भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जून की शुरुआत के साथ ही गहराते जलसंकट ने दस्तक दे दी है। शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब (भोजताल) का जलस्तर भीषण गर्मी और तेज वाष्पीकरण के कारण मई के आखिरी दिनों से लेकर जून के पहले हफ्ते तक लगातार नीचे जा रहा है। मात्र 13 दिनों के भीतर तालाब का पानी 0.65 फीट घटकर 1659.70 फीट पर पहुंच गया है, जो हर दिन 0.05 फीट की रफ्तार से कम हो रहा है। इस गिरावट से शहर की करीब 40 फीसदी आबादी सीधे प्रभावित हो रही है, खासकर पुराने भोपाल की गैस पीड़ित कॉलोनियां जहां जर्जर पाइपलाइनों के कारण टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। नगर निगम (BMC) के अनुसार, यदि मानसून में देरी हुई तो जून के अंत तक तालाब डेड स्टोरेज लेवल (1652 फीट) के बेहद करीब पहुंच सकता है।
आंकड़ों की नजर से: कितनी गंभीर है स्थिति?
गर्मियों का मौसम आते ही पानी की खपत में अचानक उछाल आता है, लेकिन इस बार जलस्तर की गिरावट की रफ्तार ने नगर निगम की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वर्तमान स्थिति को इन मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- वर्तमान जलस्तर: 1659.70 फीट (मई के अंतिम सप्ताह के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर, जो जून की तपिश में लगातार घट रहा है)।
- डेड स्टोरेज लेवल: 1652 फीट (यह वह बिंदु है जिसके नीचे जाने पर तालाब से पानी खींचना तकनीकी रूप से बेहद मुश्किल हो जाता है)।
- दैनिक गिरावट की दर: लगभग 0.05 फीट प्रतिदिन, जो तेज धूप और हीटवेव के कारण बढ़ सकती है।
- बढ़ती मांग: भोपाल में इस समय पानी की मांग में 3% से 5% की बढ़ोतरी देखी गई है। पीक सीजन में शहर की दैनिक खपत 440 MLD से बढ़कर 470 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) तक पहुंच चुकी है।
पुराने भोपाल की इन कॉलोनियों में टैंकरों का सहारा
तालाब के घटते जलस्तर का सबसे संवेदनशील और सीधा असर भोपाल के जमीनी इलाकों पर दिखना शुरू हो गया है। सरकारी दावों के विपरीत, कई इलाकों में पानी की सप्लाई का प्रेशर काफी कम हो गया है।
विशेष रूप से पुराने भोपाल की गैस पीड़ित कॉलोनियों—अन्नू नगर, नवाब कॉलोनी, शिव नगर, ब्लू मून कॉलोनी, गरीब नगर और सज्जाद नगर में स्थिति ज्यादा खराब है। इन इलाकों के बाशिंदों को दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह से प्राइवेट और नगर निगम के टैंकरों के भरोसे रहना पड़ रहा है।
लीकेज की पुरानी बीमारी: इस संकट को बढ़ाने में एक बड़ा हाथ साल 2009 में भोपाल गैस राहत कोष से बिछाई गई करीब 13 साल पुरानी मुख्य पाइपलाइन का भी है। यह पाइपलाइन जगह-जगह से जर्जर और लीक हो चुकी है। इसके चलते लाखों लीटर साफ पानी सड़कों पर बह जाता है और अंतिम छोर पर बसी कॉलोनियों तक पर्याप्त प्रेशर नहीं मिल पाता।
2030 का लक्ष्य और आज की हकीकत
ज्यादातर विमर्श सिर्फ इस बात पर सिमट जाता है कि इस सीजन में तालाब कितना खाली हुआ, लेकिन इसका एक और चिंताजनक पहलू है जो भविष्य के संकट की ओर इशारा करता है। भोपाल नगर निगम के मास्टर प्लान के अनुमान के मुताबिक, साल 2030 तक शहर की आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए रोजाना 541 MLD पानी की आवश्यकता होगी।
हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2026 के जून महीने में ही हम 470 MLD की खपत को पार कर चुके हैं। यानी अगले चार सालों के लिए अनुमानित वृद्धि का लगभग 86% हिस्सा शहर आज ही इस्तेमाल कर रहा है।
बड़ा तालाब शहर की कुल वाटर सप्लाई का लगभग एक-तिहाई (30-40%) हिस्सा संभालता है, जबकि बाकी जरूरतें कोलार और नर्मदा प्रोजेक्ट से पूरी होती हैं। कोलार ट्रीटमेंट प्लांट पहले से ही अपनी 153 MLD की तय क्षमता के मुकाबले 162 MLD का रॉ-वॉटर प्रोसेस कर रहा है। ऐसे में अगर भोजताल का जलस्तर जून के अंत तक 4 फीट और नीचे गिरता है, तो पूरा दबाव बाकी दोनों लाइफलाइन्स पर आ जाएगा, जो पहले से ही ओवरलोड चल रही हैं।
क्या हैं विकल्प?
अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान वाटर स्टॉक को देखते हुए मानसून आने तक सप्लाई को नियंत्रित रखने की योजना है। हालांकि, शहर के कई हिस्सों में भूजल स्तर (Groundwater) भी तेजी से नीचे भागा है। कई वीआईपी और रिहायशी इलाकों में 450 मीटर गहरे बोरवेल भी इस गर्मी में जवाब दे चुके हैं। प्रशासन अब नागरिकों से घरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम दुरुस्त करने और पानी की बर्बादी रोकने की लगातार अपील कर रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. भोपाल के बड़े तालाब (भोजताल) का फुल टैंक लेवल (FTL) कितना है?
बड़े तालाब का अधिकतम फुल टैंक लेवल 1666.80 फीट है। पिछले साल सितंबर में अच्छी बारिश के चलते यह पूरी तरह भर गया था और भदभदा डैम के गेट खोलने पड़े थे।
Q2. तालाब का पानी घटने से भोपाल के कौन से हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं?
इसका सबसे ज्यादा असर पुराने भोपाल के निचले इलाकों और गैस राहत कॉलोनियों (जैसे अन्नू नगर, नवाब कॉलोनी, सज्जाद नगर) में होता है, जहां पाइपलाइन नेटवर्क पुराना होने के कारण पानी का प्रेशर ड्रॉप हो जाता है।
Q3. बड़े तालाब के अलावा भोपाल की जलापूर्ति के अन्य मुख्य स्रोत क्या हैं?
भोपाल की लगभग 70% पानी की जरूरत कोलार परियोजना और नर्मदा पाइपलाइन से पूरी होती है। शेष 30% हिस्से की जिम्मेदारी बड़े तालाब पर है, जबकि लगभग 10% आबादी आज भी निजी ट्यूबवेल और हैंडपंपों पर निर्भर है।
