Saturday, 11 April

उज्जैन। उज्जैन नगर निगम की कपिला गौशाला में चारे खरीदी के टेंडर में हुई अनियमितताओं की लोकायुक्त पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। तत्कालीन अपर आयुक्त आदित्य नागर को शोकॉज नोटिस मिला था। 

जानकारी के अनुसार लोकायुक्त ने निगम से चारा खरीदी के टेंडर सहित अन्य दस्तावेज मांगे हैं। टेंडर से जुड़े दस्तावेज देते हुए मनमाने दामों पर खरीदी तथा नियमों के विपरीत टेंडर मंजूर करने जैसे आरोप हैं।  गौशाला के लिए 2021-22 में चारा खरीदी के टेंडर को 80 लाख से बढ़ाकर 3.37 करोड़ कर दिया। गया। 2022-23 में चारे का बजट डेढ़ करोड़ रुपए ही था। पशु आहार का रेट 400 प्रतिशत बढ़ाकर मंजूरी दी गई। ठेकेदार के लिए टेंडर में मनमानी शर्तें रखकर नियमों का पालन नहीं किया गया था। नागर के निर्देशन में ही टेंडर तैयार हुआ था।

क्या है मामला

मामला जनवरी 2021 का है। नगर निगम की निविदा शाखा ने कपिला गौशाला में रहने वाली 700 गायों की खाद्य सामग्री के लिए टेंडर बुलाए। इसमें सूखा चारा, हरा चारा, नमक, गुड़, खली खरीदने के लिए 80 लाख रुपए का टेंडर जारी किया गया। इस प्रोसेस में 8 फर्म ने हिस्सा लिया। इनमें सभी फर्मों ने अपने-अपने हिसाब से रेट रखीं।

निगम को तीन अलग-अलग कंपनियों के रेट के आधार पर अलग-अलग खाद्य पदार्थों के लिए टेंडर देना चाहा, जबकि आने वाली फर्मों का कहना था कि अगर आपने टेंडर एक साथ बुलाए हैं, तो एक ही फर्म से सभी सामग्री खरीदिए। यह बात कहते हुए फर्मों ने शर्त मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद निगम ने एग्रीमेंट नहीं किया। इनकी सिक्योरिटी मनी भी जब्त कर ली।

टेंडर में सुसनेर की संस्कार एजेंसी ने भी हिस्सा लिया था। चूंकि एजेंसी की रेट बाकी फर्म के मुकाबले कम थीं। इसे देखते हुए 29 नवंबर 2021 को नगर निगम ने संस्कार एजेंसी को दिसंबर 2022 तक सप्लाई का टेंडर

दे दिया।

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