रात्रि में जब हम आकाश की ओर देखते हैं, तो लाखों-करोडों मील की दूरी पर स्थित सूर्य, चांद और तारे हमें स्पष्ट दिखाई देते हैं, लेकिन धरती की सतह पर हम कुछ किलोमीटर से अधिक दूर की वस्तुओं को नहीं देख पाते. क्या तुम जानते हो कि इसका क्या कारण है? यह हम सभी को भली-भांति पता है कि हमारी धरती की बनावट नारंगी जैसी है, अर्थात् गोलाकार है. यद्यपि धरती दोनों ध्रुवों पर काफी समतल है, लेकिन बाकी के स्थानों पर इसकी बनावट वक्राकार है. पृथ्वी की गोलाकार बनावट के कारण ही हम इसकी सतह पर अधिक दूर तक…
Author: Shailja Dubey
जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर (Jalaluddin Muhammad Akbar) ने, जो मुगलों के सबसे बड़े बादशाह थे, सन् 1582 में एक नया धर्म चलाया, जो दीने-इलाही के नाम से जाना जाता है. इस धर्म में हिंदू और धर्म की सभी उत्तम बातें सम्मिलित की गई थीं. वास्तव में दीन-ए-इलाही हिंदू और इस्लाम धर्म की अच्छाइयों का मिला-जुला रूप था. इस धर्म को स्थापित करने में अकबर का उद्देश्य एक ऐसे धर्म को लाना था, जिसे हिंदू और मुसलमान दोनों ही आदर भाव से मानें और एक ही पूजा-स्थल में श्रद्धाभाव से एक ही ईश्वर की पूजा अर्चना कर सकें. लेकिन इस धर्म ने लोगों…
पक्षी वैज्ञानिकों का मत है कि पक्षियों की सुनने की क्षमता लगभग मनुष्यों समान होती है. लेकिन इनकी सुनने की शक्ति कुछ कमजोर होती है. क्या आप जानते हो कि पक्षी किस तरह सुनते हैं? सुनने के लिए पक्षियों के पास भी कान होते हैं. ये कान कई बातों में रेंगने वाले जंतुओं के समान होते हैं. कान के बाहरी हिस्से में एक पतली नाली होती है, जो कनपटी के पंखों में छुपी रहती है. अधिकांश पक्षियों की इस नाली के चारों तरफ की खाल में एक मांसपेशी ऐसी होती है, जो इस नाली के मुंह को पूरी तरह या…
समुद्र की गहराइयों को छोड़कर कीड़े लगभग दुनिया में हर जगह पाए जाते हैं. जीवाश्मों के अध्ययनों से पता चलता है कि कीड़ों का जन्म धरती पर आज से लगभग 40 करोड़ वर्ष पहले हुआ था. तब से ये बराबर मौसम और वातावरण के परिवर्तनों के अनुरूप बेहद शीघ्रता और सफाई से अपने आपको ढालते रहे हैं. सरसरी निगाह से देखने पर यह विश्वास नहीं होता कि इनके छोटे से शरीर में रक्त संचार प्रणाली और खून भी सकता है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि कोड़ों के शरीर में खून और दिल ही नहीं होता, बल्कि अन्य सभी आवश्यक…
गर्मी के दिनों में कागज के टुकड़े या दूसरी वस्तुएं धूप में रख दी जाएं तो वे थोड़ी ही देर में गर्म हो जाती हैं. यदि कोई धातु का टुकड़ा कुछ देर के लिए धूप में छोड़ दिया जाए तो वह इतना गर्म हो जाता है कि उसे छूना भी मुश्किल हो जाता है. लेकिन आश्चर्य की बात है पेड़ों की पत्तियां सारे दिन धूप में रहने पर भी गर्म नहीं होतीं. वे सदा ही हरी तरोताजा, और ठंडी रहती हैं. ऐसा लगता है जैसे धूप उन पर पड़ी ही न हो. क्या आप जानते हो कि धूप में पेड़ों…
