मध्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने और क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने के उद्देश्य से छह बड़े इकोनॉमिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का लक्ष्य राज्य के लगभग सभी 55 जिलों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जोड़ना है। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि औद्योगिक निवेश, पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
रिपोर्टों के अनुसार, इन कॉरिडोरों की कुल लंबाई लगभग 3,300 किलोमीटर होगी और इनके निर्माण पर करीब 36,483 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इन परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
1. मालवा-निमाड़ विकासपथ: व्यापारिक क्षेत्रों को मिलेगी नई रफ्तार
करीब 450 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का उद्देश्य मालवा और निमाड़ क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करना है। गरोठ-उज्जैन और इंदौर-बुरहानपुर खंड इसके प्रमुख हिस्से हैं। इस मार्ग से मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर जैसे व्यापारिक केंद्र बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे।
कृषि उत्पादों के परिवहन से लेकर औद्योगिक लॉजिस्टिक्स तक, इस कॉरिडोर से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
2. विंध्य एक्सप्रेस-वे: भोपाल से रीवा-सिंगरौली तक आसान सफर
लगभग 676 किलोमीटर लंबे विंध्य एक्सप्रेस-वे के जरिए भोपाल, सागर, दमोह, कटनी, रीवा और सिंगरौली जैसे जिलों के बीच तेज कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विंध्य क्षेत्र में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और खनिज आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
3. बुंदेलखंड विकासपथ: पिछड़े क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल
करीब 330 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर से भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर के बीच संपर्क बेहतर होगा।
बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से आधारभूत ढांचे की चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे में यह परियोजना कृषि विपणन, पर्यटन और स्थानीय रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
4. अटल प्रगतिपथ: चंबल क्षेत्र के लिए नए अवसर
करीब 299 किलोमीटर लंबा अटल प्रगतिपथ दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे से जुड़ने की संभावना के कारण विशेष महत्व रखता है।
श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे जिलों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है। बेहतर सड़क नेटवर्क से औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और निवेश आकर्षित करने में सहायता मिलेगी।
5. नर्मदा प्रगतिपथ: सबसे लंबा कॉरिडोर
लगभग 867 किलोमीटर लंबा नर्मदा प्रगतिपथ इस पूरी योजना का सबसे बड़ा हिस्सा माना जा रहा है।
यह झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी जैसे जिलों को जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ और गुजरात के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने में सहायक हो सकता है। इससे अंतरराज्यीय व्यापार और माल परिवहन को भी बढ़ावा मिलेगा।
6. मध्यभारत विकासपथ: पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
करीब 746 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का फोकस पर्यटन स्थलों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना है।
भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच आसान होने से घरेलू और विदेशी पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।
किसानों और व्यापारियों को उत्पादों के परिवहन में कम समय और कम लागत का लाभ मिल सकता है।
यदि प्रस्तावित समय-सीमा के भीतर ये छह इकोनॉमिक कॉरिडोर तैयार हो जाते हैं, तो मध्य प्रदेश की कनेक्टिविटी व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ये परियोजनाएं आने वाले वर्षों में प्रदेश के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
