सागर जिले के वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व में बाघ के हमले की घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि ग्रामीणों में से किसी ने पहले बाघ पर गोली चलाई, जिसके बाद बाघ आक्रामक हो गया और उसने एक युवक पर हमला कर दिया। हालांकि, वन विभाग की शुरुआती जांच में अब तक गोली चलने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट ने अधिकारियों से की शिकायत
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने मुख्य सचिव और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को वीडियो भेजकर शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि 22 जून 2026 को टाइगर रिजर्व के कोर जोन स्थित पटना मुहली गांव में वन विभाग की पेट्रोलिंग टीम मौजूद नहीं थी, जिससे ग्रामीणों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा प्रभावित हुई।
उन्होंने मामले की बैलिस्टिक जांच कराने, घटना से जुड़ी कथित भ्रामक जानकारी देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और पटना मुहली गांव के लंबित विस्थापन की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विस्थापन के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत होने के बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
वन विभाग ने मेटल डिटेक्टर से की जांच
शिकायत मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने उस स्थान का निरीक्षण किया, जहां गोली चलने का दावा किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, 30 से 50 मीटर के दायरे में मेटल डिटेक्टर से सघन तलाशी ली गई, लेकिन न तो कारतूस का खोखा मिला और न ही गोली चलने से जुड़ा कोई अन्य साक्ष्य मिला।
जांच टीम ने ग्रामीणों से भी पूछताछ की। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों और बाघ के बीच लगभग 30 मीटर की दूरी रही होगी। प्रारंभिक अनुमान है कि संभवतः किसी ने पत्थर फेंका हो, जिसकी जांच अभी जारी है।
जांच प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
अजय दुबे ने वन विभाग की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बाघ के हमले की सूचना मिलने के तुरंत बाद घटनास्थल का निरीक्षण होना चाहिए था, लेकिन अधिकारी काफी देर से पहुंचे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्रामीणों के व्यक्तिगत लिखित बयान लेने के बजाय सभी को एक साथ खड़ा कर वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए बयान लिए गए। दुबे का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के अलग-अलग बयान दर्ज किए जाने चाहिए थे।
इसके अलावा उन्होंने वायरल वीडियो में बाघ के आगे दिखाई देने वाली धूल या धुएं जैसी स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि बाघ को पत्थर मारकर भगाया गया, तो वह भी वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत जांच का विषय है।
ग्रामीण बोले- गांव में किसी के पास नहीं है बंदूक
वन विभाग के अनुसार, पटना मुहली गांव के ग्रामीणों ने जांच टीम को बताया कि गांव में किसी के पास बंदूक नहीं है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अभयारण्य या टाइगर रिजर्व की 25 किलोमीटर की सीमा के भीतर सामान्य परिस्थितियों में बंदूक का लाइसेंस जारी नहीं किया जाता।
अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आवाज नहीं थी, जबकि जांच टीम को वीडियो का मूल संस्करण मिल गया है। विभाग के मुताबिक, उस वीडियो में गोली चलने जैसी कोई आवाज सुनाई नहीं देती।
एसटीएसएफ भी कर रही है जांच
रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह ने कहा कि अब तक की जांच में गोली चलने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी ने बाघ पर पत्थर फेंका या वन्यजीव को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) भी कर रही है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
