अफ्रीका का शुतुरमुर्ग (Ostrich) सबसे बड़ा पक्षी है. यह अपने विशाल आकार के कारण बिल्कुल भी उड़ नहीं सकता. यह 2.4 मी. ऊंचा तथा वजन में 133 किग्रा. तक होता है. भारी वजन के कारण यह अपना शरीर हवा में उठा नहीं पाता. हम आपको बताते है शीर्ष 7 सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों की सूची के बारे में सबसे अधिक पंखों के विस्तार वाले पक्षियों के दो समूह हैं: एलबेट्रॉस (Albatross) और गिद्ध (Condors) ये दोनों ही उड़ सकते हैं. इन दोनों का वजन लगभग 13.5 किग्रा. होता है. 1. सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों की सूची में एलबेट्रॉस पहले…
Author: Shailja Dubey
हम यह भली भांति जानते हैं कि धातु के तारों द्वारा विद्युत एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से जा सकती है. प्रकाश भी ठीक उसी प्रकार तारों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है, लेकिन धातु के तारों में से नहीं. प्रकाश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए कांच के तंतु (Fibres) प्रयोग में लाए जाते हैं. ये तंतु बहुत बारीक होते हैं. विज्ञान की वह शाखा जिस में प्रकाश के द्वारा संचरण का अध्ययन किया जाता है, तंतु प्रकाशको या फाइबर ऑप्टिक (Fibre Optics) कहलाती है. ब्रिटेन…
मूलरूप से आग का लगना एक रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें ऊष्मा और प्रकाश पैदा होते हैं. आग जलने के लिए तीन चीजों का होना आवश्यक है-ईंधन, आक्सीजन या वायु तथा ऊष्मा, जो ईंधन का तापमान ज्वलनांक तक बढ़ा सके. आग बुझाने के लिए इन तीनों कारणों में से किसी एक या एक से अधिक कारणों को नष्ट करना होता है, अर्थात् आग बुझाने के लिए या तो जलते हुए ईंधन का तापमान कम कर दिया जाए या आक्सीजन या वायु की सप्लाई काट दी जाए या जलने वाले ईंधन को ही समाप्त कर दिया जाए. सभी प्रकार के अग्निशामक इन्हीं…
पोलारॉयड कैमरा (polaroid camera) एक ऐसा कैमरा है, जो मिनट भर किसी भी वस्तु का फोटो तैयार कर देता है. इससे साथ के साथ ही पोजिटिव प्रिंट तैयार हो जाते हैं. इसका आविष्कार अमेरिका के एडविन एच लैंड ने किया था. पहला कैमरा बाजार में बिकने के लिए सन् 1948 में आया. इस समय इससे केवल श्वेत और काले (Black and White) फोटो ही खींचे जा सकते थे. बाद में ऐसे कैमरे भी विकसित हो गए, जिनसे रंगीन चित्र भी खींचे जा सकते हैं. पोलारॉयड कैमरा की रील यानी फिल्म दोहरी होती है. इसका एक हिस्सा नेगेटिव बनाने का काम…
सन् 1960 में अमेरिका के खगोलशास्त्री ए. आर. ससेनडेगे (A.R. Sandage) ने बाह्य अंतरिक्ष में कुछ नये खगोलीय पिंडों का पता लगाया है, जिन्हें क्वासर (Quasars) या क्वासी स्टैलर सोर्सेज या क्वासी स्टैलर ऑबजेक्ट (QSO) कहते हैं. इन पिंडों के चित्र तारों से मिलते-जुलते हैं, लेकिन वास्तव में ये तारे नहीं हैं. इनकी एक विशेषता यह है कि इनके स्पैक्ट्रम में रेड शिफ्ट देखने को मिलती है. चित्र में ये तारों की भांति इसलिए दिखते हैं, क्योंकि इनके कोणीय व्यास लगभग एक आर्क सेकेंड के बराबर होते हैं. इतने छोटे कोणीय व्यास को हमारे दूरदर्शी रिजौल्व नहीं कर पाते, क्योंकि…
