मध्य प्रदेश के भिंड जिले के अटेर और उत्तर प्रदेश के जैतपुर को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित चंबल नदी पुल परियोजना एक बार फिर प्रशासनिक और पर्यावरणीय मंजूरियों की उलझनों में फंस गई है। उत्तर प्रदेश वन्यजीव विभाग से आवश्यक अनुमति नहीं मिलने के कारण पुल के लगभग 350 मीटर हिस्से का निर्माण पिछले नौ महीने से पूरी तरह रुका हुआ है। इससे दोनों राज्यों के बीच सीधा सड़क संपर्क शुरू होने में और देरी की आशंका बढ़ गई है।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अनुमति नहीं मिलने के कारण निर्माण एजेंसी निर्धारित समय के अनुसार कार्य आगे नहीं बढ़ा पा रही है। यदि स्वीकृति में और विलंब होता है तो परियोजना की संभावित पूर्णता अवधि भी आगे खिसक सकती है।
मध्य प्रदेश ने यूपी शासन से मांगी शीघ्र अनुमति
लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख सचिव ने उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखकर वन्यजीव विभाग से आवश्यक अनुमति जल्द जारी कराने का अनुरोध किया है। विभाग का तर्क है कि परियोजना को पहले ही आवश्यक स्तरों पर स्वीकृतियां मिल चुकी हैं, इसलिए लंबित अनुमति पर शीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए।
हालांकि, उत्तर प्रदेश वन्यजीव विभाग की ओर से अब तक अंतिम अनुमति जारी नहीं की गई है। अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) से संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही रुका हुआ निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा।
यूपी सीमा में बनने हैं 14 पिलर
850 मीटर लंबे इस पुल का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। मध्य प्रदेश की सीमा में अतिरिक्त लगभग 50 मीटर का कार्य जारी है, जबकि उत्तर प्रदेश की सीमा में करीब 300 मीटर हिस्से में 14 पिलरों का निर्माण शेष है। यही भाग वन्यजीव अनुमति के अभाव में रुका हुआ है।
चूंकि परियोजना का हिस्सा चंबल के संवेदनशील पारिस्थितिकी क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए पर्यावरण एवं वन्यजीव संबंधी स्वीकृतियां निर्माण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हाल के वर्षों में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में पर्यावरण संरक्षण और अवैध खनन को लेकर न्यायिक निगरानी भी बढ़ी है।
समाधान के लिए लगातार लखनऊ के चक्कर
सेतु निगम के अधिकारियों के मुताबिक, अनुमति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कई बार लखनऊ में संबंधित अधिकारियों से बैठक की जा चुकी है। मामला मुख्य सचिव स्तर तक भी पहुंचाया गया है, लेकिन अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हो सका है।
भिंड सेतु निगम के एसडीओ सौरभ गौड़ के अनुसार, इस महीने भी मुख्य सचिव के पत्र के साथ संबंधित विभाग से अनुमति लेने का प्रयास किया जाएगा। यदि जल्द स्वीकृति नहीं मिली तो परियोजना का निर्माण कार्यक्रम और प्रभावित हो सकता है।
2016 में शुरू हुआ था निर्माण, अब तक पूरा नहीं
इस पुल का निर्माण वर्ष 2016 में शुरू हुआ था। शुरुआती योजना के अनुसार इसे 24 महीनों में पूरा किया जाना था, लेकिन तकनीकी बदलाव, चंबल नदी में आई बाढ़ और विभिन्न प्रशासनिक व पर्यावरणीय स्वीकृतियों के कारण परियोजना लगातार विलंब का सामना कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने पर अटेर और जैतपुर के बीच आवागमन काफी कठिन हो जाता है। ऐसे समय लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं।
बाढ़ के बाद बदला गया पुल का डिजाइन
वर्ष 2021 में चंबल नदी का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद पुल की डिजाइन में बदलाव किया गया। निर्माण एजेंसी ने पिलरों की ऊंचाई 24 मीटर से बढ़ाकर 25.5 मीटर कर दी, जबकि पुल के ऊपरी ढांचे को भी अधिक ऊंचाई पर डिजाइन किया गया, ताकि भविष्य में बाढ़ के दौरान संरचना सुरक्षित रह सके।
डिजाइन परिवर्तन के कारण परियोजना की लागत भी काफी बढ़ गई। प्रारंभिक स्वीकृत लागत 66.49 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग 125 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
क्षेत्रीय विकास के लिए अहम परियोजना
चंबल पुल के पूरा होने के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क मजबूत होगा। इससे दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार, कृषि उत्पादों का परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यटन को भी गति मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों का वर्षों पुराना इंतजार इसी परियोजना से जुड़ा हुआ है।
Chambal Bridge Project के बारे में
- पुल की कुल लंबाई: 850 मीटर
- प्रारंभिक लागत: 66.49 करोड़ रुपये
- वर्तमान अनुमानित लागत: करीब 125 करोड़ रुपये
- पुल की चौड़ाई: 8.5 मीटर
- निर्माण प्रारंभ: वर्ष 2016
- निर्धारित अवधि: 24 महीने
- रुका हुआ निर्माण: 350 मीटर हिस्सा
- यूपी सीमा में प्रस्तावित पिलर: 14
- निर्माण पिछले 9 महीने से अनुमति के अभाव में प्रभावित