मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और आसपास की सरकारी जमीनों को भू-माफियाओं और अतिक्रमण से बचाने के लिए जिला प्रशासन तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। प्रशासन जल्द ही ऐसी व्यवस्था लागू करेगा, जिसके तहत सैटेलाइट की मदद से सरकारी भूमि की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। इस सिस्टम के जरिए किसी भी सरकारी जमीन पर नया अवैध निर्माण या कब्जा शुरू होते ही अधिकारियों को तुरंत डिजिटल अलर्ट मिल जाएगा।
कलेक्ट्रेट में बनेगा विशेष राजस्व सेल
जिला कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए हैं कि सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसके लिए कलेक्ट्रेट में एक विशेष राजस्व सेल बनाया जाएगा, जो सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों का विश्लेषण कर संभावित अतिक्रमण की पहचान करेगा।
अलर्ट मिलने के बाद संबंधित हल्के के पटवारी से मौके का सत्यापन कराया जाएगा। यदि कब्जे की पुष्टि होती है तो एसडीएम और तहसीलदार की टीम तत्काल कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण हटाएगी।
प्रशासन का कहना है कि अभियान केवल नए अवैध कब्जों तक सीमित नहीं रहेगा। पहले से सरकारी जमीनों पर किए गए कब्जों को भी चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। वहीं, सरकारी भूमि पर बनी झुग्गी-बस्तियों के पुनर्वास के लिए नियमानुसार वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की योजना भी बनाई जा रही है।
32 हजार एकड़ सरकारी भूमि का तैयार हुआ डिजिटल लैंड बैंक
सरकारी जमीनों के बेहतर प्रबंधन और संरक्षण के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने करीब 32 हजार एकड़ सरकारी भूमि का डिजिटल लैंड बैंक तैयार किया है। इसमें लगभग 22,250 एकड़ भूमि एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली है, जबकि 9,490 एकड़ भूमि एक एकड़ से कम क्षेत्रफल की श्रेणी में शामिल है।
इस डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होने की उम्मीद है।
डीजीपीएस तकनीक से होगा सीमांकन
जिन सरकारी जमीनों को लेकर विवाद है या जिन पर निजी स्वामित्व का दावा किया जा रहा है, उनका सीमांकन आधुनिक डीजीपीएस (Differential GPS) तकनीक से कराया जाएगा। सीमांकन पूरा होने के बाद ऐसी जमीनों की सुरक्षा के लिए चारों ओर तार फेंसिंग की जाएगी, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण की संभावना कम हो सके।
तकनीक से बढ़ेगी निगरानी, घटेगी अतिक्रमण की संभावना
नई सैटेलाइट मॉनिटरिंग प्रणाली लागू होने के बाद सरकारी जमीनों की निगरानी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगी। अधिकारियों को समय रहते अतिक्रमण की सूचना मिलेगी, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव होगी। साथ ही, पटवारियों के बार-बार मौके पर निरीक्षण की आवश्यकता भी कम होगी और विकास परियोजनाओं के लिए सरकारी भूमि के आवंटन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।

