भोपाल। अठारह साल सीएम रहे शिवराज को मोदी शाह दूध में मक्खी की तरह निकाल कर फेकना चाह रहे थे, लेकिन अचानक शिवराज ही नहीं उनके खास सखा रहे आलोक शर्मा को भी लोकसभा टिकट दे दिया..! केवल राजधानी भोपाल ही नहीं कम से कम मध्य प्रदेश में तो ये वाक्य दोहराया जा रहा है।
क्या ये शिवराज की वापसी है..? क्या मोदी शाह को शिवराज से समझौता करना पड़ा है? या फिर कोई नई रणनीति पर काम किया जा रहा है? ये सवाल राजनीतिक गलियारों में उठाए जा रहे हैं। और तो और बीजेपी के अंदरखाने में भी इस मामले को आश्चर्य के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी की तैयारी ये थी कि शिवराज को अब घर बैठाया जायेगा। उन्हें हटाने के बाद कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। बमुश्किल एमएलए का टिकट दिया। मोहन यादव को सीएम बनाया गया। कुछ ही दिन बाद मोदी शाह की रणनीति बदल गई।
तो क्या जो बोला जा रहा है, वैसा नही है? यानी एनडीए को चार सौ पार का नारा सच हो रहा है या नहीं? ना झुकने वाले मोदी शाह कैसे झुक गए? और भी सवाल हैं। पार्टी के अंदर भी सवाल उठ रहे हैं, पर कोई बाहर नही बोल सकता। क्योंकि अभी राम लला ताजे ताजे हैं। वो पूरे देश में वोट तो दिलाएंगे ही। सो पार्टी नेता कुछ सोच कर बोलते हैं, ये नेताओं की नई रणनीति है।
लेकिन राजनीति के जानकार कहते हैं, हालात बहुत सकारात्मक नहीं हैं। जरूरत से ज्यादा मैनेज करना होगा जीतने के लिए। केवल जानत को नहीं, और भी बहुत कुछ…! इसी दिशा में काम हो रहा है।
सो पहले अपनी पार्टी के ही लोगों को मैनेज करें शुरुवात शिवराज से हुई है। आगे जायेगी। वैसे इस तेजी से बीजेपी कांग्रेस या अन्य दलों को तोड़ रही है, उसके मूल लोग परेशान हैं। विचारधारा खूंटी पर टांगी जा चुकी है। जब तक कोई विरोध में भ्रष्टाचार कर रहा है। रजिस्टर्ड भ्रष्ट पार्टी के भीतर आ गए। कोई डिप्टी सीएम बन गया तो किसी को राज्यसभा भेज दिया। अब अगर जनता हैं वक्त पर राम लला को भूल गई तो…? ये चिंता पार्टी के समर्पित लोगों की है।
खैर.. फिलहाल शिवराज खेमे में खुशी की लहर है। एमपी के सीएम मोहन यादव बमुश्किल पांव जमाने की कोशिश कर पा रहे थे कि ये झटका लग गया। वो समझ नही पा रहे हैं कि आखिर उन्होंने शिवराज और उनके खेमे के खिलाफ अभियान चला ही दिया है, वो भी नेतृत्व के इशारे पर, तो अब क्या करें? क्या शिवराज नेतृत्व पर ही भारी पड़ रहे हैं? तो लोकसभा चुनाव के बाद उनका क्या होगा..?
सवालों का जाल सबके इर्द गिर्द बनता जा रहा है। जवाब मोदी और शाह के पास ही है। फिलहाल सब असमंजस में हैं, आगे क्या होने वाला है। कही खुशी कहीं गम…। आगे क्या होगा देखेंगे हम…..

