मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक आदिवासी महिला ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपी है। महिला का आरोप है कि उसके घर से चोरी हुई किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की रकम के मामले में न तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और न ही लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई की। इसके अलावा उसने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर की गई शिकायत को भी पुलिसकर्मी ने जबरन बंद करा दिया।
डेढ़ वर्ष बाद भी दर्ज नहीं हुई एफआईआर का आरोप
छीपाबड़ थाना क्षेत्र के ग्राम भागपुरा निवासी आदिवासी महिला क्षिपा बाई ने गुरुवार को पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में बताया कि 22 जनवरी 2025 को उसके घर से बैंक से निकाली गई केसीसी की 1.70 लाख रुपये की राशि चोरी हो गई थी। उनका कहना है कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन अब तक प्रकरण में एफआईआर दर्ज नहीं की गई और न ही जांच को आगे बढ़ाया गया। महिला का दावा है कि घटना को डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी उसे न्याय नहीं मिल सका है।
दो ग्रामीणों पर जताया था संदेह
आवेदन के अनुसार, घटना के समय महिला ने गांव के ही रामजीवन और चिंतामणी पर चोरी की आशंका जताई थी। उसने पुलिस को दोनों के नाम भी बताए थे, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने इस दिशा में भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
महिला का कहना है कि रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए वह स्वयं छीपाबड़ थाने पहुंची थी, लेकिन शिकायत दर्ज करने के बजाय उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उसे थाने से वापस भेज दिया गया।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत बंद कराने का भी आरोप
स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने के बाद महिला ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उसने आरोप लगाया कि छीपाबड़ थाने में पदस्थ एएसआई राजेंद्र मीणा ने उसका मोबाइल अपने कब्जे में लेकर हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत को जबरन बंद करा दिया। हालाकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
पुलिस अधीक्षक से की निष्पक्ष जांच की मांग
महिला ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, चोरी के प्रकरण में विधिसम्मत कार्रवाई करने तथा संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस की ओर से इस शिकायत पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मध्य प्रदेश पुलिस के अनुसार, किसी भी नागरिक को शिकायत दर्ज कराने और उसकी सुनवाई का अधिकार प्राप्त है तथा शिकायतों के लिए नागरिक पोर्टल और अन्य वैधानिक माध्यम भी उपलब्ध हैं।