केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों में संभावित बदलाव को लेकर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) की गतिविधियां तेज हो गई हैं। आयोग देशभर के विभिन्न राज्यों में हितधारकों से सुझाव जुटा रहा है और इसी क्रम में 6 और 7 जुलाई 2026 को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर का दौरा करेगा। इस दौरान केंद्रीय सरकारी संस्थानों, कर्मचारी संगठनों और यूनियनों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद किया जाएगा। यह जानकारी आयोग की आधिकारिक अधिसूचना में दी गई है।
भुवनेश्वर दौरे में हितधारकों से होगी बातचीत
वित्त मंत्रालय के तहत गठित 8वें वेतन आयोग ने इच्छुक केंद्रीय सरकारी संस्थानों, संगठनों और कर्मचारी यूनियनों को ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेकर आयोग के समक्ष अपने सुझाव और मांगें रखने के लिए आमंत्रित किया है। आयोग देशभर से मिले सुझावों के आधार पर अपनी सिफारिशें तैयार कर रहा है, जिनका असर लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ेगा।
₹69,000 न्यूनतम बेसिक वेतन की मांग
इस बीच, कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए न्यूनतम मूल वेतन ₹69,000 किए जाने की मांग रखी है। संगठन का कहना है कि इसके लिए 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए।
हालांकि, यह कर्मचारी संगठन का प्रस्ताव है। इसे अभी सरकार या वेतन आयोग की मंजूरी नहीं मिली है और अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों तथा केंद्र सरकार के निर्णय के बाद ही होगा।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक (Multiplier) होता है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के मौजूदा मूल वेतन को नए वेतनमान में बदला जाता है। कर्मचारी संगठन का तर्क है कि यदि 3.83 का फिटमेंट फैक्टर स्वीकार किया जाता है तो वर्तमान ₹18,000 का न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर लगभग ₹69,000 हो सकता है। फिलहाल यह केवल प्रस्तावित मांग है, आधिकारिक निर्णय नहीं।
आयोग के सामने रखी गईं 5 प्रमुख मांगें
कर्मचारी संगठन ने वेतन आयोग के समक्ष कई अहम सुझाव भी दिए हैं
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और मौजूदा व्यवस्था में बदलाव।
- हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की दरों को शहरों की श्रेणी के अनुसार 40%, 35% और 30% तक बढ़ाने की मांग।
- वेतन विसंगतियों का समाधान, पे-लेवल का पुनर्गठन और पूरे सेवा काल में पांच वित्तीय अपग्रेडेशन।
- CGHS और ECHS के तहत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार।
- संविदा और आकस्मिक कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा संबंधी नीतियां लागू करने की मांग।
1 करोड़ से अधिक लोगों पर पड़ेगा असर
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का प्रभाव देश के लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ने की संभावना है। आयोग फिलहाल विभिन्न राज्यों में जाकर कर्मचारी संगठनों, संस्थानों और अन्य हितधारकों से सुझाव जुटा रहा है। अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद केंद्र सरकार इन सिफारिशों पर निर्णय लेगी।