Shivpuri।करैरा तहसील के ग्राम बहगवां में भागवत कथा के भंडारे में पत्तल परोसने से रोका तो जाटव समाज के 40 परिवारों ने हिन्दू धर्म का त्याग करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया। हालाकि सरपंच का कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं, ग्रामीणों को बहला फुसला कर उनसे बौद्ध धर्म स्वीकार करवाया गया है। जानकारी के अनुसार ग्राम बहगवां में गांव के लोगों ने चंदा कर भागवत कथा का आयोजन करवाया था। कथा के भंडारे से एक दिन पहले 31 जनवरी को जाटव समाज के 40 परिवारों ने अचानक से बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया और हिंदू धर्म का परित्याग करने की शपथ ली।
महेंद्र बौद्ध का कहना है कि भंडारे में सभी समाजों को काम बांटे गए, इसी क्रम में जाटव समाज को पत्तल परोसने और झूठी पत्तल उठाने का काम सौंपा गया था, लेकिन बाद में किसी व्यक्ति ने यह कह दिया कि अगर जाटव समाज के लोग पत्तल परोसेंगे तो पत्तल खराब हो जाएगी। ऐसे में इनसे सिर्फ झूठी पत्तल उठवाने का काम करवाया जाए और अंत में गांव वालों ने कह दिया कि अगर आपको झूठी पत्तल उठाना है तो उठाओ, नहीं तो खाना खाकर अपने घर जाओ। बकौल महेंद्र बौद्ध इसी छुआछूत के चलते हम लोगों ने समाज को बौद्ध धर्म अपनाने को कहा और सभी लोगों ने बौद्ध धर्म अपना लिया।
गांव के सरपंच गजेंद्र रावत का कहना है कि आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उनके अनुसार जाटव समाज के लोगों ने एक दिन पूर्व ही अपने हाथ से केले का प्रसाद बांटा था जो पूरे गांव से लिया और खाया भी। गांव में बौद्ध भिक्षु आए थे, उन्होंने समाज के लोगों को बहलाफुसला कर धर्म परिवर्तन करवाया है। पूरे गांव में किसी भी तरह का काम किसी समाज विशेष को नहीं बांटा गया था, सभी ने मिलजुल कर सारे काम किए हैं। अन्य अजा समाज के लोगों ने भी परस करवाई, झूठी पत्तल उठाई हैं। गजेंद्र के अनुसार जाटव समाज द्वारा दिया गया चंदा वापस लेने के कारण गांव वालों ने उसकी पूर्ति के लिए दोबारा से चंदा भी किया है।

