नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पेपर लीक मामले ने अब एक अभूतपूर्व मोड़ ले लिया है। आज सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने हुई तीखी सुनवाई के दौरान अदालत ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख पर गंभीर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि परीक्षा व्यवस्था में जब तक व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों का यह “भावनात्मक शोषण” नहीं रुकेगा। इस बीच, 21 जून को होने जा रहे री-टेस्ट (Re-test) की गोपनीयता और सुरक्षा को अचूक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने देश के इतिहास में पहली बार भारतीय वायुसेना (IAF) के विमानों से प्रश्नपत्रों को सुरक्षित केंद्रों तक एयरलिफ्ट करने का फैसला किया है, जिसकी सीधी निगरानी खुद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: ‘संस्थागत ढुलमुल रवैया अब नहीं चलेगा’
आज दोपहर 2:15 बजे शुरू हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) की दलीलों को सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट की बेंच बेहद तल्ख नजर आई। कोर्ट ने टिप्पणी की:
“यह सिर्फ किसी एक छात्र की बात नहीं है, परीक्षा रद्द होने से पूरा परिवार एक गहरे सदमे (Traumatic) से गुजरता है। लोग सालों की मेहनत और भावनाएं इसमें निवेश करते हैं। जब तक आप गलती करने वाले अधिकारियों को चिन्हित नहीं करेंगे, तब तक यह संस्थागत ढुलमुल रवैया बंद नहीं होने वाला।”
अदालत में सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को आश्वस्त किया कि सरकार इस मामले की गंभीरता को समझती है और स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी सुरक्षा व्यवस्था की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय (अब शिक्षा मंत्रालय) को एनटीए के भीतर बौद्धिक और प्रशासनिक सुधारों का पूरा ब्लूप्रिंट सौंपने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते के लिए तय की है।
21 जून का री-टेस्ट: ‘सैन्य छावनी’ जैसी होगी सुरक्षा, IAF संभालेगी कमान
बीते 3 मई को आयोजित हुई नीट परीक्षा के रसायन विज्ञान (Chemistry) समेत करीब 410 सवाल परीक्षा से कई दिन पहले ही वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर लीक हो गए थे। इसके बाद मचे देशव्यापी बवाल को देखते हुए 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी। अब 21 जून को होने वाले री-टेस्ट को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और इसरो के पूर्व चेयरमैन के. राधाकृष्णन की हाई-पावर्ड कमेटी ने सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसकी मिसाल पहले कभी नहीं देखी गई।
सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कदम इस प्रकार हैं:
- प्रश्नपत्रों की एयरलिफ्टिंग: जमीनी परिवहन के दौरान होने वाले लीकेज के जोखिम को शून्य करने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) के मालवाहक विमानों का उपयोग संवेदनशील क्षेत्रों तक पेपर पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
- शत-प्रतिशत सरकारी केंद्र: एनटीए ने अपने हलफनामे में बताया है कि इस बार 99.5% परीक्षा केंद्र केवल सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को बनाया गया है ताकि निजी केंद्रों की संलिप्तता खत्म हो सके।
- डिजिटल लॉकिंग और सीसीटीवी: सभी 550 शहरों के 5,400 से अधिक केंद्रों पर आधुनिक डिजिटल लॉकिंग सिस्टम और रियल-टाइम सीसीटीवी सर्विलांस को अपग्रेड किया गया है।
2027 से पूरी तरह बंद होगा ‘पेन-पेपर’ मॉडल
इस पूरे विवाद ने भारत की राष्ट्रीय परीक्षा प्रणालियों की तकनीकी कमियों को उजागर कर दिया है। चौतरफा इस्तीफे के दबाव का सामना कर रहे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि सरकार अब ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है।
राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों को लागू करते हुए मंत्रालय ने आधिकारिक घोषणा की है कि साल 2027 से NEET-UG की परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मॉडल पर शिफ्ट कर दी जाएगी। डिजिटल मोड में आने के बाद फिजिकल पेपर लीक होने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी, ठीक वैसे ही जैसे वर्तमान में जेईई (JEE Main) की परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं।
वर्तमान में देश के करीब 23 लाख से अधिक मेडिकल एस्पिरेंट्स भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच दोबारा परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। शिक्षा मंत्री ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर परीक्षा केंद्रों पर बिजली, पानी और कूलिंग के पुख्ता इंतजाम करने के भी निर्देश दिए हैं।
