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जम्मू-कश्मीर में मजबूत हो रही स्वास्थ्य प्रणाली

जम्मू-कश्मीर में मजबूत हो रही स्वास्थ्य प्रणाली

श्रीनगर, 2 मई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 2022-23 के बजट में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए 1,484.72 करोड़ रुपये निर्धारित करते हुए अपने नागरिकों के लिए सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की हैं।

जम्मू-कश्मीर एक साथ स्वास्थ्य मेलों, स्वास्थ्य योजनाओं, चिकित्सा बुनियादी ढांचे का निर्माण, स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, चिकित्सा अनुसंधान के लिए प्रख्यात शिक्षाविदों के साथ सहयोग और सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषण के साथ दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना को सफलतापूर्वक चला रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2020 में आयुष्मान भारत-सेहत योजना शुरू की थी, जिसके तहत लगभग 1,000 मरीज जम्मू-कश्मीर में मुफ्त आईपीडी (इनपेशेंट डिपार्टमेंट केयर) इलाज के लिए आवेदन करते हैं। लाभार्थियों को गोल्ड कार्ड दिया जाता है, जो कि एक ऐसा स्वास्थ्य बीमा कार्ड है, जिसे मुफ्त इलाज के लिए चिकित्सा केंद्रों में दिखाया जा सकता है। अब तक 60 लाख कार्ड जारी किए जा चुके हैं और 16.36 लाख परिवारों में कम से कम एक सदस्य सेहत में पंजीकृत है।

यह योजना पैनलबद्ध सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में हर साल एक परिवार को 5 लाख रुपये का सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है। नागरिकों के चिकित्सा बिलों के वितरण के लिए सरकार द्वारा प्रतिदिन 1.7 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाती है।

स्वास्थ्य योजना के तहत 100 प्रतिशत परिवारों को कवर करने वाला सांबा जिला भारत का पहला जिला है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने 3,04,510 लोगों के साथ 62,641 परिवारों को गोल्डन कार्ड के लिए पंजीकृत किया है। जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य क्रांति ने इसे देश के प्रमुख राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में शीर्ष स्थान दिलाया है। केंद्र शासित प्रदेश के आगामी चिकित्सा बुनियादी ढांचे में 2 एम्स, 7 नए मेडिकल कॉलेज, 2 कैंसर संस्थान, 10 नए नसिर्ंग कॉलेज, 150 जिला/उप-जिला अस्पताल और हजारों स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, तीन स्थानों को मेडिकल सिटी – सेम्पोरा (पुलवामा), लेल्हार (पुलवामा) और बेमिना (श्रीनगर) में परिवर्तित करने के लिए अंतिम रूप दिया गया है। जम्मू-कश्मीर पिछले कुछ महीनों में शीर्ष निवेश गंतव्य के रूप में उभरा है। खाड़ी से यूटी की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। कुल 5,000 नए अस्पताल बिस्तर और 1,000 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटों की प्रक्रिया भी चल रही हैं जो जम्मू-कश्मीर में रोगी देखभाल के ढांचे को बदल देंगी। गत वर्ष सभी जिलों में स्वास्थ्य संबंधी नींव मजबूत करने के लिए 881 करोड़ रुपये की 140 परियोजनाओं को पूरा किया गया है।

इसके अलावा सभी के लिए आवश्यक चिकित्सा उपचार को वहनीय बनाने के लिए, जम्मू-कश्मीर में 108 जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। केंद्रों ने अर्नास, दारमी (रियासी), सेडो (शोपियां), तंगदार, कलारोज और सोगम (कुपवाड़ा) जैसे दुर्गम क्षेत्रों को छुआ है। यहां दवाओं की कीमत बाजार भाव से 50-90 फीसदी कम है।

एक सुलभ स्वास्थ्य सुविधा सभी नागरिकों का अधिकार है और इस मानक को हासिल करने के लिए जमीनी स्तर पर उपाय किए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी जिलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 11 मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयां काम कर रही हैं।

जम्मू-कश्मीर कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में देश के लिए आदर्श राज्य के रूप में उभरा है। पात्र आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया गया है और 15-17 आयु समूहों के लिए टीकाकरण अभियान प्रक्रिया में है। केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने सक्षम योजना भी जारी की है, जिसके तहत स्कूली बच्चों को 20,000 रुपये प्रति वर्ष और कॉलेज के छात्रों को 40,000 रुपये प्रति वर्ष की छात्रवृत्ति उन परिवारों के लिए दी जाएगी, जिन्होंने कोविड के कारण अपने कमाने वाले को खो दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र शासित प्रदेश के विकास के लिए कई बार सबका साथ, सबका प्रयास ²ष्टिकोण पर प्रकाश डाला है। इस महीने मिशन यूथ ने अपने सदस्यों के लिए इमर्सिव इमरजेंसी फस्र्ट रिस्पॉन्डर ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया है। सरकार मानती है कि युवाओं को दिया जाने वाली बुनियादी कौशल का ज्ञान विषम परिस्थितियों में हजारों लोगों की जान बचाएगा।

जिले भर में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य मेला जोरों पर चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा हजारों रोगियों की जांच की जा रही है, जिन्होंने जरूरतमंदों के लिए स्त्री रोग, ईएनटी, नेत्र, बाल स्वास्थ्य विशेषता, त्वचा विज्ञान, सामान्य चिकित्सा, हड्डी रोग, मानसिक स्वास्थ्य, दंत चिकित्सा आदि के निदान के लिए स्टाल लगाए हैं। नैदानिक परीक्षण और मुफ्त दवाएं वितरित की जा रही हैं। जरूरतमंद लोगों को उनके स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का जमीनी स्तर पर निदान करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने खाद्य सुरक्षा, आयुष और युवा सेवा और जिला खेल विभागों को पौष्टिक भोजन, योग और व्यायाम के महत्व के बारे में बात करने के लिए भी प्रोत्साहित किया है।

यूटी के पास कश्मीर में आठ व्यसन उपचार सुविधाओं (एटीएफ) के साथ एक प्रमुख राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम है, जिससे युवाओं को जम्मू-कश्मीर के कठिन समय के आघात से उबरने में मदद मिलती है।

आज जम्मू-कश्मीर केवल चिकित्सा प्रतिष्ठानों और सेवाओं में सबसे आगे नहीं है, बल्कि यह चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धा के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है।

–आईएएनएस

एकेके/एएनएम

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