Saturday, 11 April

सागर। गढ़ाकोटा में सुनार नदी के घाट पर बैठकर साधना कर रहे ये बटुक शास्त्रार्थ के साथ रामकथा में भी पारंगत हो रहे हैं। ये सभी श्रीगणेश संस्कृत महाविद्यालय गढ़ाकोटा में अध्ययनरत हैं। इनकी संख्या 252 हैं। इन्हें रामचरित मानस, रामायण के साथ ही अयोध्या में राम मंदिर का इतिहास, उसके टूटने, बनने, रामलला के विराजमान होने तक चले संघर्षों के बारे में भी विस्तार से समझाया जा रहा है।

महाविद्यालय के संस्थापक एवं संचालक पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का कहना है कि इसके पीछे उद्देश्य यही है कि ये बटुक जब कथा वाचक बनकर यहां से निकलें तो लोगों को भगवान श्रीराम की जीवन लीला सुनाते हुए उन्हें अपने जीवन में ढालने की प्रेरणा देंगे, साथ ही यह भी सिखाएंगे कि जब सनातन पर हमले हों तो उन्हें किस तरह से संघर्ष करते हुए अपने धर्म और धार्मिक स्थलों की रक्षा कर पुनर्स्थापित करना है।

तीसरे साल से कथा सिखाते हैं, गुरुकुल की तर्ज पर निशुल्क संचालित

गढ़ाकोटा में संस्कृत विद्यालय की स्थापना 2008 में पूर्व मंत्री भार्गव ने की। 2021 से इसने महाविद्यालय का रूप ले लिया। यह गुरुकुल की तर्ज पर चलता है। यहां रहना, पढऩा सबकुछ निशुल्क है। यहां के बटुक विदेशों में जाकर सनातन को आगे बढ़ाएं, इसके लिए यहां अंग्रेजी और कंप्यूटर की शिक्षा विशेष तौर पर दी जा रही है। प्रवेश लेने के तीसरे ही साल से कथा करना सिखाया जाने लगता है। पांचवें साल से ये बटुक पारंगत होना शुरू हो जाते हैं।

राज्यसेवा मुख्य परीक्षा आगे बढ़ा सकता है लोक सेवा आयोग

 इंदौर। मप्र लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) आने वाले महीनों में होने वाली कुछ परीक्षाओं के पूर्व घोषित कार्यक्रम में बदलाव कर सकता है। इनमें राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2023 के साथ ही प्रस्तावित राज्यसेवा प्रारंभिक परीक्षा 2024 भी है। अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा को आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सोमवार को उम्मीदवार ज्ञापन सौंपने भी पीएससी मुख्यालय पहुंचेंगे।

राज्यसेवा मुख्य परीक्षा 2023 मार्च में होता है। इस शेड्यूल में आने वाले आम चुनावों का कार्यक्रम खलल डालता दिख रहा है। मुख्य परीक्षा 11 मार्च से शुरु होना है। अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि इसकी तारीख आगे बढ़ाई जाना चाहिए। इस बीच पीएससी अपनी ओर से परीक्षा की तैयारी पूरी होने का दावा कर रहा है। हालांकि अंदर ही अंदर परीक्षा को आगे बढ़ाने पर सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है।

दरअसल लोकसभा चुनाव के आयोजन के लिए मार्च-अप्रैल में प्रशासनिक अमले से लेकर सरकारी मशीनरी तक व्यस्त हो जाएगी। ऐसे में पीएससी को परीक्षा केंद्र से लेकर पर्यवेक्षक, परीक्षक और सुरक्षा से लेकर निगरानी व व्यवस्था के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की टीमें भी मिलना मुश्किल हो जाएगी। अभ्यर्थी चाह रहे हैं कि उन्हें परीक्षा की तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल जाए।

पीएससी के सूत्रों के अनुसार अभ्यर्थियों की मांग के बीच आयोग की बैठक गुरुवार को होना संभावित है। इस बैठक में अन्य तमाम मुद्दों के साथ परीक्षा को रिशेड्यूल करने का एजेंडा भी रखा गया है। यानी इसी सप्ताह परीक्षा की तारीखों में परिवर्तन को लेकर ऐलान हो सकता है। इस बीच प्रारंभिक परीक्षा 2024 जो अप्रैल में आयोजित होना है उसे भी आगे बढ़ाया जा सकता है। इस परीक्षा की तारीख घोषित नहीं है। सिर्फ संभावित रूप से इस माह में परीक्षा होने की बात पीएससी ने घोषित की है।

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