बोलना या लना या आवाज का निकलना एक बहुत ही जटिल क्रिया है. हमारे गले में एक अंग है, जिसे लैरिक्स (Larynx) या ध्वनि बॉक्स (Voice Box) कहते हैं. इसमें दोनों ओर दो वोकल कॉर्ड (Vocal Cord) होते हैं. इन वोकल काडों के कंपन करने से ही ध्वनि पैदा होती है. बोलने की क्रिया में सैकड़ों मांसपेशियों का योगदान होता है. आवाज के ठीक प्रकार से पैदा होने के लिए लैरिक्स, गाल, जीभ, तथा होंठों का आश्चर्यजनक समन्वय होना अति आवश्यक है. सामान्य जीवन में बोलचाल के दौरान इन अंगों में होने वाले जटिल समन्वयन (Coordination) की ओर हमारा ध्यान…
संसार में अनेक वस्तुएं हैं, जिन्हें हम किसी न किसी नाम से पुकारते हैं. इन सभी वस्तुओं के नामों का आरंभ अलग-अलग कारणों से हुआ है. ठीक इसी प्रकार विभिन्न देशों के नामों का आरंभ भी किसी एक प्रकार से नहीं हुआ है, बल्कि इन नामों की उत्पत्ति के अनेक स्रोत रहे हैं. क्या आप जानते हो कि ये नाम किस प्रकार पड़े ?वर्ष 2024 तक दुनिया में 195 देश हैं। इनमे से 193 देश संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश हैं और 2 देश गैर-सदस्य पर्यवेक्षक देश हैं: होली सी और फिलिस्तीन राज्य। अधिकतर देशों के नाम उन व्यक्तियों के…
सैक्सटेंट एक ऐसा यंत्र है, जो धरती के किसी स्थान और सूरज या तारों जैसे खगोलीय पिंडों के बीच बनने वाले कोणों को मापने के काम आता है. यह बहुत ही उपयोगी यंत्र है और समुद्री जहाजों के नाविकों द्वारा अक्षांश ज्ञात करने के लिए प्रयोग किया जाता है. इसकी सहायता से ऊंची इमारतों और खंभों की ऊंचाई भी मापी जाती है. सैक्सटेंट शब्द की उत्पति लैटिन भाषा के ‘सैक्सटस’ (Sextus) शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है: ‘छठवां हिस्सा’. वास्तव में इस यंत्र में धातु से बना एक वृत्तखंड होता है, जो एक वृत्त के छठे भाग यानी 60°…
सेल्यूट करने की प्रथा हमारे इतिहास और संस्कृति में सदा से ही रही है, लेकिन समय-समय पर सेल्यूट करने के तरीकों में परिवर्तन होते रहे हैं. पहले कुछ तरीकों में झुककर या जमीन पर घुटनों के बल माथा टेककर सेल्यूट किया जाता था. इन तरीकों में हाथ को एक विशेष भंगिमा में उठाना होता था. सैनिकों द्वारा सेल्यूट करने में सीधे हाथ को माथे तक या सिर पर रखो टोपी के किनारे तक लाना होता था. सेल्यूट करने का यह तरीका बहुत पुराना नहीं है. अठारवीं शताब्दी के अंत तक कनिष्ठ अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों को टोप उतारकर सेल्यूट करते थे.…
सांची स्तूप के ऊपर पत्थरों पर भगवान बुद्ध के जीवन की घटनाएं चित्रों के रूप में खुदी हुई हैं सांची के स्तूप बौद्धकालीन शिल्प कला के बेहतरीन नमूने हैं. सांची मध्य प्रदेश में बेतवा नदी के पश्चिम में भोपाल से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर रायसेन जिले का एक विश्व धरोहर स्थल नगर है. यह 90 मीटर ऊंची एक बलुआ चट्टान पर स्थित है. बौद्ध धर्म के ये धर्म-प्रतीक चिह्न एक लंबे समय से इस नगर की गरिमा और महत्व बढ़ा रहे हैं. यह नगर मीलों से दूर दिखाई देता है. सांची के तीन प्रमुख स्तूप हैं. इन्हें स्तूप-1,…
