भोपाल। कमलनाथ का बीजेपी में जाना निरस्त हुआ या अभी कहानी बाकी है, ये बाद में पता चलेगा, अभी तो उनका काफिला रुकने की कहानी चल रही है। और ये स्टोरी भी चलना शुरू हो गई है कि कांग्रेस छोड़ कर गए ज्योतिरादित्य सिंधिया के खास बड़े नेताओं की वर्तमान में क्या स्थिति और हैसियत है..?
फिलहाल ये लग रहा है कि कमलनाथ बीजेपी में शामिल नहीं हो रहे हैं। आज भोपाल में हुई कांग्रेस ले बैठक में कमलनाथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। जो कांग्रेसी कमलनाथ के जाने की आशंका से सहम गए थे, उनके चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ती दिख रही है।इसके साथ ही चर्चाएं ये भी चल रही हैं कि आखिर नाथ का कारवां थम कैसे गया?
चर्चा ही है। कमलनाथ एक से अधिक लोकसभा की सीटें मांग रहे थे। साथ ही जिन विधायकों को साथ ले जाने की कोशिश कर रहे थे, एक तो उनमें से कुछ लोगों ने इंकार ही कर दिया, दूसरे बाकी एमएलए को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। सिख दंगों का मामला भी सामने आ गया। अब ये नही कहा जा सकता कि सही बात क्या है? लेकिन कमलनाथ की कहानी के साथ सिंधिया को कहानी भी चलना शुरू हो गई है।
खबर ये आ रही है.. प्रदेश में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए 63 नेताओं में से केवल सात (7) नेताओं को मलाईदार पद मिले है, और बाकी 56 नेता हाशिए पर है। इनमें सिंधिया गुट के केवल 7 नेताओं को ही अहम जिम्मेदारी मिली है। बाकी नेता अभी भी वेटिंग में है। डबरा की पूर्व विधायक इमरती देवी ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथा बीजेपी में शामिल हुई थीं। उपचुनाव और 2024 विधानसभा चुनाव में हार गईं। कांग्रेस के दावे पर बोलीं कि बीजेपी में मेरा पूरा सम्मान हुआ। बिना मांगे लघु उद्योग निगम का अध्यक्ष बनाया। अब कोई पद नहीं है।
शिवपुरी जिले की रहने वाली पूर्व विधायक शकुंतला खटीक कहती हैं कि मैं तो सिंधिया जी के साथ बीजेपी में शामिल हुई थी। महाराज को सम्मान मिला, वो ही मेरे लिए बड़ी बात है। फिलहाल कोई जिम्मेदारी नहीं है।राकेश मावई केवल पूर्व विधायक हैं। कुल मिलाकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के नेता और प्रद्युम्न सिंह तोमर, तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत को ही अहम पद मिले है। इसके अलावा कई सिंधिया गुट के नेताओं को भी इस बार बीजेपी में ना तो कोई पद मिला और ना ही कोई जिम्मेदारी दी गई है।
