पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में शनिवार को हुए एक बड़े आत्मघाती हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्वेटा रेलवे स्टेशन के पास हुए इस विस्फोट में कम से कम 23 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। धमाका उस समय हुआ जब एक यात्री ट्रेन स्टेशन से गुजर रही थी। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतर गए और उनमें आग लग गई। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि निशाना सुरक्षा बल थे। घटना के बाद क्वेटा के अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है और कई घायलों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।
घटनास्थल से सामने आई तस्वीरें बलूचिस्तान की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति की कहानी खुद बयां कर रही हैं। रेलवे स्टेशन के आसपास का इलाका धुएं और मलबे से भर गया। राहत दलों को कई घंटों तक फंसे यात्रियों को बाहर निकालने में मशक्कत करनी पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि विस्फोटक से लदी एक गाड़ी को ट्रेन के गुजरने के समय निशाना बनाकर उड़ाया गया। शुरुआती जांच में इसे फिदायीन हमला माना जा रहा है। पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि हमलावरों को स्टेशन जैसे संवेदनशील इलाके तक पहुंच कैसे मिली।
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने बयान जारी कर कहा कि उनका मकसद सुरक्षा बलों को निशाना बनाना था। हालांकि विस्फोट की चपेट में बड़ी संख्या में आम नागरिक भी आ गए। पाकिस्तान सरकार लंबे समय से BLA को देश की सबसे खतरनाक अलगाववादी संगठनों में गिनती रही है। यह संगठन बलूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठानों का लगातार विरोध करता रहा है।
क्वेटा और आसपास के इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में रेलवे, सैन्य ठिकानों और चीनी परियोजनाओं पर हमले बढ़े हैं। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन स्थानीय समूह लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि इस क्षेत्र को राजनीतिक और आर्थिक रूप से नजरअंदाज किया गया। यही असंतोष धीरे-धीरे सशस्त्र विद्रोह में बदलता गया।
यह पहली बार नहीं है जब क्वेटा रेलवे स्टेशन आतंक का निशाना बना हो। इससे पहले भी शहर में कई बड़े बम धमाके हो चुके हैं। 2013 में हजारा समुदाय को निशाना बनाकर किए गए हमलों ने पूरी दुनिया का ध्यान बलूचिस्तान की अस्थिरता की ओर खींचा था। हाल के महीनों में BLA ने पाकिस्तान सेना और बुनियादी ढांचे पर कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। विशेषज्ञ मानते हैं कि संगठन अब पहले से ज्यादा संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम दिखाई दे रहा है।
इस हमले का असर सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहने वाला। बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है क्योंकि यहां से चीन समर्थित कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट गुजरते हैं। ऐसे हमले विदेशी निवेश, रेलवे नेटवर्क और क्षेत्रीय स्थिरता पर सीधा असर डाल सकते हैं। पाकिस्तान सरकार के लिए चुनौती अब केवल आतंकियों को पकड़ना नहीं, बल्कि उस असंतोष को समझना भी है जो वर्षों से इस प्रांत में simmer करता रहा है।
फिलहाल क्वेटा में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों को सील कर दिया गया है। जांच एजेंसियां विस्फोट के पीछे मौजूद नेटवर्क की तलाश में जुटी हैं। वहीं अस्पतालों में घायल लोगों के परिजन बदहवास हालत में अपने अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। बलूचिस्तान एक बार फिर हिंसा, राजनीति और असुरक्षा के उस चक्र में फंसता दिख रहा है, जिससे निकलना पाकिस्तान के लिए लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
