भोपाल। आखिरकार भोपाल से सांसद प्रज्ञा ठाकुर का टिकट काट ही दिया गया। इसकी संभावना पहले ही जताई जा रही थी। अब राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुष्टि की जा रही है कि यदि कांग्रेस भोपाल से दिग्विजय सिंह को टिकट नहीं देती तो बीजेपी प्रज्ञा ठाकुर को राजनीति में नहीं लाती।
टिकट कटने के बाद प्रज्ञा ठाकुर का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमे उन्होंने टिकट कटने के।लिए मीडिया को जिम्मेदार ठहराया है। मीडिया में उनके नाथूराम गोडसे वाले बयान की चर्चा के बाद ही पीएम मोदी ने आलोचना की थी। तभी से लगने लगा था की उन्हें दोबारा टिकट नहीं मिलेगा।
प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ”मीडिया वाले विवादित बयान कहते थे लेकिन जनता इसे सच मानती है. हमारी जानता ने हमेशा मुझे सच कहा. विरोधियों के लिए यह हथियार बना. कहीं अगर हमारे मानदंडों से अलग कोई शब्द हो गया है तो माननीय प्रधानमंत्री जी को यह कहना पड़ा कि मन से माफ़ नहीं करेंगे. उसके लिए मैं पहले ही क्षमा मांग चुकी थी.”
”किसी के मन को ठेस पहुँचाने का मेरा कोई विचार नहीं रहता. प्रधानमंत्री मोदी जी के मन को कष्ट हुआ था, इसलिए उन्हें कहना पड़ा कि मन से माफ़ नहीं कर पाएंगे. मेरा इस प्रकार का कोई भाव नहीं था कि उनके मन को कष्ट पहुँचाऊं. उसके बाद मैंने कभी कष्ट पहुँचाया भी नहीं.”
वैसे भोपाल में चर्चा तो यही चल रही है कि सांसद के तौर पर प्रज्ञा ठाकुर सबसे फ्लॉप सांसद रहीं। विकास में योगदान शून्य ही रहा, उस पर बीच बीच में विवादित बयान भी आते रहे। या तो उनके बीमार होने की खबर आती थी या कहीं किसी खेल स्पर्धा के उद्घाटन की। वैसे उनकी उपलब्धि केवल एक रही कि दिग्विजय सिंह को भारी मतों से हराया। तो उसके लिए शायद स्वयं दिग्विजय और लोकसभा चुनाव में संप्रदाय के आधार पर बंटने वाली भोपाल की जनता जिम्मेदार रही।

