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Plato: प्लेटो कौन था ?

महान् दार्शनिक प्लेटो जिसे अफलातून भी कहते थे प्लेटो के विचारों को आज भी रूचि से पढ़ा जाता है

Plato: प्लेटो कौन था ?


Plato
Plato – प्लेटो

प्लेटो (Plato) यूनान का एक प्राचीन दार्शनिक था,जिसकी शिक्षाओं और लेखों का आज भीबहुत महत्व है. प्लेटो को अफलातून भी कहते हैं. इसमहान् विचारक की रचनाएं सारे संसार में बड़ी रुचि सेपढ़ी जाती हैं. वह सुकरात (Socrates) का शिष्य और अरस्तू (Aristotle) का गुरु था. वास्तव में सुकरात केमहान् विचारों को ही उसके शिष्य प्लेटो ने अपनीरचनाओं में लिखा है. अरस्तू (Aristotle) की प्रतिभाको विकसित करने का श्रेय भी प्लेटो को जाता है.

प्लेटो का जन्म ईसा से 427 वर्ष पहले यूनान के एथेंस नगर में हुआ था. वह एक धनवान और कुलीनपरिवार का था. बीस वर्ष की आयु में वह सुकरातका शिष्य बना. जब सुकरात को 399 ईसा पूर्व जहरदेकर मृत्युदंड दिया गया, प्लेटो को बहुत दुख पहुंचा.वह एथेंस नगर छोड़ कर चला गया और कुछ वर्षोंतक यात्राएं करता रहा. यात्राओं से लौट कर आने केबाद उसने एथेंस में 388 ईसा पूर्व अपनी प्रसिद्धअकादमी (Academy) स्थापित की जिसे विश्व काप्रथम विश्वविद्यालय माना जाता है.

प्लेटो ने बहुत से विषयों पर अपने विचार प्रकटकिए हैं. लेकिन शिक्षा, न्याय, आदर्श राज्य और आदर्शशासक विषयों पर प्रकट किए गए उसके विचारों परआज भी बुद्धिमान लोग गहराई से आपस में बहसकरते हैं, उसके अनुसार दर्शनशास्त्र (Philosophy)सबसे अधिक महत्व का विषय है और उसकीजानकारी के बिना कोई भी शिक्षा पूरी नहीं होती. उसनेदार्शनिकों के शासन की वकालत की. उसका कहनाथा, “या तो दार्शनिकों को राजा होना चाहिए या राजाओंको दार्शनिक होना चाहिए, ” उसके विचारों के अनुसारअपने कर्तव्यों को पूरा करना ही न्याय है. आदर्शराजाओं के पास न तो कोई निजी संपत्ति होनी चाहिए और न उन्हें विवाह करना चाहिए. उसका कथन थाकि वास्तविक संसार के अलावा एक आदर्श संसारहोता है जो वास्तविक संसार से परे होता है और उसकाअनुभव व्यक्ति अपने मन में कर सकता है. व्यक्तिको चाहिए कि वह अपने वास्तविक संसार को अपनेआदर्श संसार के निकट लाने का प्रयत्न करता रहे.

प्लेटो के पढ़ाने का दूसरा रोचक पहलू यह थाकि वह अकादमी में जो व्याख्यान देता था, उनकोलिखित रूप में कभी नहीं बांटता था क्योंकि उसे भयथा कि बाहरी लोग उसके विचारों को सही रूप मेंनहीं समझ सकेंगे.

उसका तर्क था कि व्यक्ति को वाद-विवाद मेंअपने विचारों को सही सिद्ध करने के लिए कहने काअवसर मिल जाता है लेकिन लिखने के बाद वह यहअवसर नहीं पा सकता. यही कारण है कि जब उसनेअपने विचारों को लिखना शुरू किया तो उन्हें बातचीतया वार्तालाप के रूप में रखा ताकि उसके अपने विचारोंके अलावा दूसरों के दृष्टिकोण भी उनमें आ सकें.उसकी पुस्तकों में सबसे प्रसिद्ध द रिपब्लिक (TheRepublic) है. इसमें आदर्श राज्य की आवश्यकताओंके बारे में वार्तालाप है. इस महान् दार्शनिक की मृत्यु 80वर्ष की आयु में एथेंस नगर में हुई.

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