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कोदो-कुटकी के उत्पादों की फाइव स्टार होटलों में ब्रांडिंग करेगी सरकार

कोदो-कुटकी के उत्पादों की फाइव स्टार होटलों में ब्रांडिंग करेगी सरकार



भोपाल ।   गेहूं, धान, चना, सोयाबीन, मूंग आदि फसलों के साथ-साथ प्रदेश में अब किसान मोटे अनाज खेती की ओर भी अग्रसर हो रहे हैं। खास तौर पर कोटो-कुटकी का क्षेत्र बढ़ रहा है। सरकार भी मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहित कर रही है क्योंकि इसमें लागत कम होती है। कोटो-कुटकी के उत्पादों की फाइव स्टार होटलों में ब्रांडिंग की कार्ययोजना बनाई गई है। स्कूलों में मध्यान्ह भोजन में लड्डू, बर्फी, बिस्कुट आदि दिए जा रहे हैं जो जल्द ही भोपाल में फूड फेस्टिवल भी आयोजित होने वाला है। कृषि विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के साथ प्रशिक्षण दिया जाए। स्कूलों में भी कार्यक्रम हों। उधर, राज्य आजीविका मिशन ने किसान उत्पादक समूह बनाकर उपज खरीदने की व्यवस्था बनाई है ताकि किसानों को परेशान न होना पड़े। प्रदेश के डिंडौरी, मंडला, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, सीधी, सिंगरौली, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, होशंगाबाद, मुरैना, भिंड जिले में कोटो-कुटकी, बाजरा और ज्वार की खेती होती है। सरकार बाजरा दो हजार 350 और ज्वार दो हजार 970 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर खरीद रही है पर कोटो-कुटकी के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इसका समर्थन मूल्य भी नहीं है। किसान उपज बेचने में परेशान न हो, इसलिए राज्य आजीविका मिशन ने कोदो-कुटकी के लिए मंडला, डिडौंरी, सीधी और सिंगरौली में उत्पादक समूह बनाए हैं। वहीं, बाजरा के लिए छिंदवाड़ा और मुरैना में समूह बने हैं। कोदो-कुटकी 25 से 35 रुपये किलोग्राम की दर से समूह खरीदते हैं और उसे स्व-सहायता समूहों को देते हैं जो लड्डू, बरफी, कुकीज, बिस्कुट सहित अन्य उत्पाद तैयार करते हैं। इससे रोजगार के अवसर भी बन रहे हैं। पांच हजार से ज्यादा महिला स्व-सहायता समूह इसमें काम कर रहे हैं। इनके द्वारा तैयार उत्पाद को पूरक पोषण आहार के तौर पर आंगनबाड़ी और स्कूलों में मध्या- भोजन में दिया जाता है। सरकार अब इसकी ब्रांडिंग फाइल स्टार होटलों और माल में उत्पाद उपलब्ध कराकर करने जा रही है। इसके लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ मिशन भी प्रयास कर रहा है। मिशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एमएल बेलवाल का कहना है कि किसानों ने धान आदि फसलों में अधिक लाभ होने के कारण मोटे अनाज की खेती कम कर दी थी पर अब इनकी मांग बढ़ रही है। कोदो-कुटकी के प्रसंस्करण के लिए इकाइयां लगाई जा रही हैं और अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि इनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग हो जाए। इसके लिए विभिन्न संस्थाओं के साथ अनुबंध भी किए जा रहे हैं।

77 हजार टन कोदो-कुटकी का हुआ उत्पादन

प्रदेश में कोदो-कुटकी का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2021-22 में 77 हजार टन उत्पादन हुआ। जबकि, यह 2018-19 में 57 हजार टन था। 2019-20 में 73 हजार और 2020-21 में 70 हजार टन रहा। वहीं, क्षेत्र की दृष्टि से देखें तो इस वर्ष कोदो-कुटकी की खेती एक लाख 56 हजार हेक्टेयर में की गई है। यह अब तक का सर्वाधिक क्षेत्र है। इसके पहले यह अधिकतम 82 हजार हेक्टेयर तक रहा है। इसी तरह ज्वार का क्षेत्र डेढ़ लाख हेक्टेयर हो गया है, जो 2018-19 में 75 हजार हेक्टेयर था। उत्पादन भी वर्ष 2021-22 में दो लाख 41 पहुंच गया। यह 2018-19 में एक लाख 63 हजार टन था। बाजरा की खेती किसान साढ़े तीन लाख हेक्टेयर में कर रहा हैं। इसका उत्पादन वर्ष 2021-22 में आठ लाख 69 हजार टन रहा। यह 2018-19 में छह लाख 28 हजार था। इस वर्ष अभी तक 187 टन ज्वार समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है।

मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहन करने लगेंगे किसान चौपाल

उधर, कृषि विभाग ने आगामी वर्ष को मिलेट मिशन घोषित किए जाने के बाद किसानों को मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहित करने किसान चौपाल लगाने का निर्णय किया है। विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर कहा है कि किसान मित्र, दीदी और आत्मा परियोजना के कार्यकर्ताओं से किसानों को प्रशिक्षित कराएं। प्रसंस्करण इकाइयों से जुड़ा प्रशिक्षण भी दिलाया जाए।



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