भोपाल। संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य और पूर्व सह कार्यवाह सुरेश सोनी अचानक फिर से चर्चाओं में आ गए हैं। सूत्रों का दावा है कि प्रदेश के नए मुख्यमंत्री की ताजपोशी की पूरी स्क्रिप्ट सुरेश सोनी ने ही लिखी थी।
असल में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पहले किसी दिग्गज को सीएम बनाने का प्रस्ताव दिया गया था। संघ और बीजेपी के बीच समन्वय का काम देख रहे वरिष्ठ पदाधिकारी भी इससे सहमत हो गए थे। लेकिन जब बीजेपी को प्रदेश में भारी बहुमत मिला, तो कहानी में मोड़ आ गया। केंद्रीय नेतृत्व जिसका नाम तय करना चाह रहा था, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह उस पर कतई सहमत नही थे। इसी मौके पर सोनी की तरफ से लॉबिंग शुरू हुई। एक कारोबारी लॉबी भी सक्रिय थी। हाई कमान के पास विधायक दल की बैठक के चार दिन पहले ही दूसरा नाम फाइनल होकर पहुंचा दिया गया था।
सुरेश सोनी पूर्व में सत्ता और संगठन के समन्वय का काम भी देख चुके हैं। और एक समय तत्कालीन सीएम शिवराज को हटाए जाने की मुहिम चली थी, इसके पीछे भी सोनी जी की भूमिका बताई गई थी। उसके बाद शिवराज ने उनसे पटरी बैठाने की कोशिश शुरू कर दी थी। इसमें उन्हें सफलता भी मिल गई थी।
अब जब डॉक्टर मोहन यादव मुख्यमंत्री बन गये हैं, तब सोनी की सक्रियता फिर से दिखने लगी है। शिवाजी नगर स्थित ‘नदी का घर’ में उन्होंने बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पौन घंटे तक बंद कमरे में बात की है। सोनी का डेरा फिलहाल यहीं बताया जाता है। सोनी ने विधानसभा अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी दोपहर बाद मुलाकात की थी।
इन मुलाकातों को नए सत्ता समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। मप्र की राजनीति में उनका खासा दखल भी रहा। सह सरकार्यवाह के पद से हटने के बाद सोनी ने मप्र की सियासत से परोक्ष रूप से दूरी बना ली थी, लेकिन वे अपने करीबियों से लगातार संपर्क में रहे।
डॉ. मोहन यादव के सीएम बनने के बाद फिर समीकरण बदले हैं। संघ से जुड़े सूत्रों की मानें तो सोनी भोपाल में कुछ बैठकों के सिलसिले में आए हैं। यहां बता दें कि ‘नदी का घर’ में पूर्व केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे रहते थे। उनके निधन के बाद यह संघ की गतिविधियों को संचालित करने का एक केंद्र बन गया है।
यहां बता दें सोनी जब बीजेपी के समन्वय का काम देखते थे, तब से डॉ. मोहन यादव, शिवराज सिंह और तोमर उनके काफी नजदीकी रहे हैं। मप्र की राजनीति में उनका खासा दखल भी रहा। सह सरकार्यवाह के पद से हटने के बाद सोनी ने मप्र की सियासत से परोक्ष रूप से दूरी बना ली थी। बताते हैं वे इस दौरान अपने करीबियों से लगातार संपर्क में रहे हैं।

