Sunday, 7 June

Highlights

  • 150 करोड़ रुपये की लागत वाली 40 किमी सड़क परियोजना फिलहाल अटकी।
  • सरकार ने पूछा, जब दो प्रमुख हाईवे मौजूद हैं तो तीसरे मार्ग की जरूरत क्यों।
  • प्रस्तावित सड़क बनने पर दर्जनों गांवों को इंदौर और उज्जैन से सीधा संपर्क मिलेगा।

इंदौर और उज्जैन के बीच प्रस्तावित 40 किलोमीटर लंबी भांग्या-शकरखेड़ी रोड परियोजना फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाएगी। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को राज्य सरकार ने पुनर्परीक्षण के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) को वापस भेज दिया है। सरकार ने विभाग से स्पष्ट करने को कहा है कि जब इंदौर-देवास-उज्जैन मार्ग पहले से उपलब्ध है और इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन हाईवे का उन्नयन भी जारी है, तब एक तीसरे सड़क कॉरिडोर की आवश्यकता क्यों है।

अब विभाग नए तर्कों और क्षेत्रीय जरूरतों के साथ संशोधित प्रस्ताव दोबारा भेजने की तैयारी कर रहा है।

क्या है प्रस्तावित सड़क परियोजना

लोक निर्माण विभाग ने पिछले वर्ष एमआर-10 स्थित चंद्रगुप्त मौर्य चौराहे से देवास-उज्जैन हाईवे तक दो लेन सड़क बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। विभाग का दावा है कि यह सड़क मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्गों का विकल्प नहीं बल्कि एक अलग स्थानीय कॉरिडोर के रूप में काम करेगी।

इस मार्ग के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इंदौर और उज्जैन तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। साथ ही स्थानीय यातायात को भी सीधा और अपेक्षाकृत कम दूरी वाला मार्ग मिल सकेगा।

सरकार को किस बात पर है आपत्ति

परियोजना की समीक्षा के दौरान यह सवाल सामने आया कि इंदौर और उज्जैन के बीच पहले से मजबूत सड़क नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में तीसरे मार्ग पर सार्वजनिक धन खर्च करने का औचित्य क्या है।

सूत्रों के अनुसार, विभाग अब नए प्रस्ताव में इस बात को प्रमुखता से रखेगा कि यह सड़क हाईवे यातायात के बजाय ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए महत्वपूर्ण है। इससे आसपास के गांवों का विकास, कृषि उत्पादों का परिवहन और स्थानीय आवागमन आसान हो सकता है।

लागत का पूरा गणित

प्रस्तावित परियोजना की अनुमानित लागत करीब 150 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें:

  • 30 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण मुआवजे पर
  • लगभग 10 करोड़ रुपये बिजली एवं अन्य उपयोगिता लाइनों के शिफ्टिंग कार्य पर
  • करीब 100 करोड़ रुपये सड़क निर्माण पर खर्च होने का अनुमान है

मार्ग छोटे गांवों से होकर गुजरता है, इसलिए बड़े फ्लायओवर, रेलवे ओवरब्रिज या विशाल पुलों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। शिप्रा नदी पर पहले से पुल उपलब्ध होने के कारण निर्माण लागत भी नियंत्रित रहने की संभावना है।

किन गांवों को मिलेगा फायदा

प्रस्तावित सड़क चंद्रगुप्त मौर्य चौराहे से शुरू होकर जस्सा, कराड़िया, बजरंग पालिया, धनखेड़ी, मुंडला हुसैन, शाहना, गुरान, जामोदी, सिमरोड़ और हिरली जैसे गांवों से होकर गुजरेगी। इसके बाद यह बोलासा के पास देवास-उज्जैन रोड से जुड़ेगी।

यहां से चंदेसरी मार्ग के जरिए करीब 20 किलोमीटर में उज्जैन पहुंचा जा सकेगा। स्थानीय स्तर पर देखा जाए तो यह सड़क कई ऐसे गांवों को सीधे सड़क नेटवर्क से जोड़ सकती है जो अभी मुख्य मार्गों से अपेक्षाकृत दूर हैं।

75 फीसदी सड़क पहले से मौजूद

परियोजना की एक खास बात यह है कि प्रस्तावित 40 किलोमीटर मार्ग का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा पहले से मौजूद सड़क नेटवर्क पर आधारित है। केवल 25 प्रतिशत हिस्से के लिए नई जमीन की जरूरत पड़ेगी या कांकड़ मार्ग को विकसित करना होगा।

सड़क दो लेन की होगी, जिसमें 7 मीटर चौड़ा कैरिज-वे और दोनों ओर पैदल चलने वालों के लिए सुविधाएं विकसित करने का भी प्रस्ताव है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना

यह परियोजना केवल इंदौर और उज्जैन के बीच एक नई सड़क बनाने का मामला नहीं है। इसका बड़ा पहलू ग्रामीण कनेक्टिविटी है। यदि सरकार विभाग के तर्कों से सहमत होती है, तो यह सड़क उन गांवों के लिए विकास की नई संभावनाएं खोल सकती है जो अब तक मुख्य परिवहन गलियारों से सीधे नहीं जुड़े हैं। वहीं यदि सरकार को इसकी उपयोगिता पर्याप्त नहीं लगती, तो परियोजना लंबे समय तक फाइलों में अटकी रह सकती है।

लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार अगले एक महीने के भीतर संशोधित प्रस्ताव सरकार को भेजने का प्रयास किया जाएगा। यदि स्वीकृति मिलती है तो भूमि अधिग्रहण और टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। निर्माण एजेंसी को करीब 18 से 20 महीने का समय दिया जा सकता है।

विभाग को उम्मीद है कि मंजूरी मिलने की स्थिति में आगामी सिंहस्थ से पहले यह सड़क यातायात के लिए तैयार की जा सकती है।

FAQ

प्रश्न: भांग्या-शकरखेड़ी रोड की लंबाई कितनी है?
उत्तर: प्रस्तावित सड़क की कुल लंबाई लगभग 40 किलोमीटर है।

प्रश्न: परियोजना की अनुमानित लागत कितनी है?
उत्तर: करीब 150 करोड़ रुपये।

प्रश्न: सरकार ने प्रस्ताव क्यों लौटाया?
उत्तर: सरकार ने पूछा है कि जब इंदौर-देवास-उज्जैन मार्ग और सिक्सलेन हाईवे पहले से मौजूद हैं, तो तीसरे मार्ग की आवश्यकता क्या है।

प्रश्न: सड़क बनने से किन क्षेत्रों को लाभ होगा?
उत्तर: इंदौर और उज्जैन के बीच स्थित कई ग्रामीण क्षेत्रों और गांवों को सीधा संपर्क मिलेगा, जिससे स्थानीय आवागमन और परिवहन आसान होगा।

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