शहडोल जिले में विकासखंड गोपारू बरमनिया स्थित वीरांगना रानी दुर्गावती शासकीय आदिवासी कन्या छात्रावास की नई इमारत तैयार होने के अंतिम चरण में पहुंचकर भी छात्राओं के उपयोग में नहीं आ सकी है। विभागीय स्तर पर बजट उपलब्ध नहीं होने और निर्माण एजेंसी को भुगतान में देरी के कारण परियोजना फिलहाल अटक गई है। इसका सीधा असर उन छात्राओं पर पड़ रहा है, जिन्हें अभी भी पुराने और जर्जर छात्रावास में रहना पड़ रहा है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार छात्रावास भवन के निर्माण के लिए करीब 2.75 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल शेष राशि का आवंटन प्राप्त नहीं हुआ है। इसी वजह से निर्माण एजेंसी का भुगतान लंबित है। विभाग के इंजीनियर का कहना है कि शासन स्तर से राशि मिलते ही नियमानुसार भुगतान जारी कर दिया जाएगा।
दूसरी ओर निर्माण एजेंसी का दावा है कि परियोजना का अधिकांश काम पूरा किया जा चुका है। ठेकेदार के मुताबिक, अब तक उसे केवल करीब 60 लाख रुपये का भुगतान मिला है, जबकि शेष राशि लंबित है। इसके बावजूद छात्राओं की सुविधा और बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए निजी संसाधनों से निर्माण जारी रखा गया और लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया।
निर्माण एजेंसी का कहना है कि यदि विभाग की ओर से बकाया राशि का कुछ हिस्सा भी जारी कर दिया जाता है तो शेष फिनिशिंग कार्य पूरा करने में अधिक समय नहीं लगेगा। ठेकेदार का दावा है कि करीब 10 दिनों के भीतर भवन पूरी तरह तैयार कर विभाग को सौंपा जा सकता है।
इस बीच सबसे अधिक परेशानी छात्राओं को उठानी पड़ रही है। नया भवन लगभग तैयार होने के बावजूद उन्हें पुराने छात्रावास में रहना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार बरसात के दौरान पुराने भवन की छत से पानी टपकने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे छात्राओं की पढ़ाई और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
अब स्थानीय स्तर पर यह अपेक्षा की जा रही है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग समन्वय स्थापित कर बजट संबंधी अड़चन को जल्द दूर करें, ताकि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद छात्राओं को सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं वाले नए छात्रावास में शीघ्र स्थानांतरित किया जा सके।
