देश के करोड़ों गरीब परिवारों के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत एक बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने उज्ज्वला लाभार्थियों को मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी है। अब योजना के पात्र परिवारों को साल में केवल पहले 4 सिलेंडरों पर ही ₹300 प्रति सिलेंडर की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संकट के कारण वैश्विक बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। मंत्रालय का कहना है कि घरेलू उपयोग वाले एक एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक लागत ₹1,600 से अधिक पहुंच गई है, जबकि उपभोक्ताओं को इससे काफी कम कीमत पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।
मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा ने बताया कि तेल विपणन कंपनियों को प्रति सिलेंडर लगभग ₹700 का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बढ़ती लागत और सब्सिडी बोझ को देखते हुए सरकार ने सब्सिडी वाले रिफिल की संख्या कम करने का फैसला लिया है।
उज्ज्वला ग्राहकों को कितने में मिलेगा सिलेंडर?
सरकार के अनुसार, उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को पहले 4 सिलेंडरों पर ₹300 प्रति सिलेंडर की सब्सिडी सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी। मौजूदा व्यवस्था में दिल्ली में उज्ज्वला उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर प्रभावी रूप से करीब ₹642 में उपलब्ध होगा।
वहीं सामान्य (गैर-उज्ज्वला) उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी सिलेंडर लगभग ₹942 में मिलेगा। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में यह अभी भी काफी कम है और इसमें अप्रत्यक्ष सरकारी समर्थन शामिल है।
पहले कितने सिलेंडरों पर मिलती थी सब्सिडी?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत 2016 में हुई थी। शुरुआत में लाभार्थियों को 12 सिलेंडरों तक सब्सिडी का लाभ मिलता था। बाद में यह संख्या घटाकर 9 की गई और अब इसे 4 कर दिया गया है।
मिडिल ईस्ट संकट का क्या है असर?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति बाधित होने से एलपीजी के अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क दामों में करीब 46 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी वजह से भारत में एलपीजी आयात की लागत बढ़ी है और तेल कंपनियों का घाटा भी बढ़ा है।
क्या आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अब साल में केवल चार सिलेंडरों पर प्रत्यक्ष सब्सिडी मिलने से घरेलू बजट पर असर पड़ सकता है, खासकर उन परिवारों पर जो सालभर में चार से अधिक सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं। हालांकि सरकार का तर्क है कि अधिकांश उज्ज्वला परिवारों की औसत वार्षिक खपत लगभग 4 से 5 सिलेंडरों के बीच है, इसलिए नई सीमा को उसी आधार पर तय किया गया है।

