मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी स्थित मिडघाट (बुमिडघाट) क्षेत्र से एक दुर्लभ वन्यजीव दृश्य सामने आया है। सतपुड़ा की पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच रेलवे ट्रैक के पास बनी एक पुलिया के नीचे एक बाघ लंबे समय तक आराम करता दिखाई दिया। ड्यूटी पर मौजूद रेलवे कर्मचारियों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है, जिसके बाद वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।
हॉर्न बजता रहा, लेकिन शांत बैठा रहा बाघ
वायरल वीडियो में बाघ बेहद शांत नजर आता है। रेलवे ट्रॉली के हॉर्न और आसपास हो रही गतिविधियों के बावजूद उसने कोई घबराहट नहीं दिखाई। वह पुलिया के नीचे छांव में काफी देर तक बैठा रहा। हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञ आमतौर पर चेतावनी देते हैं कि जंगली जानवरों के व्यवहार का अनुमान लगाना मुश्किल होता है, इसलिए ऐसे दृश्य देखने पर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
क्यों अक्सर दिखते हैं इस इलाके में बाघ?
बुधनी का मिडघाट क्षेत्र रातापानी अभयारण्य और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वन्यजीव कॉरिडोर से जुड़ा माना जाता है। इसी वजह से यहां बाघ समेत कई वन्यजीवों की आवाजाही समय-समय पर देखी जाती है। बारिश के मौसम में पानी और ठंडी जगह की तलाश में वन्यजीव जंगल से सटे इलाकों या परिवहन मार्गों के पास भी पहुंच सकते हैं।
वन विभाग ने लोगों से क्या अपील की?
वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग ने इलाके में गश्त तेज कर दी है। अधिकारियों ने स्थानीय ग्रामीणों, पर्यटकों और ट्रेकिंग के शौकीनों से सावधानी बरतने की अपील की है।
वन विभाग की ओर से जारी प्रमुख सलाह:
- बिना जरूरी कारण जंगल और पहाड़ी रास्तों पर न जाएं।
- रेलवे ट्रैक या वन क्षेत्र के आसपास सेल्फी और वीडियो बनाने से बचें।
- बाघ या किसी अन्य वन्यजीव के पास जाने की कोशिश बिल्कुल न करें।
- मवेशियों को जंगल की ओर अकेला चरने के लिए न भेजें।
- यदि दोबारा बाघ या कोई अन्य हिंसक वन्यजीव दिखाई दे तो तुरंत स्थानीय वन चौकी या वन्यजीव हेल्पलाइन को सूचना दें।
लगातार हो रही है मॉनिटरिंग
वन विभाग का कहना है कि मिडघाट और आसपास का क्षेत्र बाघों का प्राकृतिक आवास है। फिलहाल गश्ती दल लगातार इलाके की निगरानी कर रहा है ताकि वन्यजीव सुरक्षित रूप से जंगल के भीतर ही रहें और किसी भी तरह का मानव-वन्यजीव संघर्ष न हो।