Sunday, 31 May

नई दिल्ली। दुनिया भर में आज World No Tobacco Day 2026 मनाया जा रहा है। इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपना फोकस सिर्फ पारंपरिक सिगरेट या तंबाकू तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच, वेपिंग डिवाइस और सिंथेटिक निकोटीन जैसे नए उत्पादों पर भी गंभीर चिंता जताई है। WHO का कहना है कि तंबाकू और निकोटीन उद्योग युवाओं को आकर्षित करने के लिए नए-नए तरीके अपना रहा है, जिससे कम उम्र में लत लगने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

क्या है World No Tobacco Day 2026 की थीम?

इस साल की थीम है — “Unmasking the Appeal – Countering Nicotine and Tobacco Addiction” यानी “आकर्षण के पीछे छिपे सच को उजागर करना और निकोटीन-तंबाकू की लत का मुकाबला करना।”

WHO के अनुसार, तंबाकू कंपनियां अब अपने उत्पादों को आकर्षक फ्लेवर, चमकदार पैकेजिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग और डिजिटल प्रचार के जरिए युवाओं तक पहुंचा रही हैं। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को निकोटीन की लत की ओर धकेलना है।

युवाओं को क्यों बनाया जा रहा है नया टारगेट?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के कई देशों में पारंपरिक धूम्रपान करने वालों की संख्या घट रही है। ऐसे में तंबाकू और निकोटीन उद्योग नए उपभोक्ताओं की तलाश में किशोरों और युवाओं को निशाना बना रहा है।

WHO के आंकड़ों के मुताबिक:

  • दुनिया में 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 4 करोड़ किशोर किसी न किसी तंबाकू उत्पाद का इस्तेमाल करते हैं।
  • करीब 1.5 करोड़ किशोर ई-सिगरेट या वेपिंग उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं।
  • जिन देशों में आंकड़े उपलब्ध हैं, वहां किशोर वयस्कों की तुलना में औसतन नौ गुना अधिक वेपिंग करते पाए गए हैं।

ई-सिगरेट और निकोटीन पाउच को लेकर WHO की चेतावनी

WHO ने हाल ही में निकोटीन पाउच को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि कई देशों में इन उत्पादों के लिए स्पष्ट नियम नहीं हैं। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, म्यूजिक फेस्टिवल, स्पोर्ट्स इवेंट और आकर्षक फ्लेवर के जरिए इनका प्रचार किया जा रहा है, जिससे युवाओं में इनकी लोकप्रियता बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, निकोटीन पाउच और सिंथेटिक निकोटीन उत्पाद देखने में आधुनिक और कम नुकसानदेह लग सकते हैं, लेकिन इनमें मौजूद निकोटीन तेजी से लत पैदा कर सकता है।

तंबाकू के नुकसान सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं

तंबाकू सेवन को दुनिया में रोकी जा सकने वाली मौतों के सबसे बड़े कारणों में माना जाता है। इसके कारण:

  • फेफड़ों का कैंसर
  • मुंह और गले का कैंसर
  • हृदय रोग
  • स्ट्रोक
  • श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियां
  • टीबी जैसी बीमारियों का जोखिम

कई गुना बढ़ जाता है। WHO का कहना है कि हर साल लाखों लोगों की मौत तंबाकू और निकोटीन से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है।

दुनिया में सख्त होते जा रहे हैं तंबाकू विरोधी कानून

तंबाकू नियंत्रण को लेकर कई देशों ने हाल के वर्षों में सख्त कदम उठाए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध, सादे पैकेजिंग नियम, फ्लेवर बैन और विज्ञापन प्रतिबंध जैसी नीतियां लगातार बढ़ रही हैं। WHO ने भी सरकारों से युवाओं को लक्षित करने वाली मार्केटिंग पर कड़े नियंत्रण, फ्लेवर प्रतिबंध और निकोटीन उत्पादों के लिए मजबूत नियम लागू करने की अपील की है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह दिवस?

विश्व तंबाकू निषेध दिवस सिर्फ एक जागरूकता अभियान नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल युग में तंबाकू उद्योग की रणनीतियां पहले से अधिक जटिल हो चुकी हैं। ऐसे में अभिभावकों, स्कूलों, स्वास्थ्य संस्थानों और सरकारों की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

WHO का स्पष्ट संदेश है कि यदि युवाओं को निकोटीन आधारित नए उत्पादों के आकर्षण से नहीं बचाया गया, तो तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में पिछले कई दशकों में हासिल हुई उपलब्धियां कमजोर पड़ सकती हैं।

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