Sunday, 12 April

भोपाल। मैहर जिले में चेचक के चलते दो बच्चों की मौत और करीब डेढ़ दर्जन बच्चों के प्रभावित होने का आंकड़ा सामने आने के बाद प्रशासनिक अमले में अफरा तफरी मची हुई है. दरअसल, जहां ये मामले सामने आए हैं. वह ब्लॉक चेचक के मामले में हाई अलर्ट था. इसके बावजूद सर्विलांस टीम सक्रिय नहीं हुई. मीजल्स के मामले में पिछले दिनों दिए गए प्रशिक्षण में यह स्पष्ट किया गया था कि अगर ब्लॉक में मीजल्स रूबेला (Measles Rubella) के प्रभावित बच्चों का आंकड़ा पांच के पार पहुंचता है, तो इसे ‘आउट ब्रेक’ स्थिति मानते हुए तुरंत कांटेक्ट ट्रेसिंग की जाए. मगर मैहर ब्लॉक (Maihar Blaock) में ऐसा संभवत: नहीं किया गया. यही कारण है कि आठ गांवों में करीब डेढ़ दर्जन बच्चे मीजल्स रूबेला की चपेट में आ गए. इसके बाद ही टीम सक्रिय हुई।

स्वास्थ्य विभाग के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर रैंक के एक अधिकारी ने बताया कि जैसे ही गांव में कोई एक चेचक के प्रभाव में आता है, तो तुरंत आशा, एएनएम और बीएमओ को इस मामले में सक्रिय होना चाहिए था. वहीं, हालात इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि जब मामला बिगड़ गया, तब जाकर अधिकारियों की नींद खुली. अब देखना होगा कि इस सर्विलांस फॉलोअर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी किस प्रकार का एक्शन लेते हैं।

इसलिए बिगड़े हालात

वैक्सीन प्रीवेंटिव डिजीज के मामले में जांच दो चरणों में की जाती है. बीमारी का पता चलने के सात दिन के अंदर प्रभावित लोगों के ब्लड तथा थ्रोट की जांच का जाती है. 28 दिन के अंदर बीमारी पता चलने के बाद केवल ब्लड सैंपल लेकर उसके सीरम की जांच कराई जाती है. मैहर ब्लॉक में सामने आई बीमारी के मामले में न तो पहले चरण का और न ही दूसरे चरण का सर्वे हुआ है, जिससे स्थिति इतनी क्रिटिकल हुई।

 पहुंच सकती है डब्ल्यूएचओ की टीम

मैहर में मीजल्स रूबेला का प्रकरण अब स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ा सर दर्द बन चुका है. जैसे ही इस प्रकरण के संबंध में जानकारी विभाग ने अपने रिकॉर्ड में दर्ज की तो मैहर और सतना से लेकर दिल्ली तक हडकंप मच गया. बताया जाता है कि इस मामले में डब्ल्यूएचओ की टीम कभी भी मैहर पहुंच सकती है. हालांकि, अभी स्वास्थ्य विभाग इस मामले को लेकर कोई भी पुष्टि करने से बच रहा है।

Share.
Exit mobile version