Sunday, 12 April

भोपाल। क्या बीजेपी में ज्योतिरादित्य सिंधिया का कद कम किया जा रहा है? क्या चंबल ग्वालियर में सिंधिया का जलवा घटता जा रहा है? और क्या आने वाले दिनों में सिंधिया बीजेपी के एक मामूली नेता की तरह ही हो जायेंगे? 

सवाल तो उठना स्वाभाविक है। लेकिन इनके पीछे एक कारण आज मंत्रिमंडल के गठन में भी देखने को मिल रहा है। मार्च 2020 में भाजपा की शिवराज सरकार में सिंधिया समर्थकों काे इनाम के तौर पर मंत्री बनाया गया था। तब 33 मंत्रियों में सिंधिया खेमे के 9 मंत्री थे, यानी 27 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इस बार विधानसभा पहुंचे सिंधिया समर्थक 6 विधायकों में तीन को मंत्री बनाया गया है। इस लिहाज से सिंधिया खेमे की मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी 10 फीसदी रह गई है। हालांकि मार्च 2020 में सिंधिया खेमे के विधायकों की संख्या भी 17 थी।

सिंधिया समर्थक तीन मंत्री तीन अंचलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। तोमर ग्वालियर चंबल, राजपूत बुंदेलखंड और तुलसी मालवा से आते हैं। तीन मंत्रियों में दो सामान्य वर्ग से और एक एससी वर्ग से हैं।

गोविंद सिंह राजपूत : सुरखी विधानसभा से विधायक हैं। सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। कांग्रेस के बाद भाजपा सरकार में भी मंत्री बनाए गए। राजपूत और इसी जिले के भूपेंद्र सिंह में छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है।असल में यहां से कद्दावर मंत्री रहे भूपेंद्र सिंह और गोपाल भार्गव को कैबिनेट में शामिल नहीं करने से गोविंद की राह आसान हुई। यही नहीं, सिंधिया खेमे से होने के साथ-साथ भाजपा सरकार से अच्छा तालमेल बनाए रखा।

तुलसीराम सिलावट : इंदौर के सांवेर से विधायक हैं। ये भी सिंधिया के खास समर्थकों में शामिल हैं। पिछली बार जल संसाधन विभाग मिला था। मालवा से आने वाले सिलावट को इस बार भी मंत्री बनाया गया है। सिंधिया खेमे के होकर भी भाजपा में जल्दी घुल-मिल गए। शिवराज के नजदीकी रहे। संगठन में भी खुद को भाजपा कार्यकर्ता के तौर पर प्रोजेक्ट किया।

प्रद्युम्न सिंह तोमर : मंत्रिमंडल विस्तार से पहले भोपाल एयरपोर्ट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के चरणों में लेट कर आशीर्वाद लेने वाली तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। प्रद्युम्न सिंह तोमर कांग्रेस और शिवराज सरकार के बाद अब मोहन सरकार में भी कैबिनेट मंत्री बने हैं। शिवराज सरकार में ऊर्जा मंत्री रहते अच्छा परफॉर्मेंस रहा। ग्राउंड पर एक्टिव रहे। सड़कें नहीं बनने तक चप्पल नहीं पहनने के बयान से शिवराज को चुनौती दी। परफॉर्मेंस के साथ सिंधिया का साथ मिलना फायदेमंद रहा।

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