Monday, 25 May

हरदा (सिराली)। नगर परिषद सिराली क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध प्लॉटिंग के काले कारोबार ने सैकड़ों मजदूर परिवारों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। सस्ते प्लॉट और पक्के मकान का हसीन सपना दिखाकर कॉलोनाइजरों ने गरीब परिवारों की जिंदगी भर की जमा-पूंजी ठग ली। अब हालत यह है कि नगर परिषद के रिकॉर्ड में इन कॉलोनियों को ‘अवैध’ घोषित कर दिया गया है। इसका सबसे दर्दनाक असर यह हुआ है कि पूरी तरह पात्र होने के बावजूद इन गरीब परिवारों को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) के लाभ से वंचित कर दिया गया है, जिससे उनके अपने घर का सपना पूरी तरह टूट चुका है।

सस्ते प्लॉट का झांसा और दांव पर लगी जिंदगी की कमाई

पिछले कई वर्षों से सिराली और उसके आसपास के क्षेत्रों में बिना किसी प्रशासनिक अनुमति और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की मंजूरी के कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां काटने का खेल धड़ल्ले से खेला गया।
स्थानीय कॉलोनाइजरों ने सीधे-साधे मजदूरों और दैनिक वेतनभोगियों को अपना शिकार बनाया। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि रजिस्ट्री होते ही कॉलोनी जल्द ही वैध हो जाएगी और सभी सरकारी सुविधाएं मिलेंगी। इस खोखले वादे पर भरोसा करके किसी ने ब्याज पर कर्ज लिया, तो किसी ने अपनी जीवनभर की गाढ़ी कमाई दांव पर लगा दी।
आज जमीनी हकीकत बेहद खौफनाक है। जिन कॉलोनियों के लिए लोगों से लाखों रुपये वसूले गए, वहां सड़क, नाली, बिजली और साफ पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। लोग कच्चे और अस्थाई मकानों में रहने को मजबूर हैं और हर महीने भारी-भरकम कर्ज की किस्तें चुका रहे हैं।

पीएम आवास योजना का नियम बना गरीबों के लिए मुसीबत

इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब इन पीड़ित परिवारों ने पक्के मकान के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वित्तीय सहायता के लिए आवेदन किया।
नगर परिषद सिराली ने नियमों का हवाला देते हुए इन आवेदनों को यह कहकर ठंडे बस्ते में डाल दिया कि अवैध घोषित की गई कॉलोनियों में सरकारी योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता।

“हमने अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए पेट काटकर जमीन खरीदी थी ताकि किराए के मकान से मुक्ति मिल सके,” एक पीड़ित ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा। “जमीन की रजिस्ट्री हमारे नाम पर है, लेकिन नगर परिषद कहती है कि हमारी कॉलोनी का कोई कानूनी अस्तित्व ही नहीं है। कॉलोनाइजर पैसे लेकर गायब हैं, और सजा हमें भुगतनी पड़ रही है।”

प्रशासनिक अनदेखी पर उठते बड़े सवाल
अब इस पूरे मामले में नगर परिषद सिराली और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब यह अवैध खेल सालों तक चल रहा था, तब जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आवासीय कॉलोनी को वैध करने के लिए टाउन प्लानिंग और स्थानीय निकाय से एनओसी (NOC) लेना अनिवार्य होता है। कॉलोनाइजर अक्सर गरीबों की अज्ञानता का फायदा उठाते हैं और केवल जमीन की रजिस्ट्री को ही कानूनी वैधता का प्रमाण बताकर उन्हें गुमराह कर देते हैं।

​भविष्य की राह: अब आगे क्या?

​सिराली का यह मामला सिर्फ एक रियल एस्टेट का फ्रॉड नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र की नाकामी का एक बड़ा उदाहरण है। जब समय रहते अवैध निर्माण और प्लॉटिंग को नहीं रोका जाता, तो उसका खामियाजा समाज के सबसे गरीब तबके को भुगतना पड़ता है।

वर्तमान में पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में नगर परिषद और तहसील कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। अब गेंद सिराली नगर परिषद और जिला प्रशासन के पाले में है। प्रशासन को या तो इन जालसाज कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कर उनकी संपत्तियां कुर्क करनी होंगी, या फिर मानवीय आधार पर कोई विशेष नीति बनाकर इन निर्दोष मजदूरों को उनके आशियाने का हक दिलाना होगा।

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