अगर किसी वित्तीय वर्ष के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की समयसीमा निकल गई है और उस दौरान आपके वेतन या अन्य आय पर TDS कट चुका है, तो इसका मतलब यह नहीं कि हर स्थिति में आपका रिफंड हमेशा के लिए खत्म हो गया। हालांकि रिफंड पाने के लिए सामान्य ITR प्रक्रिया की बजाय अलग कानूनी प्रावधान अपनाना पड़ सकता है।
क्या अपडेटेड ITR से मिलेगा TDS रिफंड?
कई लोग मानते हैं कि इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(8A) के तहत अपडेटेड ITR दाखिल करके रिफंड लिया जा सकता है। लेकिन नियम इसके विपरीत हैं।
धारा 139(8A) के तहत दाखिल किया जाने वाला Updated Return उन मामलों के लिए नहीं है, जिनमें करदाता टैक्स रिफंड का दावा करना चाहता हो या उसकी टैक्स देनदारी कम होकर रिफंड की स्थिति बन रही हो। इसलिए केवल TDS रिफंड लेने के उद्देश्य से Updated ITR दाखिल नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा किसी पुराने वित्तीय वर्ष का TDS अगले वर्ष की ITR में भी क्लेम नहीं किया जा सकता। प्रत्येक वर्ष का टैक्स उसी संबंधित असेसमेंट वर्ष की रिटर्न से जुड़ा होता है।
फिर क्या है कानूनी विकल्प?
ऐसी स्थिति में इनकम टैक्स एक्ट की धारा 119(2)(b) राहत का रास्ता उपलब्ध कराती है। इस प्रावधान के तहत Central Board of Direct Taxes (CBDT) विशेष परिस्थितियों में देरी से रिटर्न दाखिल करने की अनुमति दे सकता है।
यदि करदाता समय पर ITR दाखिल नहीं कर पाया और उसके पास उचित एवं वास्तविक कारण हैं, तो वह “Condonation of Delay” यानी देरी माफ करने के लिए आवेदन कर सकता है।
आवेदन मंजूर होने की प्रमुख शर्तें
- ITR समय पर दाखिल न कर पाने का उचित और प्रमाणित कारण होना चाहिए।
- बीमारी, दुर्घटना, गंभीर पारिवारिक या अन्य अपरिहार्य परिस्थितियों जैसे कारणों का उल्लेख किया जा सकता है।
- यह भी बताना होगा कि रिफंड नहीं मिलने से वास्तविक वित्तीय कठिनाई होगी।
- संबंधित प्राधिकारी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आवेदन पर निर्णय लेते हैं।
TDS रिफंड पाने की प्रक्रिया
पहला चरण: धारा 119(2)(b) के तहत देरी माफ करने के लिए आवेदन करें।
दूसरा चरण: संबंधित आयकर अधिकारी या सक्षम प्राधिकारी आवेदन की जांच करेगा।
तीसरा चरण: यदि देरी माफ कर दी जाती है, तो आदेश के आधार पर लंबित ITR दाखिल की जा सकती है।
चौथा चरण: रिटर्न स्वीकार होने के बाद TDS रिफंड की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।