Tuesday, 9 June

ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ने वाला प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करने से सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा और इसी दौरान 12 जून को अधिक मास का दूसरा एवं अंतिम प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण यह व्रत शुक्र प्रदोष व्रत कहलाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और वैवाहिक जीवन में मधुरता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कब है ज्येष्ठ अधिक मास का अंतिम प्रदोष व्रत?

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 12 जून 2026 को शाम 7:36 बजे होगी। तिथि का समापन 13 जून 2026 को शाम 4:07 बजे होगा।

प्रदोष व्रत 2026 तिथि और मुहूर्त

  • प्रदोष व्रत तिथि: 12 जून 2026, शुक्रवार
  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 12 जून, शाम 7:36 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 13 जून, शाम 4:07 बजे
  • प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: 12 जून, शाम 7:36 बजे से रात 9:20 बजे तक

धार्मिक परंपरा के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान कर भगवान शिव का ध्यान करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं। कई भक्त दिनभर उपवास रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार ग्रहण करते हैं।

शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है। यदि घर में शिवलिंग स्थापित है तो उसका अभिषेक किया जा सकता है। पूजा के दौरान भगवान शिव को जल, दूध, शहद, गंगाजल, बेलपत्र और सफेद पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

पूजन के बाद शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र तथा प्रदोष व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है।

अधिक मास में प्रदोष व्रत का महत्व

अधिक मास को भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम स्वरूप को समर्पित माना जाता है, लेकिन इस अवधि में भगवान शिव की आराधना का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में किए गए जप, तप, दान और व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

प्रदोष व्रत विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

शुक्र प्रदोष व्रत से जुड़े धार्मिक लाभ

हिंदू मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों को कई शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।
  • मानसिक तनाव कम होने की मान्यता है।
  • धन-संपदा और समृद्धि के योग मजबूत होते हैं।
  • भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने का विश्वास किया जाता है।

12 जून 2026 को पड़ने वाला शुक्र प्रदोष व्रत ज्येष्ठ अधिक मास का अंतिम प्रदोष व्रत होगा। धार्मिक दृष्टि से यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा कर आध्यात्मिक शांति, सुख-समृद्धि और पारिवारिक मंगल की कामना करते हैं।

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