मास स्पेक्ट्रोग्राफ (Mass Spectrograph) पदाथों के विश्लेषण के लिए काम आने वाला बहुत ही उपयोगी उपकरण है. इससे किसी पदार्थ में उपस्थित विभिन्न प्रकार के अणुओं और परमाणुओं का तो पता चलता ही है, साथ ही उनकी मात्रा का भी पता लग जाता है. विद्युत और चुंबकीय बलों द्वारा इस यंत्र में विभिन्न द्रव्यमानों के आयनों को अलग कर लिया जाता है. पदार्थ विश्लेषण के इस यंत्र का अपना ही महत्व है. मास स्पेक्ट्रोग्राफ किस प्रकार कार्य करता है? सबसे पहला मास स्पेक्ट्रोग्राफ ब्रिटेन के वैज्ञानिक विलियम फ्रांसिस आस्टन ने विकसित किया था. उन्हें इस विकास के लिए सन् 1922…
माइक्रोफोन (Microphone) एक ऐसा यंत्र है, विद्युत-संकेतों में जो ध्वनि तरंगों को बदल देता है. ये संदेश फिर दूर स्थानों तक संचरित किए जा सकते हैं और दूर स्थान पर फिर इन्हें ध्वनि तरंगों में परिवर्तित किया जा सकता है. रेडियो और टेलीविजन केंद्रों पर संदेश संचरण व्यवस्थाओं में माइक्रोफोनों को प्रयोग किया जाता है. इनके द्वारा ध्वनि-संदेशों को विद्युत धारा में बदलकर दूरस्थ स्थानों तक संचरित किया जाता है. जनता को भाषण देने वाली पद्धतियों तथा सिनेमाघरों में भी माइक्रोफोनों से यही काम लिया जाता है. क्या आप जानते हो की माइक्रोफोन ध्वनि को विद्युत तरंगों में कैसे बदल…
मनुष्य हजारों वर्षों से साबुन और पानी को धुलाई के लिए इस्तेमाल करता आ रहा है. सबसे पहले साबुन लगभग 5000 वर्ष पहले मध्य-पूर्वी देशों में बनाया गया था. साबुनरहित डिटर्जेंटों का आविष्कार बहुत पुराना नहीं हैं. विश्लेषित डिटर्जेंट का आविष्कार सन् 1916 में हुआ था. तब से साबुनरहित डिटर्जेंटों का निर्माण पेट्रोकेमीकल उद्योग का एक मुख्य अंग बन गया इनके विकास के साथ कपड़े धोने के नये तरीकों के विकास में भी क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं. सूखी धुलाई भी इन तरीकों में से एक है. ड्राइक्लीनिंग (Dry-cleaning) कैसे की जाती है ? ड्राइक्लीनिंग कपड़े धोने का ऐसा तरीका है,…
माचिस (Matchbox) की तीलियां लकड़ी या कार्डबोर्ड के मोम लगे कागज से बनाई जाती है, टुकड़ों या जिनके एक सिरे पर कुछ ज्वलनशील पदार्थों का मिश्रण लगा होता है. इन्हें आग पैदा करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है. माचिस की तीली के मसाले लगे सिरे को जब किसी खुरदरी सतह या माचिस के रसायन लगे तल से रगड़ा जाता है, तो एकदम आग पैदा होती है, जिससे तीली जल उठती है. क्या आप जानते हो कि माचिस की तीली के सिरे पर कौन से पदार्थ प्रयोग में लाए जाते हैं? माचिस उद्योग में लाल फासफोरस सबसे अधिक प्रयोग…
आज की दुनिया 100 वर्ष तो क्या 50 वर्ष पहले तक की दुनिया से अधिक चमकीली और रंगीन दिखाई देती है. इस रंगीनी का कारण विभिन्न प्रकार के रंगों का विकास है. रंगों के विकास के कारण ही आज हमें अनेक रंगों के कपड़े देखने को मिलते हैं. क्या आप जानते हैं कि ये रंग क्या हैं और कैसे बनाए जाते हैं? पिछली शताब्दी के मध्य तक हमारे उपयोग के लिए कुछ ही रंग उपलब्ध थे. ये रंग पौधों और फूलों से प्राप्त होते थे. उस समय तक नील के पौधे से नीला रंग प्राप्त किया जाता था. मैडर नाम…
