीं मिलने से प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही।
कंपनी अब ऐसे इलाकों में जागरूकता शिविर लगा रही है और कनेक्शन लेने की प्रक्रिया को पहले से आसान बनाया गया है।
सरकार ने क्या बदले हैं नियम?
सरकार ने मई के अंत में नए निर्देश जारी किए थे। इनके तहत जिन क्षेत्रों में PNG उपलब्ध है वहां उपभोक्ताओं को पाइप गैस अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सक्रिय PNG कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए LPG रिफिलिंग पर भी रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। PNG लेने वाले उपभोक्ताओं को 30 दिनों के भीतर LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा या ट्रांसफर वाउचर लेना होगा।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत में LPG की बड़ी मात्रा विदेशों से आती है, जबकि घरेलू गैस नेटवर्क के विस्तार से आयात निर्भरता कम हो सकती है।
CNG महंगी हुई, फिर भी पेट्रोल-डीजल से सस्ती
चट्टीवाल ने इंटरव्यू में बताया कि हाल के दिनों में CNG की कीमत में कुल 6 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन कंपनी ने बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ अभी उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है। उनका कहना है कि CNG अभी भी पेट्रोल और डीजल के मुकाबले किफायती विकल्प बनी हुई है।
साथ ही IGL इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत पर भी नजर बनाए हुए है ताकि CNG और EV के बीच लागत का अंतर बहुत कम न हो जाए।
क्या है बड़ा संकेत?
पिछले कुछ महीनों में PNG कनेक्शन की रफ्तार तेजी से बढ़ी है। IGL पहले जहां रोजाना 600-700 नए कनेक्शन दे रही थी, वहीं अब यह संख्या 2,000 से अधिक प्रतिदिन पहुंच चुकी है। कंपनी का लक्ष्य इसे और बढ़ाना है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि यदि PNG को LPG के मुकाबले स्पष्ट रूप से सस्ता बनाया गया और शहरों में पाइपलाइन नेटवर्क तेजी से बढ़ा, तो आने वाले वर्षों में भारत की रसोई गैस व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
IGL की योजना
IGL ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश की योजना बनाई है। इसमें गैस वितरण नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), सौर ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं पर भी निवेश शामिल है। कंपनी सऊदी अरब में गैस वितरण परियोजना के लिए बोली लगाने की तैयारी भी कर रही है।
FAQ
सवाल: PNG क्या है?
जवाब: PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस, जो सीधे पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचती है और सिलेंडर बदलने की जरूरत नहीं होती।
सवाल: क्या सरकार LPG की जगह PNG को बढ़ावा दे रही है?
जवाब: हां, ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता कम करने के लिए सरकार PNG नेटवर्क के विस्तार पर जोर दे रही है।
सवाल: IGL ने कीमतों को लेकर क्या सुझाव दिया है?
जवाब: IGL के एमडी कमल किशोर चट्टीवाल का कहना है कि PNG और LPG के बीच कीमत का अंतर बढ़ने पर लोग तेजी से PNG अपनाएंगे।

