नई दिल्ली/भोपाल: देश के एक बड़े हिस्से में आज से ‘नौतपा’ की शुरुआत हो चुकी है और इसके पहले ही दिन सूर्य देव ने अपने कड़े तेवर दिखा दिए हैं। दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार समेत देश के कम से कम आठ राज्य इस वक्त भयंकर लू (Heatwave) और भीषण गर्मी की चपेट में हैं। आज यानी 25 मई को देश के कई हिस्सों में पारा 45 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। मौसम विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तेलंगाना के कई जिलों में ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है, वहीं दिल्ली में बिजली की मांग ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इस जानलेवा गर्मी के पीछे मुख्य वजह पाकिस्तान की ओर से आ रही सूखी-गर्म हवाएं और अल-नीनो का बचा हुआ प्रभाव माना जा रहा है, जिसने मैदानी इलाकों को तंदूर बना दिया है।
नौतपा का पहला दिन: जमीन उबल रही है, आसमान से बरस रही है आग
ज्योतिष और मौसम विज्ञान दोनों के लिहाज से मई के आखिरी हफ्ते के ये 9 दिन साल के सबसे गर्म दिन माने जाते हैं। इस बार नौतपा ने उम्मीद के मुताबिक ही बेहद आक्रामक शुरुआत की है।
ग्राउंड जीरो से आ रही रिपोर्ट बताती हैं कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश शहरों में कर्फ्यू जैसा नजारा दिखने लगा है। राजस्थान के चुरू और बाड़मेर में तापमान 47.5 डिग्री को छू चुका है, जबकि मध्य प्रदेश के भोपाल और ग्वालियर में भी पारा 45 डिग्री के पार बना हुआ है। तेलंगाना में हालात इतने खराब हैं कि प्रशासन ने लोगों को दोपहर में घरों से बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ा दबाव: दिल्ली में बिजली की मांग ने रचा नया इतिहास
यह केवल मौसम का संकट नहीं है, बल्कि अब यह देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की परीक्षा भी ले रहा है। दिल्ली स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC) के आंकड़ों के मुताबिक, आज दोपहर राजधानी में बिजली की पीक डिमांड ने अब तक के सारे सर्वकालिक रिकॉर्ड तोड़ दिए।
लगातार चलते एयर कंडीशनर और कूलर्स के कारण ग्रिड पर भारी दबाव है। बिजली कंपनियों के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले तीन-चार दिन तापमान यही रहा, तो लोकल ट्रांसफार्मर फटने और अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है। पानी की किल्लत भी कई महानगरों में सिर उठाने लगी है।
इतिहास क्या कहता है: क्या मौसम का यह मिजाज सामान्य है?
अगर हम पिछले कुछ दशकों के इतिहास पर नजर डालें, तो भारत में मई के महीने में गर्मी का यह स्तर नया नहीं है, लेकिन इसकी ‘लगातार बढ़ने की अवधि’ (Duration) और ‘तीव्रता’ (Intensity) में बड़ा बदलाव आया है।
- साल 2015 का वो खौफनाक दौर: भारत के मौसम इतिहास में साल 2015 की हीटवेव को सबसे घातक माना जाता है, जब तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में लगभग 2,500 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। उस दौरान भी मई के इसी हफ्ते में पारा 47 डिग्री के पार गया था।
- 2022 और 2024 की चेतावनी: पिछले कुछ सालों में मार्च और अप्रैल के महीने से ही गर्मी शुरू हो जा रही थी, लेकिन इस साल (2026 में) मार्च-अप्रैल में हुई छिटपुट बारिश के कारण मई के अंत में आकर अचानक जो गर्मी बढ़ी है, उसने शरीर को मौसम के अनुकूल ढलने (Acclimatization) का मौका ही नहीं दिया।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि शहरीकरण के कारण कंक्रीट के जंगल बढ़ गए हैं। ये कंक्रीट के ढांचे दिनभर धूप को सोखते हैं और रात में गर्मी छोड़ते हैं, जिसे ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ कहा जाता है। यही वजह है कि अब रातें भी उतनी ठंडी नहीं हो पा रही हैं जितनी पहले हुआ करती थीं।

