पटना। बिहार की सियासत में इस वक्त चाचा-भतीजे यानी पारस और चिराग पासवान की खूब चर्चा हो रही है। यूं कहें कि चाचा-भतीजा बिहार से लेकर दिल्ली तक चर्चा का विषय बने हुए हैं, तो गलत नहीं होगा। चाचा-भतीजे की टेंशन अब सियासी रूप से एनडीए के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी सियासी विरासत का जिम्मा लिए दोनों ने अपनी राहें जुदा कर ली थीं। दोनों एक दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं। अब इनकी जंग चुनावी मैदान तक पहुंच गई है।
चिराग को 4 सीटें, पारस को बस 1
दरअसल, लोकसभा 2024 के लिए एनडीए में सीट शेयरिंग लगभग फाइनल हो गई है। सीट शेयरिंग के फॉर्मूले के बारे में मिली जानकारी के अनुसार, जदयू 16 सीटों और भाजपा 17 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरेगी। चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) को चार सीटें देने पर पूर्व से सहमति है। वहीं, पशुपति पारस, मांझी की पार्टी हम, उपेंद्र कुशवाहा को एक सीट मिल सकती है। साफ है कि बीजेपी ने चिराग को पशुपति पारस से ज्यादा तवज्जो दी है।
चाचा-भतीजे का होगा आमना-सामना?
यहां खास बात यह भी है कि चिराग पासवान हाजीपुर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। कई बार वो दावेदारी भी पेश कर चुके हैं। वहीं, एनडीए चाहती है कि पशुपति पारस समस्तीपुर से चुनाव लड़ें, लेकिन पशुपति पारस ने अब अपनी मंशा साफ कर दी है।
उन्होंने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ-साफ कहा कि वो हाजीपुर सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में हो सकता है कि इस लोकसभा चुनाव में हाजीपुर सीट पर चाचा-भतीजा आमने-सामने हों।

