Tuesday, 9 June

मां की मौत के बाद पिता पर बच्चों से मारपीट करने का आरोप, फिलहाल चाचा की देखरेख में सौंपे गए बच्चे

ग्वालियर। पिता की कथित शराबखोरी और रोजाना होने वाली मारपीट से परेशान होकर पांच मासूम भाई-बहनों ने मंगलवार सुबह घर छोड़ दिया। सभी बच्चे पैदल चलते हुए आरोन क्षेत्र से घाटीगांव के पास आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच गए। तेज धूप में नंगे पैर और डरी-सहमी हालत में भटक रहे बच्चों को देखकर घाटीगांव पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।

पुलिस के अनुसार, पांचों बच्चे हाईवे पर बिना किसी अभिभावक के घूमते हुए मिले थे। उनकी स्थिति संदिग्ध लगने पर घाटीगांव थाना प्रभारी पूरन शर्मा और पुलिस मोबाइल टीम ने तत्काल वाहन रोककर बच्चों से पूछताछ की। इसके बाद उन्हें सुरक्षा के साथ थाने लाया गया।

पांच साल पहले हो चुका है मां का निधन

थाने में बच्चों ने पुलिस को बताया कि उनकी मां का करीब पांच वर्ष पहले निधन हो गया था। इसके बाद से उनके पिता शराब के नशे में अक्सर उनके साथ मारपीट करते थे। बच्चों का कहना था कि लगातार हो रही प्रताड़ना और डर के कारण उन्होंने घर छोड़ने का निर्णय लिया।

पुलिस के मुताबिक, पांचों भाई-बहनों में सबसे बड़ा बच्चा 12 वर्ष का है, जबकि सबसे छोटी बच्ची की उम्र मात्र छह वर्ष है। कम उम्र में इस तरह घर छोड़ने की घटना ने बच्चों की सुरक्षा और पारिवारिक परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

थाने में कराया भोजन, नए जूते-चप्पल भी दिलाए

घाटीगांव पुलिस ने बच्चों को थाने लाने के बाद सबसे पहले उनके भोजन की व्यवस्था की। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बच्चे नंगे पैर थे और उनके पैरों की हालत भी ठीक नहीं थी। इसे देखते हुए उन्हें नए जूते-चप्पल उपलब्ध कराए गए।

इसके साथ ही पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए बच्चों के परिजनों की जानकारी जुटाना शुरू किया और उनके दादा-दादी से संपर्क स्थापित किया।

आवश्यक प्रक्रिया के बाद परिवार को सौंपे जाएंगे बच्चे

थाना प्रभारी पूरन शर्मा ने बताया कि फिलहाल पांचों बच्चों को उनके चाचा की देखरेख में रखा गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों के परिजनों के थाने पहुंचने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उन्हें परिवार के सुपुर्द किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि समय रहते पुलिस टीम की नजर बच्चों पर पड़ गई, जिससे उन्हें सुरक्षित बचाया जा सका। यदि बच्चे लंबे समय तक हाईवे पर भटकते रहते तो उनके साथ कोई अप्रिय घटना भी हो सकती थी।

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