Author: Shailja Dubey

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल लोगों को सही दिशा देने में कर सकें।" इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। अभी मैं दैनिक अपडेट, मनोरंजन, सामान्य ज्ञान और जीवनशैली समेत अन्य विषयों पर काम कर रही हूं।

लिवर (Liver) जिसे हिंदी में जिगर या यकृत भी कहते हैं उदर में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और आवश्यक अंग है. इसे शरीर की रात दिन चलने वाली लेबोरेटरी, प्रयोगशाला या रसायन बनाने का कारखाना कहा जा सकता है. जिगर में सौ से भी अधिक प्रक्रियाएं चलती रहती हैं. मूलरूप से जिगर का कार्य भोजन को मलोत्सर्जन, भोजन-सामग्री का संचयन और भोज्य पदाथों का रूपांतरण, रक्त-निर्माण की प्रक्रिया को बनाए रखना तथा विषैले तत्वों को नष्ट करना आदि है. यदि कसी मनुष्य का जिगर काम करना बंद कर दे तो कुछ ही घंटों में उसकी मृत्यु निश्चित है. एक वयस्क…

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कुछ पदार्थों विशेषकर प्रोटीनों के प्रति शरीर की असाधारण संवेदनशीलता को एलर्जी (Allergies) कहते हैं. हे-फीवर (परागज ज्वर), त्वचा पर चकत्ते पड़ना, किसी खास प्रकार के इंजेक्शन की प्रतिक्रिया और कुछ प्रकार के दमा रोग मनुष्य में होने वाली एलर्जी के कुछ उदाहरण हैं. हमारे वातावरण में प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाले अनेक पदार्थों के असंख्य कण मिलते हैं इन पदार्थों को एलर्जी के रूप में जाना जाता है जो अधिकतर लोगों के लिए हानिकारक नही होते. एलर्जी उत्पन्न करने वाले ये पदार्थ पराग या धूल कणों के साथ नाक या आंखों द्वारा शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. ये…

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अस्पताल (Hospital) वह स्थान और संस्था है। जहां बीमार लोगों की देखभाल और इलाज किया जाता है. क्या आप जानते हो कि अस्पतालों की शुरुआत कब और कैसे हुई? अस्पतालों या औषधालयों ((Hospital) का इतिहास भारत और यूनान देश के बेबीलोनिया से शुरू होता है. शुरू के ये अस्पताल मंदिर थे. मरीजों को बहुत थोड़ी दवायें दी जाती थीं. लंका में ईसा से 437 वर्ष पूर्व भी अस्पताल थे, भारत में इससे भी पहले महात्मा बुद्ध के समय से अस्पतालों की स्थापना होती आ रही है. सम्राट अशोक द्वारा तीसरी ईसवी में 18 अस्पतालों की स्थापना की गई थी और…

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एल्बिनिज्म (Albinism) लैटिन शब्द एल्बस (Albus) से बना है, जिसका अर्थ है-सफेद, एल्बिनिज्म या रंजकहीनता या रंगहीनता एक पैतृक रोग है, जो जीन्स (Genes) में परिवर्तन आ जाने से होता है. रंजकहीनता केवल मनुष्यों में ही नहीं, बल्कि जानवरों और पौधों में भी मिलती है. रंजकहीनता  आंखों, खाल पर और बालों में से पीले, लाल, भूरे और काले रेशों की अनुपस्थिति से पैदा होती है. इसकी वजह से शरीर में धब्बे पड़ जाते हैं.  एल्बिनिज्म छुआछूत का रोग नही है यह एक जेनेटिक रोग है जो ज्‍यादातर मामलों में बच्‍चों को माता-पिता से मिलता है और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी…

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चिकन पॉक्स (Chicken pox) या छोटी माता बच्चों में होने वाला आम रोग है. यह आमतौर पर दो से छह वर्ष के आयु वर्ग में होता है. वयस्क लोग इस रोग के संक्रमण से कदाचित ही ग्रसित होते हैं. यह रोग आमतौर से महामारी के रूप में फैलता है. चिकन पॉक्स का कारण चिकन पॉक्स एक प्रकार के सूक्ष्म विषाणु द्वारा फैलता है, जिसे विशेष प्रकार के माइक्रोस्कोप से ही देखा जा सकता है. इस सूक्ष्म विषाणु का नाम वरिसेला जॉस्टर (Vericella Zoster virus) है. हवा में नमी द्वारा इसके विषाणु एक जगह से दूसरी जगह जाकर यह बीमारी तेजी…

