हम भले ही इसे भारतीय नव वर्ष न मानें, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा लोग इसे ही नया वर्ष मानते हैं। और हमारे देश में भी इसे माना ही जाता है। मानें या न मानें, परंतु शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करने में कंजूसी नहीं करना चाहिए। लोग धड़ाधड़ शुभकामनाएं दे रहे हैं और ले भी रहे हैं। इसलिए हम भी आज अंगे्रजी नव वर्ष की शुभकामनाएं और बधाइयां देना अपना कर्तव्य समझते हैं।
परंतु केवल शुभकामनाओं भर से काम नहीं चलने वाला। हमें कुछ करना हो, तो उसके लिए आज से ही कुछ संकल्प लेने होंगे। इसके लिए आज का दिन बहुत शुभ माना जा सकता है। 2024 में, महीने का पहला दिन, सोमवार, और न्यू ईयर का पहला दिन भी एक ही दिन है। हम अपना सप्ताह सोमवार से भी प्रारंभ करते हैं, तो इस बार सोमवार से इस नए वर्ष का शुभारंभ करें। लाखों श्रद्धालु आज भगवान महाकाल के दरबार में पहुंचे हैं, नए वर्ष में शुभ दर्शन और अपने संकल्पों-कामनाओं को अपने आराध्य, अपने ईश्वर के सामने व्यक्त करने के लिए।
एक बार फिर, कोविड हमें बाहर जाने से रोक रहा है। मंदी दरवाजे पर खड़ी है और रोजगार के अवसर भी कम दिख रहे हैं, यहां तक कि प्रतिभाशाली छात्रों के लिए भी। आंकड़े गवाह हैं कि देश के प्रतिष्ठित कॉलेज से ग्रैजुएट होने वाले छात्रों का प्लेसमेंट पांच सालों से भी ज्यादा के निचले स्तर पर आ गया है। यह बेहद योग्य उम्मीदवारों के लिए भी भर्ती की मांग में कमी का संकेत है। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल ने बताया कि 2021 में 96 प्रतिशत , 2022 में 95 प्रतिशत की तुलना में इस साल 86 प्रतिशत छात्रों को ही नौकरी के ऑफर मिले हैं। आर्थिक अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए कई चयनकर्ताओं ने इस साल नौकरी के ऑफर टाले हैं। यही हाल स्टैनफोर्ड का है। अमेरिका-यूरोप में मेधावी छात्रों की मांग थमी है। इसलिए बेहतर यही होगा कि अगर आपके पास नौकरी है तो खुद को भाग्यशाली मानते हुए जब तक नौकरियों के बाजार पर छाई धुंध साफ नहीं हो जाती, कड़ा परिश्रम करते हुए नौकरी में बने रहें।
नए वर्ष की बात करते हैं और इस नव वर्ष की शुभ घड़ी में आप अपने लिए कुछ नए संकल्प ले सकते हैं। जो पिछले वर्ष में पूरे नहीं हुए, उन्हें फिर से अपनी सूची में शामिल कर सकते हैं। 2024 में जिन बातों पर आपको विचार करना चाहिए उनमें से एक है हर पहलू में दूसरों से आगे रहना। केवल बातें करने में नहीं, कुछ ठोस करने की सोचें और फिर उसे कर डालें। सोशल मीडिया पर समय बर्बाद ना करें, इसके सारे प्लेटफॉर्म एआई का प्रयोग कर रहे हैं और आपको जो पसंद है, वही बार-बार दे रहे हैं। वे आपको कभी नई चीज नहीं दिखाएंगे जो इस उम्र में आपको जानना जरूरी है। ऐसे प्लेटफार्म तलाशें, जो विविधता भरी सामग्री देने वाले हों। चाहे इनमें अखबार भी शामिल कर सकते हैं। नए कौशल के लिए छोटे-छोटे कदम लें। नई उपलब्धियों के लिए नई ऊर्जा के साथ नया काम करने की पहल कर सकते हैं।
कुछ हासिल करने के लिए पहले संकल्प लें और फिर उस पर पूरी ईमानदारी के साथ अमल करें। आज एक खबर आई है, नए वर्ष में ऐसे लोगों से हम प्रेरणा ले सकते हैं। इनमें एक हैं भारत की अक्षता कृष्णमूर्ति, उन्होंने इतिहास रच दिया है। अक्षता मंगल ग्रह पर अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के रोवर को संचालित करने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। अक्षता कहती हैं कोई भी सपना कभी भी बहुत बड़ा या पागलपन भरा नहीं होता। खुद पर विश्वास रखें। लक्ष्य पर निगाह टिकाए रखे। आप कड़ी मेहनत करेंगे तो वहां जरूर पहुंचेंगे।
अक्षता ने एमआईटी यानि मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पीएचडी की है। वह उन कुछ भारतीयों में से हैं, जो पूर्णकालिक अवसर के लिए नासा में शामिल हुई हैं। अक्षता की लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक वह नासा में प्रमुख इन्वेस्टिगेटर और मिशन विज्ञान चरण लीड हैं। नासा में पिछले पांच वर्षों से वह काम कर रही हैं। अक्षता ने अपनी प्रेरक यात्रा को इंस्टाग्राम पर साझा किया। उन्होंने बताया कि वह मंगल ग्रह पर रोवर को संचालित करने और पृथ्वी पर वापस लाने वाले नमूने इक_ा करने वाली पहली भारतीय नागरिक बनीं।
अक्षता की यात्रा 13 साल पहले शुरू हुई, जब वह नासा में काम करने का सपना लेकर अमेरिका पहुंची थीं। क्योंकि वह एक विदेशी नागरिक थीं, इस कारण उनके लिए यह लक्ष्य पाना बेहद मुश्किल था। लोगों ने उनसे कहा कि उनका सपना बेहद मुश्किल है, इसलिए वह कोई नया लक्ष्य बनाएं। हालांकि अक्षता ने किसी की नहीं सुनी और अपने लक्ष्य तक पहुंचने में डटी रहीं। उन्होंने लिखा, ‘रूढ्ढञ्ज में पीएचडी करने से लेकर नासा में पूर्णकालिक नौकरी पानी के लिए सैकड़ों दरवाजे खटखटाने तक, कुछ भी आसान नहीं था। आज मैं कई शानदार अंतरिक्ष मिशनों पर काम करती हूं, जिसमें पृथ्वी पर वापस लाने के लिए नमूने इक_ा करने वाला पर्सिवरेंस रोवर भी शामिल है।
ऐसे लोगों से प्रेरणा लेना हमारी आदत में शुमार होना चाहिए। हम नए वर्ष के पहले ही दिन ठान लें कि हमें कुछ नया करना है। वैसे तो हर दिन नया संदेश लेकर आता है, परंतु नए वर्ष का महत्व अलग होता है। हम पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ नए वर्ष का स्वागत करें और फिर जुट जाएं कुछ नया करने में। कुछ नई उपलब्धियां हमारी राह निहार रही हैं। कुछ नई मंजिलों का रास्ता बनाएं, तय करें और उन्हें हासिल करें।
– संजय सक्सेना

