Monday, 13 April

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नया दांव खेल रहे हैं। प्रदेश में भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रमों का दौर तेज कर दिया गया है। सीएम एक एक दिन में हजारों करोड़ के भूमिपूजन कर रहे हैं और आधी अधूरी परियोजनाओं का लोकार्पण भी कर रहे हैं। केवल श्रेय लेने का मामला है। शिवराज को लग रहा है, सरकार नही बनी, तो दूसरे की नाम पट्टिका ना लग जाए। यहां खास बात ये है कि सीएम चीख चीख कर कह रहे हैं कि पैसे की कमी नहीं है, और कर्मचारियों को वेतन देने के लिए कर्ज लेने की बात कर रहे हैं। हर महीने हजार पांच सौ करोड़ का कर्ज लिया जा रहा है। तमाम विभागो में खर्च, भुगतान पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। 

मध्यप्रदेश में कभी भी चुनावी आचार संहिता लग सकती है। इसके बाद न तो कोई शिलान्यास, भूमिपूजन किया जा सकेगा, न ही उद्घाटन या लोकार्पण। ऐसे में प्रदेश में कई प्रोजेक्ट्स के उद्घाटन-लोकार्पण की बाढ़ सी आ गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रोज किसी न किसी प्रोजेक्ट का भूमिपूजन, उद्घाटन या लोकार्पण कर रहे हैं। खास बात यह है कि पिछले एक माह में जिन प्रोजेक्ट्स का मुख्यमंत्री ने उद्घाटन, लोकार्पण या शुभारंभ किया है, उनमें से कोई भी अभी तक पूरी तरह से वर्किंग कंडिशन में नहीं है।

एकात्म धाम, महाकाल लोक फेज-2, ग्लोबल स्किल पार्क हो या जबलपुर में बन रहा प्रदेश का सबसे लंबा फ्लाईओवर इन सब का लोकार्पण तो कर दिया गया, लेकिन ये सभी अधूरे हैं। ये वे प्रोजेक्ट हैं, जिनकी शुरुआत या निर्माण भाजपा की शिवराज सरकार ने किया था। काम पूरा नहीं होने के बाद भी आनन-फानन में इन्हें उद्घाटन लायक बनाकर सीएम ने फीता काटा।

– भोपाल, इंदौर मेट्रो स्टेशनों का काम 40 प्रतिशत अधूरा है, ट्रायल रन को ही हरी झंडी दिखा दी

–  जबलपुर फ्लाईओवर: 5.9 में से 1.2 किलोमीटर ही बना और सरकार ने लोकार्पण कर दिया

–  भोपाल में ग्लोबल स्किल पार्क का निर्माण का लोकार्पण कर दिया जबकि ये 40 प्रतिशत अधूरा है

–  2200 करोड़ के एकात्म धाम प्रोजेक्ट के अभी तक केवल 198 करोड़ रुपए के ही कार्य हो पाए हैं। मतलब करीब 9 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है।

–  महाकाल लोक फेज-2 का लोकार्पण, जबकि मंदिर के दोनों ओर से शिखर दर्शन का काम बाकी है

मीडिया सेंटर का भूमिपूजन

सीएम ने भोपाल में पत्रकार भवन को तुड़वाया, उसकी जगह मीडिया सेंटर का भूमि पूजन कर दिया। इसके लिए पूरे प्रदेश से पत्रकारों को बुलवाया गया। दस करोड़ से ज्यादा खर्च किए गए। कई घोषणाएं भी कर दीं। जबकि पत्रकार भवन का मामला अभी न्यायालय चल रहा है। उच्च न्यायालय ने सरकार को नोटिस दिया, डेढ़ साल बाद भी सरकार ने जवाब नही दिया। अब वहां भवन बन पाएगा या नहीं, ये तय नहीं है। हाई कोर्ट ने सरकार के खिलाफ फैसला दे दिया तो क्या होगा?

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