प्लेटो (Plato) यूनान का एक प्राचीन दार्शनिक था, जिसकी शिक्षाओं और लेखों का आज भी बहुत महत्व है. प्लेटो को अफलातून भी कहते हैं. इस महान् विचारक की रचनाएं सारे संसार में बड़ी रुचि से पढ़ी जाती हैं. वह सुकरात (Socrates) का शिष्य और अरस्तू (Aristotle) का गुरु था. वास्तव में सुकरात के महान् विचारों को ही उसके शिष्य प्लेटो ने अपनी रचनाओं में लिखा है. अरस्तू (Aristotle) की प्रतिभा को विकसित करने का श्रेय भी प्लेटो को जाता है. प्लेटो का जन्म ईसा से 427 वर्ष पहले यूनान के एथेंस नगर में हुआ था एवं मृत्यु 80 वर्ष की…
Author: Shailja Dubey
बहुरूपदर्शी (Kaleidoscope) प्रकाशीय कालीनों, दीवारों और रंगीन कपड़ों पर छपाई के लिए सुंदर डिजाइन पैदा करने के काम आता है. इसका आविष्कार सन् 1816 में स्काटलैंड के सर डेविड बूस्टर (Sir David Brewster) नामक भौतिकशास्त्री ने किया था. सन् 1817 में उन्होंने इसे एक खिलौने के रूप में पेटेंट कराया था. बहुरूपदर्शी झुके हुए समतल दर्पणों से होने वाले परावर्तनों से बनने वाले प्रतिविम्बों के सिद्धांत पर कार्य करता है. यदि 10° पर झुके हुए दो समतल दर्पणों के बीच कोई वस्तु रख दी जाए तो उसके तीन प्रतिविग्य बनते हैं. इसी प्रकार 60° पर झुके हुए दो समतल दर्पणों…
सभी रासायनिक प्रयोगशालाओं और उद्योगों में अम्लों और क्षारों का पता लगाने के लिए लिटमस पेपर (Litmus Paper) काम में लाए जाते हैं. लिटमस पेपर लाल और नीले रंग के होते हैं. जब नीले लिटमस को किसी अम्ल या अम्लीय विलयन (Acidic Solu- tion) में डाला जाता है, तो इसका रंग लाल हो जाता है. इसी प्रकार क्षारों और क्षारों के घोल में लाल लिटमस का रंग नीला हो जाता है. उदासीन घोल का लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं होता. इस प्रकार लिटमस पेपर की सहायता से यह पता लगा लिया जाता है कि अमुक घोल अम्लीय है या क्षारीय…
हम जानते हैं कि प्रत्येक पदार्थ छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना इन कणों को परमाणु कहते हैं. परमाणु अत्यंत सूक्ष्म होते हैं, जिन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता. बीसवीं शताब्दी के शुरू में वैज्ञानिकों ने यह भी पता लगा लिया कि परमाणु और भी अत्यंत सूक्ष्म कणों से मिलकर बने हैं. ये अत्यंत सूक्ष्म कण हैं: इलेक्ट्रोन, प्रोटोन और न्यूट्रान. इन कणों को हम मूल कण (Elementary Particles) कहते हैं. इन मूल कणों के अतिरिक्त वैज्ञानिकों ने और भी बहुत से मूल कणों का पता लगा लिया है. कौस्मिक किरणों के अध्ययन से पता चला है कि ब्रह्मांड…
प्रोजेक्टर (projector) एक ऐसा प्रकाशिक यंत्र है, जो पर्दे पर सिनेमा फिल्म या स्लाइडों के आकार में बढ़े हुए चित्र प्रदर्शित करता है. इस यंत्र को प्रोजेक्शन लैंटर्न भी कहते हैं. प्रोजेक्टर पर्दे पर बड़े चित्र कैसे बनाता है? एक साधारण प्रोजेक्टर के निम्नलिखित हिस्से होते हैं: (1) एक प्रकाश स्रोत, (ii) एक अवतल परावर्तक, जो प्रकाश को केंद्रित करता है, (iii) एक कंडेंसर लेंस, तथा (iv) एक प्रोजेक्टर लेंस. किसी स्लाइड के छोटे प्रतिबिंब को आवर्धित करने के लिए (आकार में बढ़ाने के लिए) एक प्रकाश-स्रोत की आवश्यकता होती है. अधिकतर प्रोजेक्टरों में 1000 वाट का टंगस्टन फिलामेंट का…
