अगर आप चाहते हैं कि आपका Income Tax Refund बिना अनावश्यक देरी के आपके बैंक खाते में पहुंचे, तो सिर्फ ITR भरना ही काफी नहीं है। रिटर्न दाखिल करते समय की गई छोटी-सी गलती भी प्रोसेसिंग और रिफंड दोनों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में कुछ जरूरी बातों की पहले से जांच कर लेना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। आयकर विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार समय पर और सही तरीके से ITR दाखिल करना तथा उसका ई-वेरिफिकेशन करना बेहद जरूरी है।
वित्त वर्ष से जुड़े आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय केवल जानकारी भरना ही पर्याप्त नहीं होता। यदि दस्तावेजों, बैंक खाते, टैक्स क्रेडिट या ई-वेरिफिकेशन में कोई गलती रह जाती है, तो रिटर्न की प्रोसेसिंग और टैक्स रिफंड मिलने में देरी हो सकती है। इसलिए ITR जमा करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों की जांच करना जरूरी है।
1. PAN-Aadhaar लिंक और प्रोफाइल की जानकारी जांचें
पहली बार ITR दाखिल करने वाले करदाता पहले आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर पंजीकरण करें। इसके बाद सुनिश्चित करें कि PAN और Aadhaar लिंक हैं तथा नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, ईमेल और पता जैसी जानकारी सही और अपडेट हो।
2. बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट करें और सही ITR फॉर्म चुनें
यदि आपका टैक्स रिफंड बनता है तो राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। इसलिए बैंक खाता पोर्टल पर प्री-वैलिडेट होना चाहिए और PAN से जुड़ा होना जरूरी है। साथ ही अपनी आय के स्रोत के अनुसार सही ITR फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म चुनने पर रिटर्न दोबारा दाखिल करने की जरूरत पड़ सकती है या प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है।
3. Form 26AS, AIS और TIS का मिलान करें
ITR दाखिल करने से पहले Form 26AS, Annual Information Statement (AIS) और Taxpayer Information Summary (TIS) में दर्ज आय, TDS, TCS और अन्य टैक्स क्रेडिट का मिलान जरूर करें। यदि कोई अंतर दिखाई देता है तो उसे पहले ठीक कर लें, ताकि बाद में नोटिस या रिफंड में देरी जैसी समस्या से बचा जा सके.
4. अंतिम तारीख का इंतजार न करें
विशेषज्ञ समय सीमा से पहले ITR दाखिल करने की सलाह देते हैं। इससे गलतियों को सुधारने का समय मिलता है और प्रोसेसिंग भी जल्दी शुरू हो सकती है। आकलन वर्ष 2026-27 के लिए पात्र व्यक्तिगत करदाताओं की सामान्य अंतिम तिथि फिलहाल 31 जुलाई 2026 है और अभी तक इसे बढ़ाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
5. ई-वेरिफिकेशन करना बिल्कुल न भूलें
ITR अपलोड करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। मौजूदा नियमों के अनुसार रिटर्न दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन या ITR-V जमा करना आवश्यक है। समय सीमा का पालन नहीं करने पर रिटर्न अमान्य माना जा सकता है और उसके परिणामस्वरूप रिफंड भी प्रभावित हो सकता है।
ITR Refund Status कैसे चेक करें?
रिफंड की स्थिति जानने के लिए आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें।
- e-File मेन्यू में जाएं।
- Income Tax Returns पर क्लिक करें।
- View Filed Returns चुनें।
- संबंधित असेसमेंट ईयर का चयन करें।
- यहां रिटर्न की प्रोसेसिंग और रिफंड स्टेटस देखा जा सकता है।
जरूरत पड़ने पर NSDL/TIN के रिफंड ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म पर PAN और असेसमेंट ईयर दर्ज करके भी स्थिति जांची जा सकती है।
