हरदा। हरदा में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के बाद दूसरे दिन भी मलबे में जगह-जगह आग धधक रही है और धुआं उठ रहा है। तेज तपिश बरकरार है। इससे बचावकर्मियों को मलबा हटाने में भी दिक्कत आ रही है। मौके पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के बचाव दल आग बुझाने और कूलिंग करने का काम कर रहे हैं।
पटाखा फैक्ट्री के आसपास बसे लोगों का गुस्सा दूसरे दिन मौके पर पहुंचे अधिकारियों पर फूट पड़ा। बैरागढ़ निवासी पिंकी चौहान और जानकीबाई ने एसडीएम केसी परते से कहा कि उनके घर के पास एक गोदाम और है, जहां पर पटाखे और कच्चा माल रखा है। उसे तुरंत हटाया जाए। अगर ऐसा नहीं किया तो उनका घर और आसपास के लोग प्रभावित होंगे। फैक्ट्री में विस्फोट से 11 लोगों की मौत हो गई। 217 लोग घायल हो गए, इनमें फैक्ट्री के 51 मजदूर शामिल हैं। 73 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। 38 घायलों को हरदा से रेफर किया गया है। अब तक 95 लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है। हरदा जिला अस्पताल में भर्ती मजदूर संदीप ने बताया कि हादसे के वक्त फैक्ट्री में 20-25 बच्चे भी थे। लेकिन अभी तक उनके बारे में जानकारी नहीं मिल सकी ।
जिस बेसमेंट में बारूद रखा था और मजदूर काम कर रहे थे, उसका मलबा हटाया जा रहा है। इसके लिए हेडक्वाटर वाराणसी से नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स की 35 सदस्यों की टीम आई है। मंगलवार देर रात तक 2 घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। 51 गंभीर घायलों को भोपाल, इंदौर और नर्मदापुरम रेफर किया गया। कई अब भी लापता हैं। हृष्ठक्रस्न मलबे में दबे लोगों को निकालने में जुटी है। हालात का जायजा लेने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को हरदा जाएंगे।
हादसे में फैक्ट्री के आसपास बने 60 घर जल गए। एहतियातन 100 से ज्यादा इमारतों को खाली करा लिया गया। हरदा एसडीएम केसी परते का कहना है कि फैक्ट्री अनफिट थी। फैक्ट्री मालिक राजेश अग्रवाल, सोमेश अग्रवाल और रफीक खान को रात करीब 9 बजे राजगढ़ जिले के सारंगपुर से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इनके खिलाफ हरदा सिविल लाइन थाने में केस दर्ज किया गया है।

