HomeOpinion

नए वादों के साथ मजबूत होते भारत-ब्रिटेन संबंध

नए वादों के साथ मजबूत होते भारत-ब्रिटेन संबंध

India Britain flag
एक रिपोर्ट के मुताबिक इकॉनमी के आकार में भारत 2025 में ब्रिटेन से, 2027 में जर्मनी से और 2030 में जापान से आगे होगा. संभवतः यही वजह है कि ब्रिटेन भारत से ट्रेड डील को लेकर गंभीर है, साथ ही कोविड-19 के बुरे दौर में भारत का हाथ मजबूती से पकड़े हैं.
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने वर्चुअल शिखर वार्ता के दौरान 10 सालों का महत्वकांक्षी रोडमैप लॉन्च कर दोनों देशों के रिश्ते को मिठास से भर दिया है. दोनों प्रधानमंत्रियों ने कहा है कि 2030 तक आपसी संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदलना उनकी शीर्ष प्राथमिकता में होगा. दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य, शिक्षा में सहयोग के साथ मौजूदा द्विपक्षीय कारोबार को दोगुना करने और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर तालमेल बढ़ाने पर सहमति जताई है.

कोविड महामारी में भारत को त्वरित सहायता करने वाले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भरोसा दिया है कि भारत के पढ़े-लिखे पेशेवरों के लिए उनका दरवाजा अब पहले से ज्यादा खुलेगा. उन्होंने अगले दो सालों में 3000 प्रशिक्षित भारतीयों को रोजगार देने की बात कही है. शिखर वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच नौ अहम समझौते हुए हैं जिससे दोनों देशों के आर्थिक कारोबार का नए क्षितिज पर पहुंचना तय है. इन समझौतों में एक महत्वपूर्ण समझौता मुक्त व्यापार समझौता है, जिसे लेकर दोनों देश बेहद उत्सुक हैं। इस मसले पर दोनों देशों के उद्योग और वाणिज्य मंत्रालयों के प्रतिनिधि बातचीत कर आगे की राह तय करेंगे. यह समझौता कितना महत्वपूर्ण है इसको इसी बात से समझा जा सकता है कि गत जनवरी में ब्रिटेन के दक्षिण एशिया मामलों के मंत्री लॉर्ड तारिक अहमद ने कहा था कि भविष्य में होने वाला मुक्त व्यापार समझौता भारत और ब्रिटेन के आर्थिक कारोबार के लिए अहम होगा. उन्होंने स्पष्ट कहा कि हमारा अंतिम लक्ष्य मुक्त व्यापार समझौते को मूर्तरूप देना है. गौरतलब है कि मुक्त व्यापार करार के तहत व्यापार में दो भागीदार देश आपसी व्यापार वाले उत्पादों पर आयात शुल्क में अधिकतम कटौती करते हैं. चूंकि भारत ने हमेशा से ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के देशों के साथ व्यापार के मामले में एक ‘मुख्य द्वार’ के रूप में देखा है ऐसे में मुक्त व्यापार समझौता न केवल ब्रिटेन बल्कि भारत के लिए भी फायदे का सौदा होगा. एक अन्य दूसरा समझौता माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप से संबंधित है, जो भारत के प्रशिक्षित लोगों को ब्रिटेन जाने की राह सुगम करेगा. बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद से निपटने, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी का समर्थन, पर्यावरण रक्षा उपकरणों व अत्याधुनिक हथियारों का साझा उत्पादन तथा अफगानिस्तान के हालात जैसे अन्य कई मसलों पर गंभीरता से चर्चा की.

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में आर्थिक अपराध कर ब्रिटेन में छिपे नीरव मोदी और विजय माल्या के प्रत्यर्पण का भी मसला उठाया अच्छी बात है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक कारोबार बढ़ाने के संकल्प के बीच भारत की 20 भारतीय कंपनियों समेत सबसे बड़ी वैक्सीन बनाने वाली भारतीय कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ब्रिटेन में 2400 करोड़ रुपए का निवेश करने का ऐलान किया. इसके तहत वह ब्रिटेन में अपना एक नया बिक्री कार्यालय खोलेगी. निःसंदेह इस कारोबारी पहल से दोनों देशों के आर्थिक भागीदारी को नई ऊंचाई मिलेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होगा. उल्लेखनीय है कि भारत दुनिया का अब तक का सबसे बझ बाजार है. आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था का डंका बजने वाला है. एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत वर्ष 2025 तक ब्रिटेन को पछाड़कर फिर दुनिया की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2030 तक भारत तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.

एक रिपोर्ट के मुताविक अर्थव्यवस्था के आकार में भारत 2025 में ब्रिटेन से 2027 में जर्मनी से और 2030 में जापान से आगे निकल जाएगा. संभवतः यही वजह है कि ब्रिटेन भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर बेहद गंभीर है, वर्चुअल वार्ता से पहले ब्रिटिश पीएम जॉनसन ने भारत में एक अरब पाउंड यानी दस हजार करोड़ रुपए निवेश करने का ऐलान किया. उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के मध्य व्यापार एवं पूंजी निवेश में तीव्रता आई हैं. जहां तक द्विपक्षीय व्यापार का सवाल है। तो ब्रिटेन भारत का विश्व में दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी देश बन चुका है. अच्छी बात है कि दोनों देश भरोसे की कसौटी पर खरे उतरते हैं और कोविड-19 के बुरे दौर में एकदूसरे का हाथ मजबूती से पकड़े हैं.

गौरतलब है कि दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार जो 2018-19 में 16.7 अरब डॉलर, 2019-20 में 15.5 अरब डॉलर था वह अब बढ़कर 23 अरब डॉलर यानी 2.35 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच चुका है. इससे दोनों देशों के तकरीबन 5 लाख लोगों को रोजगार मिलता है. गौर करें तो ब्रिटेन में लगभग 800 से अधिक भारतीय कंपनियां हैं जो आईटी क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है. इस संदर्भ में टाटा इंग्लैंड में नौकरियां उपलब्ध कराने वाली सबसे बड़ी भारतीय कंपनी बन चुकी है. भारतीय कंपनियों का विदेशों में कुल निवेश 80 मिलियन अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया है.

(लेखक- अरविंद जय तिलक)

RECOMMENDED FOR YOU

Loading...