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आमतौर पर अन्य जीवों की तुलना में स्तनपायी जीवों का मस्तिष्क उनके शरीर के अनुपात से बड़ा होता है. स्तनपायी जीवों में मनुष्य का मस्तिष्क सबसे अधिक विकसित और बड़ा है. यह जीवन भर शरीर के सभी कार्यों और गतियों पर नियंत्रण रखता है. यह हर क्षण सक्रिय रहता है और शरीर के सभी अंगों को उनके कार्यों के बारे में मार्ग निर्देशन देता है. यही कारण है कि मस्तिष्क को शरीर का नियंत्रण केंद्र कहते हैं. क्या आप जानते हो कि हमारा मस्तिष्क किसका बना हुआ है यह अपने भिन्न-भिन्न कार्यों को कैसे करता है? मानव मस्तिष्क (Human Brain)…

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मोनेट की एक प्रभाववादी पेंटिंग प्रभाववादी कला की प्रवृत्ति को सुर्योदय के दृश्य में आगे बढ़ाने में योग दिया चित्रकला कला उतनी ही प्राचीन है जितनी मानव सभ्यता इसे कला का सबसे रचनात्मक रूप समझा जाता है. इतिहास के अलग अलग कालों में चित्रकला की भिन्न-भिन्न शैलियों का विकास हुआ. प्रत्येक शैली में अपनी विशेषता रखनेवाले महान चित्रकार हुये. प्रभाववाद (Impressionism) इनमें से एक ऐसी शैली है जिसका सबसे पहले फ्रांस के चित्रकारों ने सन् 1870 आदि में उपयोग किया. इस प्रकार के चित्र या पेंटिंग्स किसी एक चीज का प्रभाव दिखाते हैं, चित्र में दिखाई सभी चीजों का नहीं.…

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शरीर की बीमारी के कीटाणुओं (बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ) के खिलाफ लड़ने और बीमारी के बाद ठीक होने की प्राकृतिक क्षमता को इम्यूनिटी (immunity) या रोधक्षमता कहते हैं. जिस व्यक्ति में किसी बीमारी के प्रति यह रोधक्षमता होती है, उसे वह बीमारी नहीं लगती, जबकि दूसरों को यह बीमारी लग सकती है. माइक्रोब (Microbe) और पैरासाइट (Parasite) आदमियों में कई बीमारियां फैलाते हैं. बीमारी फैलाने वाले कीटाणु एक प्रकार का जीव-विष शरीर में छोड़ते हैं, जो बहुत जहरीला होता है. सामान्य तौर पर माइक्रोबों से बचने की शरीर में प्राकृतिक शक्ति होती है. पहले तो खेल ही इन्हें अंदर घुसने नहीं…

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शरीर में दो या दो से अधिक हड्डियां हैं, उस स्थान को संधियां (Joints) और ये जहां मिलती उसे संधिस्थल कहते हैं. इन संधियों की बनावट पर यह निर्भर करता है कि हड्डियां कितनी या किस दिशा में हिल-डुल सकती हैं. शरीर में संधियां के प्रकार मुख्य रूप से शरीर में तीन प्रकार की संधियां होती हैं. इनकी ये श्रेणियां इनकी अलग-अलग गति के आधार पर बनाई गई हैं. ये श्रेणियां इस प्रकार हैं:- स्थिर या अचल संधि: स्थिर संधि में हड्डियां सख्ती से एक दूसरे के साथ जुड़ी होती हैं, क्योंकि सख्त और मजबूत तंतुओं से हड्डियों को जकड़कर…

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आधुनिक कृत्रिम अंग बहुत ही प्राकृतिक दिखते हैं और पहनने में काफी आरामदायक होते हैं. इलेक्ट्रोनिक से चलने वाले आधुनिकतम अंग शरीर की मांसपेशियों की सूक्ष्म विद्युतीप प्रभावों से काम करते हैं. कृत्रिम अंगों के अलावा शरीर के अन्य अंग जिनके स्थान पर कृत्रिम अंग लगाये जा सकते हैं- आंख, दांत, हृदय का वाल्व और हृदय का पेस मेकर आदि हैं. First Artificial Limbs: आज चिकित्सा विज्ञान ने इतनी उन्नति कर ली है शरीर के कई अंग कृत्रिम रूप से बनाये जाने और योग्य सर्जन डॉक्टरों द्वारा लगाये जाने लगे हैं. यह प्रगति एक लंबे समय तक बहुत से प्रयत्नों…

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