मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने ई-अटेंडेंस प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। विभाग ने ‘हमारे शिक्षक’ ऐप का नया अपडेट लागू किया है, जिसके तहत अब शिक्षक केवल स्कूल पहुंचकर उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहेंगे। ड्यूटी पूरी होने के बाद उन्हें स्कूल परिसर के भीतर से ही लॉगआउट करना होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य समय से पहले विद्यालय छोड़ने की शिकायतों पर अंकुश लगाना और पूरे कार्यकाल के दौरान वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करना है।
शिकायतों के बाद लिया गया फैसला
विभागीय अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ समय से ऐसी शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं कि कुछ शिक्षक सुबह स्कूल पहुंचकर फेस रिकग्निशन के जरिए ई-अटेंडेंस दर्ज कर लेते थे, लेकिन निर्धारित समय से पहले विद्यालय छोड़ देते थे। बाद में वे किसी अन्य स्थान, विशेषकर घर से, ऐप पर लॉगआउट कर देते थे। समीक्षा के दौरान यह भी पाया गया कि लॉगआउट के समय बड़ी संख्या में शिक्षकों की लोकेशन स्कूल परिसर से बाहर दर्ज हो रही थी। इसी के बाद ऐप में लोकेशन आधारित नियंत्रण लागू करने का निर्णय लिया गया।
200 मीटर की सीमा के भीतर ही मिलेगा लॉगआउट का विकल्प
नए नियम के तहत शिक्षकों को लॉगआउट की सुविधा केवल स्कूल परिसर के करीब 200 मीटर के दायरे में ही उपलब्ध होगी। यदि शिक्षक इस निर्धारित सीमा से बाहर होंगे तो ऐप लॉगआउट स्वीकार नहीं करेगा। विभाग का मानना है कि इससे विद्यालय समय के दौरान अनधिकृत अनुपस्थिति की संभावना कम होगी और स्कूलों में अनुशासन मजबूत होगा।
फेस रिकग्निशन और जीपीएस से होगी निगरानी
‘हमारे शिक्षक’ ऐप पहले से ही फेस रिकग्निशन और जीपीएस आधारित तकनीक पर काम करता है। शिक्षक जब स्कूल पहुंचते हैं तो चेहरे की पहचान और लोकेशन के आधार पर उपस्थिति दर्ज होती है। अब इसी प्रक्रिया को लॉगआउट के समय भी प्रभावी बनाया गया है, जिससे पूरे कार्यकाल की उपस्थिति डिजिटल रूप से सत्यापित की जा सके।
छह घंटे की ड्यूटी पूरी किए बिना नहीं होगा लॉगआउट
स्कूल शिक्षा विभाग ने कार्य अवधि को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए हैं। शिक्षक जिस समय लॉगइन करेंगे, उसके कम से कम छह घंटे बाद ही लॉगआउट कर सकेंगे।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई शिक्षक सुबह 10:30 बजे उपस्थिति दर्ज करता है तो वह शाम 4:30 बजे के बाद ही लॉगआउट कर सकेगा। इसी तरह यदि लॉगइन 11 बजे किया गया है तो लॉगआउट का विकल्प शाम 5 बजे के बाद ही उपलब्ध होगा। यह व्यवस्था एकल पाली और दो पाली वाले दोनों प्रकार के सरकारी स्कूलों में लागू रहेगी।
ग्रामीण स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों पर होगा अधिक असर
नई व्यवस्था का सबसे अधिक प्रभाव उन शिक्षकों पर पड़ सकता है जो ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में कार्यरत हैं, लेकिन उनका निवास शहरों में है। पहले कुछ मामलों में शिक्षक उपस्थिति दर्ज करने के बाद वापस शहर लौट जाते थे और वहीं से लॉगआउट कर देते थे। अब स्कूल परिसर से बाहर रहने पर लॉगआउट संभव नहीं होगा, इसलिए उन्हें निर्धारित समय तक विद्यालय में मौजूद रहना होगा।
प्रदेश में ई-अटेंडेंस का बढ़ता दायरा
स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश में 90 प्रतिशत से अधिक नियमित शिक्षक, 93 प्रतिशत से अधिक अतिथि शिक्षक और सभी प्राचार्य ई-अटेंडेंस प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। विभाग का कहना है कि डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए समय-समय पर तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं।
इन जिलों का प्रदर्शन सबसे बेहतर
ई-अटेंडेंस अनुपालन के मामले में अनूपपुर, बैतूल, मंडला, सतना, बालाघाट, बड़वानी, मंदसौर, नीमच और राजगढ़ जैसे जिले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जहां ऑनलाइन उपस्थिति का प्रतिशत 95 से अधिक बताया गया है। दूसरी ओर भोपाल, इंदौर, खंडवा, खरगोन, रतलाम और रायसेन जैसे जिलों में ई-अटेंडेंस अनुपालन अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य क्या है?
विभाग का कहना है कि संशोधित ई-अटेंडेंस प्रणाली का मकसद शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करना, स्कूल समय के दौरान अनुशासन बनाए रखना और सरकारी विद्यालयों में डिजिटल निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। अधिकारियों के अनुसार तकनीक आधारित इस व्यवस्था से उपस्थिति रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
