Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित हेराफेरी के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी अनुकल्प मिश्रा और अन्य आरोपियों की संपत्ति, बैंक खातों, निवेश और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस कवायद का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं आरोपियों की संपत्ति उनकी ज्ञात आय से अधिक तो नहीं है और क्या कथित तौर पर दान की रकम का इस्तेमाल चल या अचल संपत्तियां बनाने में किया गया। जांच अभी जारी है और इन आरोपों की पुष्टि अदालत या जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट से होना बाकी है।
पुलिस के अनुसार, अनुकल्प मिश्रा मंदिर में नकद दान की गिनती करने वाली आउटसोर्स टीम का सदस्य था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उसने कथित तौर पर अपने साले लवकुश मिश्रा को भी इसी टीम में शामिल कराया। दोनों उन आठ आरोपियों में शामिल हैं जिन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।
जांच के दौरान पुलिस अयोध्या जिले के बसावा गांव भी पहुंची, जहां अनुकल्प मिश्रा का पैतृक घर है। अधिकारियों के अनुसार, वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि हाल के वर्षों में उसकी आर्थिक स्थिति में आई कथित बढ़ोतरी के पीछे धन का स्रोत क्या था। पुलिस उन दावों की भी पुष्टि कर रही है कि उसने हाल में एक फार्महाउस बनवाया, अयोध्या में करीब 65 लाख रुपये का मकान खरीदा और एक एसयूवी खरीदने की तैयारी कर रहा था। हालांकि, इन सभी पहलुओं की जांच जारी है और अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।
पुलिस 30 अप्रैल को अनुकल्प मिश्रा के गांव में आयोजित सात दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम के खर्च और उसके लिए इस्तेमाल धन के स्रोत की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह जांच वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला को समझने का हिस्सा है।
जांच एजेंसियां लवकुश मिश्रा के बैंक रिकॉर्ड और खर्चों की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि वह भी दान गिनने वाली टीम का हिस्सा था और उसकी हालिया खरीदारी व आय के स्रोतों का मिलान किया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक आठ आरोपियों राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे और रमाशंकर मिश्रा को गिरफ्तार किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

