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जानिए नागालैंड के बारे में

जानिए नागालैंड के बारे में

नागालैंड की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

नागालैंड में मूलतः नागा लोग निवास करते हैं। ये लोग जनजातीय हैं। नागा लोगों का सम्पर्क बारहवीं और तेरहवीं शताब्दी में अहोम लोगों से हुआ। उन्नीसवीं शताब्दी में यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन के आधिपत्य में आ गया 1957 तक यह क्षेत्र नागा हिल्स ट्वेनसांग के नाम से जाना जाता रहा। 1961 में इसका नाम नागालैंड कर दिया गया। नागालैंड को 1 दिसम्बर, 1963 में विधिवत राज्य का दर्जा दे दिया गया।

नागालैंड की भौगोलिक एवं आर्थिक स्थिति

नागालैंड उत्तर में अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम में असम, दक्षिण में मणिपुर एवं पूर्व से म्यांमार से घिरा हुआ है। यह प्रदेश पूर्व में 98° एवं 96° देशान्तर तथा भूमध्य रेखा के उत्तर में 26.6° तथा 27.4° अक्षांश के बीच बसा हुआ है। नागालैंड ब्रह्मपुत्र घाटी और बर्मा के बीच, पहाड़ी इलाके की संकरी पट्टी में बसा हुआ है। प्रदेश में रेल एवं जादू पर्वत हैं। सरामती [3,841 मी.), जाप्फ़ [3,014 मी.] एवं कोहिमा [1,444.12 मी.] पर्वत शिखर हैं। राज्य में झांसी, मेलक, दोयांग, दिखू, तीजू, धनसिरी नदियां प्रमुख हैं। प्रदेश का अधिकांश क्षेत्र पहाड़ी है।यहां चाम झील है। नागालैंड की लगभग 70 प्रतिशत जनता कृषि पर निर्भर है। प्रदेश में चावल, दालें, ज्वार, मक्का का उत्पादन किया जाता है। राज्य के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 75 प्रतिशत चावल होता है। चावल की खेती 70 प्रतिशत क्षेत्र में की जाती है। यहां झूम कृषि की जाती है। प्रदेश में हथकरघा, हस्तशिल्प, चीनी, सीमेंट, टी.वी.सेट, ईंट, रेशम सहित कई उद्योग हैं। यहां चूना-पत्थर, कोयला, बालूका, स्लेट, लौह-अयस्क, तांबा, ग्रेनाइट खनिज निकाले जाते हैं।

परिवहन

राज्य में सड़कों की लम्बाई 26,021 किमी. है। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग 494 किलोमीटर है। रेल लाइन की कुल‌‌ लम्बाई 13 किमी. है, जिसमें ब्राडगेज 11 किमी. व मीटरगेज दो किलोमीटर है। यहां एकमात्र रेलवे स्टेशन एवं हवाई अड्डा दीमापुर में है।

नागालैंड के पर्यटन स्थल

कोहिमा नागालैंड की राजधानी है। यहां का वातावरण प्राकृतिक है। यहां घूमने लायक जगहों में कोहिमा संग्रहालय, ओहिमा गांव, दो कोई घाटी, तुंग धाम गांव, माता भी क्या, राज्य की सबसे ठंडी जगह पफुतसेरो आदि हैं। कोहिमा से 15 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण में जाफू पीक है। यहां की पर्वत श्रृंखला में रोडोडेंड्रोन नामक वृक्ष मिलते हैं। इनकी ऊंचाई विश्व में सबसे अधिक है। इसलिए इनका नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स दर्ज है

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