भोपाल। मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस दोनों राजनीति ओबीसी यानी पिछड़े वर्ग के नाम पर करती हैं, लेकिन क्या सही मायने में उस हिसाब से टिकट दिए जाते है। इस बार अभी तक जारी सूचियों पर नजर डालें तो निराशा ही हाथ लगती है। यही कारण है कि राहुल गांधी ने कांग्रेस की दूसरी सूची रोक ली थी। अब देखना होगा कि कांग्रेस अगली सूची में कितने ओबीसी और महिलाओं को टिकट देती है।
कांग्रेस ने अब तक कुल 144 सीटों पर कैंडिडेटों की घोषणा की है. कुल सीटों के जातिगत आधार पर बंटवारे को देखें तो कांग्रेस अपने पुराने प्यार पर ही ज्यादा मेहरबान दिख रही है. सभी जानते हैं कि कांग्रेस पार्टी का वोट बैंक सवर्ण -दलित और अल्पसंख्यक रहे हैं. इन्हीं के बल पर कांग्रेस ने कई दशक भारत पर राज किया.पर अब बिना पिछड़े वोटों के सत्ता प्राप्ति मुश्किल हो गई है. बीजेपी जैसी ब्राह्मण-बनियों की पार्टी ने भी अपना मेकओवर कर लिया और पिछड़ों की पार्टी बन गई ( हालांकि बीजेपी में भी सवर्णों को टिकट कम नहीं मिला है, पर बीजेपी जितनी आबादी-उतनी हिस्सेदारी की बात नहीं करती). देखा-देखी कांग्रेस ने भी बहुत जोर-शोर से पिछड़ा वोटों के लिए प्रयास शुरू किया. पर पार्टी की कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट दिख रहा है.
कांग्रेस ने जो उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है उसमें सबसे अधिक संख्या में सवर्ण ही दिख रहे हैं. प्रदेश में सवर्णों की आबादी अगर 15 से 20 प्रतिशत तक भी हो तो उनको आबादी के हिसाब से करीब दोगुना टिकट मिले हैं. लिस्ट में सवर्णों के बाद ओबीसी और एसटी-एससी समुदाय के कैंडिडेट दिखाई दे रहे हैं. अभी तक जारी कुल 144 उम्मीदवारों की सूची में सवर्ण समुदाय से करीब 52 प्रत्याशी दिखाई दे रहे हैं. सवर्णों में ठाकुर करीब 22, ब्राह्मण 18 और जैन 5 और 7 अन्य सवर्ण जातियों जैसे बनिया-कायस्थ आदि हैं. करीब 39 सीटों पर पिछड़ी जाति के उम्मीदवार हैं तो 30 सीटों पर अनुसूचित जनजाति को कैंडिडट्स को टिकट मिले हैं. 22 सीटों पर दलित समुदाय के प्रत्याशी हैं।
कांग्रेस ने पहली लिस्ट में सिर्फ एक मुस्लिम कैंडिडट का नाम दिख रहा है. पर कहा जा रहा है कि मुस्लिम इलाकों के उम्मीदवारों की अभी घोषणा नही हुई है. इसलिए अभी अल्पसंख्यकों को उनकी आबादी के अनुपात में पार्टी ने टिकट दिया या नहीं इसका आंकलन करना ठीक नहीं होगा. पार्टी की 144 प्रत्याशियों की सूची में 19 महिलाएं शामिल हैं.देखा जाए तो महिलाओं की संख्या भी बहुत कम है. देश की संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत के करीब महिला आरक्षण का प्रावधान किया गया पर अभी एक्जिक्यूट नहीं हो सका है. इसके हिसाब से देखा जाए तो महिलाओं को भी टिकट बंटवारे में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका है।
सवर्णों पर बीजेपी भी मेहरबान
मध्यप्रदेश में सवर्ण समुदाय पर कांग्रेस ही नहीं बीजेपी भी मेहरबान है. कांग्रेस के 52 सवर्ण कैंडिडेटों के मुकाबले बीजेपी ने करीब 48 की संख्या में सवर्ण जातियों को टिकट दिया है.भारतीय जनता पार्टी भी पिछड़ों का सबसे बड़ा हितैशी होने का दावा करती है. बीजेपी का कहना है कि मध्यप्रदेश में उमा भारती, सुंदर लाल पटवा, बाबू लाल गौर और शिवराज सिंह चौहान के रूप में उसने 4 मुख्यमंत्री ओबीसी समुदाय से बनाएं हैं. वैसे पटवा जैन थे, अब उन्हें बनिया की जगह अल्पसंख्यक मान सकते हैं। पर दोनों पार्टियों ने अभी तक जो टिकट बांटे हैं उसके आधार पर कांग्रेस बीजेपी से पिछड़ती नजर आ रही है. बीजेपी ने 136 टिकटों में से 40 प्रत्याशी ओबीसी समुदाय से आने वाले प्रत्या्शियों को टिकट दिए हैं तो कांग्रेस ने 144 सीटों में से 39 ओबीसी प्रत्याशी उतारे हैं। हालांकि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल कहते हैं कि बीजेपी ने तीन सीएम पिछले बीस सालों दिए, तीनों ओबीसी रहे हैं।
इधर कांग्रेस प्रवक्ता संतोष परिहार कहते हैं कि कांग्रेस का ओबीसी पर विशेष फोकस है। जहां तक टिकटों की बात है, तो असल में पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ जी ने जो सर्वे करवाया, उसके निष्कर्ष के आधार पर सूची तैयार की गई। हमारे नेता राहुल जी ने ओबीसी की बात की है, तो पूरी कांग्रेस उनके साथ है। उनके मार्गदर्शन में कांग्रेस प्रदेश में अगली सरकार बना रही है। हमारी सूची में बीजेपी से ज्यादा ओबीसी होंगे।
