Indian Semiconductor Mission: भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए इंडियन सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत निवेश की रफ्तार तेज होती दिख रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुमान के अनुसार, योजना के तहत पात्र कंपनियां वित्त वर्ष 2027 तक कुल ₹31,299 करोड़ का निवेश करेंगी। यह राशि योजना के अंतर्गत घोषित लगभग ₹1.65 लाख करोड़ के कुल निवेश का करीब 19 प्रतिशत है।
FY26 तक ₹15,799 करोड़ का निवेश हो चुका
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, FY26 तक पांच सेमीकंडक्टर कंपनियों ने मिलकर ₹15,799 करोड़ का निवेश किया है। वहीं FY27 में अतिरिक्त ₹15,500 करोड़ निवेश आने की उम्मीद जताई गई है।
सरकार ने यह योजना 2023 में शुरू की थी, लेकिन इसका वास्तविक क्रियान्वयन FY25 में तब तेज हुआ जब माइक्रोन (Micron) के गुजरात के साणंद स्थित ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging) प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली और कंपनी ने निवेश शुरू किया।
सरकार और राज्यों की साझेदारी से आगे बढ़ रही परियोजनाएं
इस योजना के तहत परियोजना लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा कंपनियों को निवेश करना होता है। बाकी 50 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करती है। इसके अतिरिक्त संबंधित राज्य सरकारें भी परियोजना लागत का लगभग 20 प्रतिशत तक सहयोग देती हैं।
FY25 और FY26 के दौरान पांच कंपनियों ने अपने प्रोजेक्ट्स में ₹5,692 करोड़ का प्रत्यक्ष निवेश किया, जबकि शेष राशि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उपलब्ध कराई गई।
किन कंपनियों के प्रोजेक्ट्स शामिल हैं?
योजना के तहत निवेश करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल हैं:
- माइक्रोन (Micron)
- सीजी पावर (CG Power)
- केन्स सेमिकॉन (Kaynes Semicon)
- टाटा समूह का धोलेरा फैब प्रोजेक्ट
- टाटा समूह का असम स्थित OSAT प्लांट
माइक्रोन ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। केन्स सेमिकॉन भी उत्पादन शुरू कर चुकी है। वहीं सीजी पावर का उत्पादन जुलाई 2026 में शुरू होने की उम्मीद है। टाटा समूह का असम स्थित OSAT प्लांट इस वर्ष के अंत तक चालू हो सकता है।
FY27 में मशीनरी पर होगा बड़ा खर्च
MeitY के अनुसार FY27 में कंपनियां सामूहिक रूप से लगभग ₹7,000 करोड़ का निवेश करेंगी, जबकि बाकी वित्तीय सहायता सरकार की ओर से आएगी।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सेमीकंडक्टर प्लांट की कुल लागत में मशीनों की हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत होती है। इसलिए परियोजनाओं के तीसरे और चौथे वर्ष में मशीनों की खरीद और स्थापना पर बड़े पैमाने पर निवेश देखने को मिलेगा। नवंबर में निवेश की समीक्षा भी की जाएगी और वास्तविक निवेश अनुमान से अधिक हो सकता है।
टाटा का धोलेरा फैब प्रोजेक्ट सबसे बड़ा निवेश केंद्र
योजना के अंतर्गत सबसे बड़ा निवेश टाटा समूह के गुजरात के धोलेरा स्थित फैब प्लांट में हो रहा है। इस परियोजना का कुल आकार लगभग ₹91,000 करोड़ है, जो पूरे घोषित निवेश का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा है।
यह प्लांट वर्ष 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है और भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता को नई दिशा दे सकता है।
12 परियोजनाओं को मिल चुकी है ₹76,000 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि
सरकार अब तक 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं के लिए ₹76,000 करोड़ से अधिक के प्रोत्साहन (Incentives) को मंजूरी दे चुकी है।
इन परियोजनाओं में शामिल हैं:
- 2 फैब (Fab) प्रोजेक्ट
- 10 OSAT प्लांट
हाल ही में सरकार ने दो नई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है, जिनमें एक मिनी/माइक्रो LED डिस्प्ले मॉड्यूल निर्माण इकाई और सुची सेमिकॉन (Suchi Semicon) का OSAT प्लांट शामिल है।
ISM 2.0 की तैयारी, बजट हो सकता है ₹1 लाख करोड़
सरकार अब इंडियन सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नई योजना का बजट लगभग ₹1 लाख करोड़ तक हो सकता है।
नई योजना का फोकस केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि फैब और OSAT इकाइयों के लिए जरूरी कच्चे माल और सप्लाई चेन इकोसिस्टम विकसित करने पर भी रहेगा। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना के तहत सेमीकंडक्टर उद्योग में उपयोग होने वाले उपकरणों के घरेलू उत्पादन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
भारत का सेमीकंडक्टर सपना अब जमीन पर उतरता दिख रहा
पिछले कुछ वर्षों तक भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में मुख्य रूप से आयात पर निर्भर था, लेकिन अब बड़े निवेश, सरकारी प्रोत्साहन और वैश्विक कंपनियों की भागीदारी से देश में चिप निर्माण का मजबूत आधार तैयार होता नजर आ रहा है। यदि मौजूदा परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
