नई दिल्ली/भोपाल: देश के बड़े हिस्से को झुलसा रही भीषण गर्मी के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज शाम राहत भरी खबर जारी की है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के अधिकांश राज्यों में पिछले कई दिनों से चल रही खतरनाक लू (Heatwave) का असर अब पूरी तरह से खत्म हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, एक नए पश्चिमी विक्षोभ और हवाओं के रुख में बदलाव के कारण तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, दक्षिण और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जिसके बाद अब सभी की निगाहें ‘Monsoon 2026 forecast’ पर टिक गई हैं।
लू का टॉर्चर खत्म, अब छाएंगे बादल
पिछले दो हफ्तों से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लोग रिकॉर्ड तोड़ गर्मी का सामना कर रहे थे। कई शहरों में पारा 47 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका था। लेकिन IMD के ताजा बुलेटिन के अनुसार, आज यानी 30 मई से इन क्षेत्रों में लू से राहत मिल गई है। आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और धूल भरी तेज हवाएं चलने के कारण दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री की कमी आई है, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है।
इन राज्यों के लिए जारी हुआ ‘बारिश का अलर्ट’
गर्मी से राहत के बीच मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई है।
- उत्तर-पूर्वी भारत: असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में अगले 48 घंटों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। इसके लिए बाकायदा ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
- दक्षिण भारत: केरल, कर्नाटक के तटीय इलाकों और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा) के साथ बारिश का अलर्ट है।
- मध्य भारत: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में स्थानीय स्तर पर सिस्टम बनने से शाम के वक्त धूल भरी आंधी और हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
कैसा रहेगा इस साल का मानसून? (Monsoon 2026 Forecast)
खेती-किसानी और अर्थव्यवस्था के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण खबर यह है कि इस साल का मानसून सामान्य रहने की उम्मीद है। मौसम विभाग के दीर्घकालिक पूर्वानुमान (Long-Range Forecast) के मुताबिक, साल 2026 में देश में औसतन 90% से 95% तक बारिश होने का अनुमान है, जो कि कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है। केरल के तट पर मानसून की एंट्री अपने तय समय के आस-पास ही होने की उम्मीद है, जिससे जून के दूसरे सप्ताह तक दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में प्री-मानसून गतिविधियां रफ्तार पकड़ लेंगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
लगातार बढ़ती गर्मी के कारण देश के कई राज्यों में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी और जल संकट गहराने लगा था। तापमान में आई इस गिरावट और आगामी बारिश से न केवल आम जनता को सुकून मिलेगा, बल्कि खरीफ फसलों की बुआई की तैयारी कर रहे किसानों को भी बड़ी मदद मिलेगी।
पिछले साल से कितनी अलग है इस बार की गर्मी?
अगर इतिहास और पिछले आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल 2025 में मई का आखिरी हफ्ता इतना राहत भरा नहीं था। पिछले वर्ष जून के पहले सप्ताह तक उत्तर भारत में लू का प्रकोप जारी रहा था, जिसके कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ था। इस बार मई के अंत में ही पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से मौसम का मिजाज समय से पहले बदल गया है, जो एक दुर्लभ लेकिन सुखद बदलाव है।
मौसम की पल-पल की बदलती परिस्थितियों और स्थानीय चेतावनियों के लिए IMD weather update today पर नजर बनाए रखें और घर से निकलते समय पानी की बोतल साथ रखना न भूलें।