मनुष्य प्राचीन काल से ही समय मापने के लिए अलग-अलग तरह की घड़ियों का इस्तेमाल करता आया है प्राचीन काल की घड़ियों में अधिक प्रामाणिकता नहीं थीं, परंतु आज के वैज्ञानिकों ने बहुत हो उच्च स्तर की घड़ियों का विकास कर लिया है, जिनसे छोटी से छोटी समय की गति को मापा जा सकता है. सामान्य तौर पर प्रयोग में आने वाली आधुनिक पड़िया तीन प्रकार की हैं 1. चाबी से चलने वाली पड़ियों, 2 विद्युत से चलने वाली घड़ियां और 3. इलेक्ट्रोनिक पड़ियां चाबी वाली घड़ियां स्प्रिंग से चालती है, विद्युत घड़ियां बेट्री से और इलेक्ट्रोनिक घड़ियों (Quartz) से.…
जिन ध्वनियों को हम रोज सुनते हैं, वे सभी स्टीरिओफोनिक (Stereophonic) होती हैं. हमारे दो कान हैं और दोनों कानों में आने वाली ध्वनियों में थोड़ा-सा अंतर होता है. उनके पहुंचने का समय तथा तीव्रता में कुछ अंतर अवश्य होता है. प्रत्येक कान में ध्वनि के पहुंचने के समय तथा उनकी तीव्रता का अंतर हमारा मस्तिष्क पता कर लेता है. हमारा मस्तिष्क एक सेकेंड के एक हजारवें भाग का अंतर पता लगा सकता है. अब यदि किसी के सामने दो माइक्रोफोन रख दिए जाएं, तो इन तक आने वाली ध्वनियों की तीव्रता और पहुंचने के समय में कुछ न कुछ…
कुत्ता मनुष्य का बहुत ही वफादार दोस्त माना जाता है. शायद मानव ने इस जानवर को ही सबसे पहले पालना किया था. यह जानवर हमारे लिए बहुत ही उपयोगी है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह के लिए बहुत ही घातक सिद्ध हो सकता है. मनुष्य को काटकर यह कई प्रकार के बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट तथा फंगस से फैलने वाले रोंगों का निमित्त बना सकता है. कुत्ते के काटने से बहुत से बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिनसे क्षय रोग, स्पलेनिक फोवर, स्कारलेट फीवर, डिप्थीरिया आदि भयंकर रोग पैदा हो सकते हैं. कुत्तों के साथ सैलमोनेला एंटरिटिडिस तथा…
घरेलू मक्खी (Domestica) सभी कीड़ों तुलना में सबसे अधिक पाई जाती है. हमारे स्वास्थ्य के लिए शायद यह सबसे अधिक खतरनाक है विशेषकर उन देशों में जहां सफाई संबंधी स्थितियां अच्छी नहीं होतीं. मक्खी का शरीर हल्का भूरा और रोएंदार होता है. इसकी लंबाई लगभग 7 मिमी. होती है. इसकी दो लाल रंग की आंखें होती हैं. यह मुंह से काट नहीं सकती. इसका मुंह दो स्पंजी गद्दियों से बना होता भोजन करने का इसका तरीका बहुत विचित्र होता है. पहले यह लार तथा अन्य पाचक रस भोजन पर टपकाती है. इस रस से जो घोल बनता है, उसे यह…
पेंनगुइन (Penguin) स्फेनिस्सिफोर्स (Sphenisciformes) प्रजाति के बहुत विचित्र समुद्री पक्षी हैं. ये अत्यंत ठंडे प्रदेशों में रहते हैं. इनके विषय में सबसे विचित्र बात यह है कि ये आदमी की तरह पैरों पर सीधे खड़े हो सकते हैं. पेंगुइन पक्षी के पाए जाने वाले स्थान कुछ लोगों का मत है कि यह अनोखा पक्षी जहां भी ठंडा मौसम होता है, वहीं पाया जाता है, लेकिन यह धारणा गलत है, ये केवल धरती के दक्षिणी गोलार्ध में मिलते हैं, ये एंटार्कटिक महाद्वीप और टापुओं पर रहते हैं. ये अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, और दक्षिणी अमेरिका के ठंडे दक्षिणी समुद्र तटों पर भी…
